लोकतांत्रिक व्यवस्था में आलोचना के लिए हमेशा स्थान रहेगा और परंपरा के अनुसार विपक्ष प्रधानमंत्री के भाषण को एक निरुत्साह वाला भाषण भी बता सकता है पर एक आम भारतीय के लिए उनका संबोधन आशा देता है और उसे प्रेरित भी करता है।
मोहन भागवत ने भविष्य के बारे में बात करते हुए कहा कि दुनिया भारत की ओर देख रही है और भारत को किसी की नकल करने की जरूरत नहीं है क्योंकि भारत के पास हजारों साल पुराना आर्थिक विचार है जो अधूरा नहीं है।
राकेश टिकैत एनडीटीवी से इंटरव्यू के दौरान भारत के स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के बीच कन्फ्यूज हो गए जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी जमकर खिंचाई हो रही है।
हमें एक ऐसा संगठन दिखाई देता है जिसके लिए स्त्री एक योनि से अधिक कुछ है ही नहीं! वो इस बात की पैरोकारी करते हैं कि लड़कियों को शिक्षा भी नहीं दी जानी चाहिए।