कोर्ट ने कहा कि सभी बातों से ये मालूम होता है कि मुंबई पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 174 के तहत जो जाँच की, वह निश्चित कारण के लिए बहुत सीमित थी। इस केस को अपराध की धारा 157 के तहत नहीं जाँचा गया।
"पाकिस्तान में जम्हूरियत (लोकतंत्र) किसी की बेटी, किसी का बेटा है। यह शर्मनाक है कि लोकतंत्र के नाम पर, इस तरह के घृणित और शर्मनाक भाई-भतीजावाद को यहाँ चलाया जा रहा है।"