पत्रकारों की एक एसोसिएशन के पदाधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार पिछले सप्ताह यहाँ आयोजित एक विशेष शिविर में 171 मीडियाकर्मियों का परीक्षण किया गया था। जिसमें कम से कम 53 पत्रकार कोरोना संक्रमित पाए गए।
ये गुस्सा, ये नाराजगी जो हमें अर्नब के शो में उनके चेहरे पर पिछले कुछ दिनों में दिखाई पड़ी। उसका कारण उनकी कोई निजी दुश्मनी नहीं है। बल्कि इसकी वजह उन जमातियों का जाहिलपना है जिसके कारण आज देश भर में कोरोना बुरी तरह फैला।
सामिया लतीफ ने लिखा कि विधायक इमरान पीएम मोदी या अमित शाह से क्यों नहीं मिले। लतीफ़ का इशारा था कि पीएम मोदी और एचएम शाह को भी कोरोना वायरस का संक्रमण हो जाए। वो चाहती हैं कि कोई कोरोना पॉजिटिव मरीज मोदी-शाह से मिले।
ये सवाल उठता है कि तब पुलिस और प्रशासन क्या कर रहा था, जब ये भीड़ जुटनी शुरू हुई। क्या पुलिस देखती रही और भीड़ जुटती रही? क्या महाराष्ट्र सरकार ने न्यूज़ चैनल से सम्पर्क कर के बताया कि स्पेशल ट्रेनें नहीं चलेंगी?
The Quint ने दावा किया कि वह अपने एम्प्लॉई को अनिश्चितकाल के लिए अवैतनिक अवकाश पर भेज कर खुश नहीं है, और वह अपने इन एम्प्लॉई की हमेशा शुक्रगुजार रहेगी। The Quint के अलावा दूसरे मीडिया संगठनों से भी कोरोना वायरस के चलते फरलो और नौकरी से निकाले जाने की खबरें आ रहीं हैं
माइग्रेंट्स ने कभी भी खुद को सरकारी एजेंसियों से छुपाने की कोशिश नहीं की। सच तो यह है कि वे बड़ी मुश्किल में हैं इसलिए वो हर जगह खुद से सामने आए, जिनकी सहायता में राज्य और केंद्र सभी सरकारों ने वो सभी प्रकार की सहायता उन्हें मुहैया कराई जिसकी उन्हें जरूरत थी। इस प्रकार से जमातियों को माइग्रेंट्स के साथ एक खाने में रखना बदनीयती के अलावा कुछ नहीं समझा जाना चाहिए।
जर्नलिस्ट चित्रा त्रिपाठी आजतक का शो एंकर कर रही थीं। उन्होंने अपने शो में कह दिया कि ममता बनर्जी ने राज्य में लॉकडाउन को इस महीने की 40 तारीख तक बढ़ा दिया है।
मदरसों में छात्रों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। कोरोना जैसी महामारी के बीच उन्हें जानवरों की तरह रखा जा रहा है। लेकिन वामपंथी कविता कृष्णन चाहती हैं कि मदरसों की इस हरकत पर मीडिया चुप्पी साध ले और बच्चों को मरने दे।
खुद को देश के नागरिकों का हितैषी स्थापित करते हुए दुआ ने देश की जनका को वीडियोज में न केवल जमकर भड़काया है। बल्कि अपने कुतर्कों से उन्हें गुमराह करने की कोशिश की है। वीडियोज की शुरुआत से लेकर अंत तक में विनोद दुआ एक भी बार देश के नागरिकों को कोरोना से बचे रहने की बात कहते नजर नहीं आते। बल्कि सरकार के ख़िलाफ़ बोलते, उनके फैसलों की निंदा करते और लोगों को उकसाते नजर आते हैं।