दारुल उलूम देवबंद के उलेमा का कहना है कि दरोगा को दाढ़ी नहीं कटवानी चाहिए थी चाहे तो वह नौकरी छोड़ देते। शरीयत के हिसाब से उन्होंने बहुत बड़ा जुर्म किया है।
उन्हें जम कर भाजपा का डर दिखाया। इससे वो मुस्लिमों के मसीहा भी बने रहे और यादवों का वोट भी उन्हें मिलता रहा। इस तरह उन्होंने MY समीकरण बना कर राज किया।