"अब ये प्रोटेस्ट CAA-NRC के विरूद्ध नहीं है। ये एक मौका है BJP और RSS के नेताओं को ये दिखा देने का कि मुस्लिम कितना संगठित है। अब वो दिन दूर नहीं जब सब जगह हमारे लोग होंगे या हम जिसे चाहेंगे, जो हमारे लिए काम करेगा, उसी की सरकार बनेगी, हम सरकार बनाएँगे भी और गिराएँगे भी।"
मृतकों की पहचान कानपुर निवासी अतीक (50), पत्नी सायरा (40), बेटी आयशा (12), बेटा अफरोज (8), फैशल (18 माह) के रूप में हुई। इसके अलावा दो अन्य मृतकों की पहचान पहलवान और मामा के रूप में हुई।
राजद सुप्रीमो लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप ने इस दौरान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय को भी निशाने पर लिया। तेज प्रताप ने कहा कि जब से मंगल पांडेय स्वास्थ्य मंत्री बने हैं, तब से सबकुछ अमंगल ही हो रहा है, इसीलिए वो 'अमंगल' पांडेय हैं।
पीड़िता दलित नाबालिग लड़की उन दरिंदों को "भैया आप मुझे जानते हो, अल्लाह के लिए छोड़ दो” कह-कहकर गिड़गिड़ा रही थी। मगर फिर भी दरिंदों को रहम नहीं आया। वह रोती, चीखती, चिल्लाती रही और आदिल, नजिक जैसे दरिंदे उसकी चीख को फिल्माते रहे।
जेन ने लिखा है कि पुलिस भी बच्चे को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने में नाकाम रही, जबकि यह उसके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक था। पत्र के जरिए जेन ने पुलिस से बच्चे की मौत के कारणों की जाँच करने की माँग की है।
शिखा राय को श्रीनगर में झंडा फहराने के बाद पुलिस कस्टडी में प्रताड़ित किया गया था। सुषमा स्वराज ने शिखा राय को लगभग 25 वर्षों तक अपने मार्गदर्शन में रखा। सुषमा स्वराज जब बीमार पड़ीं तो शिखा ने भी उनका एक बेटी की तरह दिन-रात देखभाल किया।
केस में बुधवार (फरवरी 5, 2020) को जामिया के तीन छात्रों से पूछताछ की गई थी। जिन्हें शरजील के फोन से मिले सबूतों के आधार पर नोटिस देकर जाँच में शामिल होने के लिए कहा गया था। इन छात्रों की पहचान शाहनवाज, सनाउल्लाह और सिद्धार्थ के रूप में हुई है।
सबूत मिटाने के लिए आरोपित ने दोनों माँ-बेटी के शव को टंकी में डाल दिया और फिर शव को जल्दी सड़ाने के लिए टंकी में सोडा-नमक भी डाल दिया। अगले दिन उसने मकान मालिक को दोनों माँ-बेटी के गायब होने की जानकारी दी और उन्हें तलाश करने के नाम पर वहाँ से भाग गया।
"ज्ञानवापी में सतयुग से ही भगवान विश्वेश्वर विराजमान हैं, एएसआई के सर्वे के बाद इस मामले में सच्चाई समाने आ जाएगी। परिसर के मालिक भी भगवान विश्वेश्वर ही हैं। एक मंडप को तोड़ कर औरंगज़ेब ने मस्जिद खड़ी कर दी थी।"
"शरद पवार हमेशा से हिन्दू विरोधी। वे कभी रामायण पर कटाक्ष करते हैं तो कभी उसको अप्रासंगिक बताते हैं। और न ही वे पांडुरंग की पूजा में शामिल होते हैं। पवार नास्तिक मंडलियों के साथ हैं। और ऐसे में अगर पैसों के लालच में उन्हें कोई कार्यक्रमों में बुलाता है तो यह अधार्मिक ही है।"