प्रोपेगेंडा वेबसाईट TheWire एक फर्जी खबर चलाता है - योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ। सरकार के द्वारा FIR दर्ज की जाती है। इससे स्वघोषित फैक्ट-चेकर प्रतीक सिन्हा बौखला जाता है। इसे लेकर वह न सिर्फ ANI पर सवाल उठाता है बल्कि प्रेस स्वतंत्रता से भी जोड़ देता है।
"हमारी चेतावनी के बावजूद इन्होंने अपने झूठ को ना डिलीट किया ना माफ़ी माँगी। कार्रवाई की बात कही थी, FIR दर्ज हो चुकी है आगे की कार्यवाही की जा रही है। अगर आप भी योगी सरकार के बारे में झूठ फैलाने के की सोच रहे है तो कृपया ऐसे ख़्याल दिमाग़ से निकाल दें।"
सीएम योगी के मीडिया सलाहकार सिद्धार्थ वरदराजन को चेताया कि अगर उन्होंने अपनी इस फेक न्यूज़ को तुरंत डिलीट नहीं किया तो कार्रवाई की जाएगी और उन पर मानहानि का मुकदमा भी चलाया जाएगा। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए ये भी कहा कि कार्रवाई के बाद वेबसाइट के साथ-साथ केस लड़ने के लिए भी सिद्धार्थ वरदराजन को डोनेशन माँगना पड़ जाएगा।
इसी बीच उसका एक और प्रोपेगंडा सामने आया है। वो कई देशों के स्वतंत्रता संग्राम पर भी वीडियो बनाता रहा है। इस दौरान वो जम्मू कश्मीर का नाम तो लेता है लेकिन कभी भी बलूचिस्तान के बारे में कुछ नहीं कहता।
टाइम्स के पत्रकार का अगर आप विडियो देखेंगे और कैप्शन पढ़ेंगे तो UP पुलिस के प्रति गुस्सा उमड़ेगा। मगर, इससे पहले कि कंवरदीप की आधी-अधूरी जानकारी का आप शिकार हों, आपको बता दें कि जैसा वो दर्शाने की कोशिश कर रहे हैं, हकीकत उससे थोड़ी उलट है। वास्तविकता में जो विडियो में दिख रहा है, उसका उद्देश्य लोगों को सैनेटाइज करना था।
प्रोफेसर कौशल किशोर ने रवीश कुमार को सलाह देते हुए कहा कि वो थोड़ी सकारात्मक बातें भी करें। जब प्रधानमंत्री देश की जनता की परेशानी के लिए क्षमा माँग रहे हैं, ऐसे में रवीश क्या कहते हैं कि देश की सारी जनता मर जाए?
प्रसार भारती ने दि प्रिंट की इस खबर को शेयर करते हुए बताया है कि ये फेक न्यूज है। उनका कहना है कि प्रसार भारती इस खबर को लेकर लगातार कैबिनेट के संपर्क में है और कैबिनेट ने इसे लेकर हैरानी जताई है। कैबिनेट का साफ कहना है कि अभी तक उनके पास इस तरह का कोई प्लान नहीं है कि वे लॉकडाउन को एस्टेंड करने वाले हैं।
कथित पत्रकार आरफा खानम चाहती है कि भारत जल्द ही कोरोना से उबरे। ताकि फिर से सीएए, एनआरसी के खिलाफ देशभर में आंदोलन शुरू हो। यह तब तक जारी रहे जब तक कि सरकार इसे वापस नहीं ले लेती।
इस लेख को लिखा तो गया है कोरोना के ऊपर लेकिन इसकी शुरुआत होती है सीएए और हिंदुत्व को गाली देने से। साथ ही मोदी सरकार को 'हिन्दू राष्ट्रवादी सरकार' कह कर सम्बोधित किया गया है, जो इनलोगों का फेवरेट टर्म है।
इस ख़बर के सामने आने के बाद जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी ने इसे नकार दिया। अमेरिका के मेरीलैंड में स्थित यूनिवर्सिटी ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया कि उसने ऐसा कोई रिसर्च प्रकाशित नहीं किया है। यूनिवर्सिटी ने लिखा कि इस कथित 'रिसर्च' में उसके लोगो और नाम का भी ग़लत इस्तेमाल किया गया है।