Friday, July 23, 2021
Homeदेश-समाजसुशांत सिंह राजपूत मामले की जाँच करेगी CBI, महाराष्ट्र सरकार करे मदद: सुप्रीम कोर्ट...

सुशांत सिंह राजपूत मामले की जाँच करेगी CBI, महाराष्ट्र सरकार करे मदद: सुप्रीम कोर्ट के आदेश से रिया को झटका

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में दर्ज FIR को भी सही ठहराया है। साथ ही मुंबई पुलिस को जाँच में सहयोग करने का आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस को बड़ा झटका लगा है।

सुशांत सिंह राजपूत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। रिया चक्रवर्ती की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की जाँच सीबीआई (CBI) करेगी और महाराष्ट्र सरकार को इसमें मदद करनी है। सीबीआई (CBI) इस मामले में नया केस जल्द रजिस्टर कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में दर्ज FIR को भी सही ठहराया है। सारा विवाद इसी बात को लेकर था कि बिहार में इस केस को क्यों ले जाया गया और इसे वापस ट्रांसफर किया जाए। साथ ही मुंबई पुलिस को जाँच में सहयोग करने का आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस को बड़ा झटका लगा है। ख़बरों के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार इस फैसले को चुनौती भी दे सकती है।

बता दें कि सुशांत के परिवार के वकील विकास सिंह ने कहा है कि रिया चक्रवर्ती ने सुशांत सिंह राजपूत का इस्तेमाल किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिया के व्यवहार से ये बात स्पष्ट हो गई है। जैसे ही सुशांत से रिया की जरूरतें पूरी हो गईं, उन्होंने सुशांत को अपनी जिंदगी से निकाल बाहर किया। विकास ने आरोप लगाया कि सुशांत कमरे में सोते रहते थे और रिया अपने दोस्तों के साथ पार्टियों में मशगूल रहती थी।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘कौन है स्वरा भास्कर’: 15 अगस्त से पहले द वायर के दफ्तर में पुलिस, सिद्धार्थ वरदराजन ने आरफा और पेगासस से जोड़ दिया

इससे पहले द वायर की फर्जी खबरों को लेकर कश्मीर पुलिस ने उनको 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया था। उन पर मीडिया ट्रॉयल में शामिल होने का भी आरोप है।

जिस भास्कर में स्टाफ मर्जी से ‘सूसू-पॉटी’ नहीं कर सकते, वहाँ ‘पाठकों की मर्जी’ कॉर्पोरेट शब्दों की चाशनी है बस

"भास्कर में चलेगी पाठकों की मर्जी" - इस वाक्य में ईमानदारी नहीं है। पाठक निरीह है, शब्दों का अफीम देकर उसे मानसिक तौर पर निर्जीव मत बनाइए।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
110,862FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe