अमेज़न के जंगलों पर चिंता व्यक्त करने वाले कम्युनिस्टों ने माधव गाडगिल समिति की रिपोर्ट के ख़िलाफ़ कई प्रदर्शन किए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि पश्चिमी घाट के जंगलों को नुक़सान पहुँचाने के कारण केरल में पर्यावरणीय आपदाएँ आ सकती हैं।
“आप काहे के पत्रकार हैं? पीएम मोदी ने इतना बड़ा काम कर दिया, आप लोगों पर असर नहीं है क्या? आप हिन्दुस्तानी हैं? क्या आप एक भारतीय हैं? भारतीय होने पर गर्व है? पत्रकारिता की बात मत करो। राष्ट्र की बात करो। अगर आपको नरेंद्र मोदी का काम नज़र नहीं आता तो आप हिन्दुस्तानी हैं ही नहीं।”
कुंठायुक्त विरोधाभासी रवैये की पराकाष्ठा पर टीवी फोड़ डालने की सलाह देने वाले रवीश कुमार ने इस बात पर नाराज़गी जताई कि लोग उनके शो के दौरान टीवी बंद कर देते हैं। आप ख़ुद दोनों वीडियो देखिए और सोचिए कि रवीश आख़िर चाहते क्या हैं?
इन पत्रकारों के द्वारा निशाने पर लिए गए अधिकारियों के ख़िलाफ़ कंटेंट्स को व्हाट्सप्प और फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर फैलाया जाता था। एफआईआर में दर्ज किया गया है कि इन्होने 'अभिव्यक्ति की आज़ादी' का ग़लत फायदा उठाते हुए आधारहीन ख़बरें चलाईं।
पाकिस्तानी मीडिया ने इंडिया टुडे पर मौसमी सिंह द्वारा पोस्ट किए गए उस क्लिप का इस्तेमाल करके यह दिखाने का झूठा प्रयास किया है कि कश्मीर में अत्यधिक बल का उपयोग किया जा रहा है।
श्रद्धांजलि देने के नए अंदाज में नेशनल हेराल्ड ने जेटली की योग्यता और प्रतिबद्धता को पूर्ण रूप से नकारते हुए 2014 में वित्त मंत्री के तौर पर उनकी नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए हैं। कहा है कि 2002 दंगों के बाद कानूनी जंजालों से बचाने का एहसान मोदी ने उन्हें वित्त मंत्री बनाकर उतारा।
एक पाकिस्तानी ने ट्वीट किया, "पहले सुषमा स्वराज और अब अरुण जेटली। इंशाअल्लाह अगले नरेंद्र मोदी और अमित शाह होंगे, क्योंकि इनकी मौत के लिए कश्मीरी दुआ कर रहे हैं। कश्मीर में अत्याचार के लिए ये लोग गुनहगार हैं। ये सब नरक में सड़ेंगे।"
स्व-घोषित 'उदारवादियों' और लिबरपंथियों का यह रेगुलर पैटर्न बन गया है। ये किसी भी भाजपा नेता की मृत्यु के बाद जश्न मनाते हैं। संवेदना, संस्कृति, जीवन-मरण जैसे शब्द इनकी डिक्शनरी में मानो है ही नहीं। अगर होता तो शायद ये वो नहीं होते, जो आज ये बन चुके हैं!
"सर आप इस इमेज को ट्वीट करके चिदंबरम के ख़िलाफ़ पुलिस द्वारा किए जा रहे 'अत्याचार' को बंद करवा सकते हैं।" इस पर पाकिस्तानी सांसद ने तीव्र उत्सुकता में आकर लिख डाला - संयुक्त राष्ट्र के साथ इस इमेज को शेयर कर रहा हूँ।
जब संजीव नेवर की शिकायत पर राष्ट्रीय SC आयोग ने हस्तक्षेप किया तो जाँच में निकल कर आया कि पुलिस ने कई सारी गलतियाँ की थीं। SHO को मूल FIR बदलने के लिए निलंबित कर दिया गया, और बदले के इरादे से पीड़ित परिवार पर दाखिल दो FIRs नकली निकलीं, और पीड़ितों को पुलिस सुरक्षा दी गई।