शेखर गुप्ता ने दावा किया कि नागरिकता संशोधन विधेयक वह नहीं है, जिसके लिए भाजपा को वोट दिया गया था। जबकि थोड़ा सा गूगल कर लेते तो उनके जैसे 'वरिष्ठ' पत्रकार को लोकसभा चुनाव 2019 में BJP का घोषणापत्र मिल जाता, जिसमें साफ-साफ लिखा है कि...
राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट कर कहा है कि कॉन्ग्रेस और जेडीएस अभी भी गुटबाजी में फॅंसी है। उन्होंने पैसे और सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल से नतीजों पर असर डाले जाने की बात भी कही है।
तवलीन सिंह का दावा है कि नागरिकता संशोधन विधेयक के माध्यम से मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। लेखों में वह जिस भाषा का उपयोग करती है, उससे यह जानना मुश्किल हो जाता है कि वह CAB की बात कर रही हैं या फिर NRC की। शायद उसके हिसाब से दोनों एक ही मुद्दा है......
'द न्यूजरूम' जैसे अमेरिकी टीवी शो में NDTV के नाम का मजाक उड़ाया जाना एक ऐसा कारनामा था, जिसने लोगों का काफी ध्यान खींचा, NDTV का भी। इसके बाद NDTV का वापस से प्रतिष्ठा हासिल करना असंभव सा लगता है।
विदेशी पत्रकार डेक्स्टर ने लिखा कि जब वो श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरे, तो राणा अयुब ने उन्हें ‘विदेशियों के लिए पंजीकरण’ डेस्क पर जाने से रोक दिया। हवाई अड्डे पर हंगामा का लाभ उठाते हुए, वे दोनों बिना किसी रोक-टोक के और बिना पंजीकरण करवाए आराम से बाहर निकल गए।
दरअसल द प्रिंट और शिवम विज का सोचना यह है कि एक दशक पुरानी बात, जब समय और परिस्थितियाँ अलग थीं, उस समय की घटनाओं और परिस्थितियों का हवाला देते हुए आज के समय में वो अपने प्रोपेगेंडा को फैलाने में इस्तेमाल कर सकते हैं।
जहाँ पूरा देश डॉक्टर रेड्डी के साथ हुई जघन्यता के लिए इंसाफ की माँग कर रहा है, 'द क्विंट' इस बात को लेकर चिंतित है कि अब मुख्य आरोपित मोहम्मद आरिफ के जेल जाने के बाद मुख्य अभियुक्त आरिफ के परिवार का गुजारा कैसे होगा? पूरी रिपोर्ट में उसे 'बेचारा' साबित करने की कोशिश की गई है।
शिवसैनिकों ने उनके स्टूडियो में घुस कर उनकी पिटाई की थी। शिवसेना कार्यकर्ताओं ने निखिल वागले के चेहरे पर स्याही पोत दी थी। उस पिटाई के बाद वागले अक्सर शिवसेना की आलोचना करते मिलते थे। बाल ठाकरे ने वागले की पटाई करने वाले शिवसैनिकों की सराहना की थी।
बरखा दत्त ने एक इंटरव्यू में कबूल किया था कि मुंबई हमले के दौरान टीवी चैनलों और उनके पत्रकारों ने जिस तरह की रिपोर्टिंग की उससे सैकड़ों लोगों की जान ख़तरे में आ गई थी। यहॉं तक कि सुरक्षा बलों के जवानों की जान भी ख़तरे में पड़ गई थी।