1981 का एक ऐसा समय था, जब जेएनयू को 46 दिनों के लिए बंद किया गया था। आज फ़र्ज़ी 'स्टिंग ऑपरेशन' कर के वामपंथियों को बचाने वाले 'इंडिया टुडे' ने तब JNU को वामपंथी अराजकता का गढ़ बताया था, जहाँ छात्र फालतू वाद-विवाद में लगे रहते हैं। पत्रिका ने कहा था कि जेएनयू केवल रुपए डकारता है।
इंडोनेशिया की करीब 90 फीसद आबादी मुस्लिम है। जावा के जिस पठार से मूर्ति मिली है वह कलिंगा साम्राज्य के हिंदू मंदिरों का स्थान रहा। 140 सेमी मूर्ति की ऊँची और 120 सेमी चौड़ी मूर्ति का निर्माण 7वीं से 8वीं शताब्दी के बीच होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
रामनरेश ने जब गाय काटने से रोका तो उसके साथ गाली-गलौज की गई। उसे कहा गया- तू बड़ा मोदी, योगी का भक्त बनता है, आज तुझे देख लेते हैं। उसके साथ मारपीट की। हमलावरों ने उसकी राइफल और पैसे भी छीन लिए।
“पश्चिम बंगाल की, देश की भावना को नमन करते हुए मैं कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का नाम, औद्योगीकरण के प्रणेता, बंगाल के विकास का सपना लेकर जीने वाले और एक देश-एक विधान के लिए बलिदान देने वाले डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर करने की घोषणा करता हूँ।"
1994 में संसद में प्रस्ताव पारित कर कहा गया था कि पूरा जम्मू-कश्मीर, भारत का अभिन्न अंग है। इसी का हवाला देते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि निर्देश मिलने पर उचित कार्रवाई के लिए सेना तैयार है।
स्वामी विवेकानंद का जीवन बहुत लंबा न होने के बावजूद, सौभाग्य से विभिन्न समय पर लिखे गए पत्रों, संस्मरणों, लेखों और हँसी-ठिठोली से हम वंचित नहीं हुए हैं। खास बात ये है कि उनके लिखे कई पत्र, संस्मरण आज उनके न रहने के लगभग एक शताब्दी के बाद भी कई नए रहस्य उद्घाटित कर रहे हैं।
'लिबरल' शिवसेना शायद भूल गई कि यह इंटरनेट का युग है। जो कभी कुछ नहीं भूलता और न लोगों को भूलने देता है। दीपिका पादुकोण के समर्थन पर सोशल मीडिया में यूज़र्स ने शिवसेना को तुरंत आड़े हाथों लिया और ठग करार दिया।
साल पूरा होते-होते, अब हर वामपंथी हमें गाली दे कर खारिज करने की कोशिश करता रहता है। जब इस तरह के आक्रमण होने लगते हैं, इसका मतलब है कि किसी को दर्द हो रहा है। हमारी कोशिश है कि इस दर्द की तीव्रता बढ़ाते रहें।
10वीं के बच्चों को सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में आरएसएस को लेकर आपत्तिजनक बातें पढ़ाई जा रही थी। मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से तमिल और अंग्रेजी में प्रकाशित किताब से आपत्तिजनक हिस्सा हटाने का निर्देश दिया है।
"सीएए और एनआरसी को अलग-अलग देखने की जरूरत है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के दुखी लोगों को यदि भारत में सुविधाएँ मिलती हैं तो इसमें बुराई क्या है।"