अपने तीखे हमलों के लिए अमेरिका ही नहीं, पूरी दुनिया में जाने जाने वाले ट्रम्प ने इन्हें नज़रंदाज़ करने की बात करते हुए कहा, "ये इतने मूर्ख हैं कि इन्हीं के लिए शैम्पू की बोतल जैसी सरल चीज़ पर भी इस्तेमाल करने का तरीका लिखा जाता है।"
1659 में औरंगज़ेब के मक्का को 600,000 रुपए देने का ज़िक्र करते हुए True Indology ने बताया है कि उस समय एक रुपए में 280 किलो चावल आता था। यानी करीब 2 लाख टन चावल खरीदे जाने भर का पैसा औरंगज़ेब ने हिन्दुस्तानियों से लूट कर मक्का भेजा।
बरखा दत्त के उनकी पत्नी पर गाली-गलौज का आरोप लगाने और पत्रकारों को आनन-फानन में निकाले जाने की खबरों के बीच उनके चैनल के एक सीनियर प्रोड्यूसर पर एक महिला जर्नलिस्ट ने अभद्र संदेश वॉट्सऍप पर भेजने का आरोप लगाया है।
यह सही है कि विज्ञान प्रमाण और सबूतों पर आधारित होता है। आम तौर पर कहा जाता है कि मंदिर के अनुष्ठानों की प्रकृति के बारे में सबूत अपर्याप्त हैं। हो सकता है कि उनका ये कहना सही हो कि लॉन्च से पहले मंदिर में जाना एक 'अवैज्ञानिक परंपरा' है, लेकिन ऐसा करने में हर्ज ही क्या है? इससे इतने सारे लोग परेशान क्यों हैं?
एक हिंदू लड़की को उसके मुस्लिम बॉयफ्रेंड द्वारा बर्बर तरीके से मार दिया जाता है और तुम्हें मजाक सूझ रही है। अगर यह उल्टा होता तो फेविकॉल पी के शांत बैठी रहती। मौत पर व्यंग्य करके इंसान गिरने की सीमा से भी परे होकर गिर जाता है।
IANS ने पिछले साल पीएम मोदी के बारे में बताने के लिए एक अपशब्द का इस्तेमाल किया था। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित एक नई योजना के बारे में बताते हुए IANS के पत्रकार ने नरेंद्र मोदी के मिडिल नेम में ‘Bakhch**d’ शब्द का इस्तेमाल किया था।
"चैनल के ठप्प हो जाने के पीछे प्रधानमंत्री मोदी को वजह बताना बिलकुल झूठ है, भारत सरकार ने कुछ नहीं किया है। इन पति-पत्नी ने तिरंगा TV के स्टाफ़ से मिलने की कोशिश तक नहीं की और चैनल बंद करके लंदन चले गए, जिस कारण मैं इन्हें माल्या बुलाने पर मजबूर हूँ।"
“भले ही सरकार तुम्हारी है, लेकिन हुकूमत हमारा चलता है। हमारी वजह से तुम्हारा हिंदुस्तान बसा हुआ है। तुम कितना भी कुछ कर लो, पलड़ा हम मुस्लिमों का ही भारी है और अगर हम अपने पर आ गए, तो तुम्हारे घर के बच्चों को भी नहीं छोड़ेंगे।”
राणा सफ़वी ने अपने लेख में भारत की जीडीपी के आँकड़े दिखा कर मुग़लों को महान साबित करने की कोशिश की है लेकिन उनकी चालाकी पकड़ी गई। हमारे घर में घुस कर हमारे मंदिर तोड़ने वाले मुग़लों की चापलूसी करने वाले कल को जलियाँवाला नरसंहार को भी सही ठहरा सकते हैं।
कारवाँ के कार्यकारी सम्पादक विनोद के. होज़े ने लंदन में भारत-विरोधी प्रेज़ेंटेशन दिया। उन्होंने दावा किया कि हिंदुस्तान के अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि "सैकड़ों ईसाईयों की हत्या हो रही है।" और "1984 का सिख हत्याकांड भी आरएसएस का रचा हुआ था।"