राजनाथ सिंह ने बताया कि इमरजेंसी के वक्त उन्हें जेल में डाला गया था, उस समय उनकी माँ को ब्रेन हैमरेज हुआ, 27 दिन बाद उनका निधन हुआ, लेकिन उन्हें पैरोल नहीं दी गई।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता इस बात को लेकर अदालत को संतुष्ट करने में नाकाम रहा कि वो सप्ताह में 2 बार अपनी लीगल टीम के साथ बैठक का इस्तेमाल सिर्फ सुनवाइयों के संबंध में चर्चा करने के लिए कर रहा है।
उन्होंने आगे कहा, "ये मोदी सरकार का कानून है, जिसे कोई बदल नहीं सकता। वो (ममता बनर्जी) रोहिंग्याओं का रेड कारपेट बिछाकर स्वागत करती हैं, और असली शरणार्थियों को मिसलीड करती हैं। बंगाल में आए सभी शरणार्थियों को बिना डर के नागरिकता के लिए आवेदन करना चाहिए।"
नेहरू ने अक्साई चीन के बारे में जो कहा था, कच्चातिवु को लेकर दिग्गी राजा ने वही दोहराया है। उनके लिए भारतीय मछुआरों की समस्याएँ 'बेकार की बातें' हैं। तमिलनाडु की राजनीति पर पड़ेगा प्रभाव? उधर भाजपा सरकार सीमाओं पर इंफ़्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में लगी है।