Thursday, July 29, 2021
Homeदेश-समाजCAA पर रोक से SC का इनकार, केंद्र से 144 याचिकाओं पर 4 हफ्ते...

CAA पर रोक से SC का इनकार, केंद्र से 144 याचिकाओं पर 4 हफ्ते में माँगा जवाब

चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस अब्दुल नजीर और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने सीएए से संबंधित 144 याचिकाओं पर सुनवाई की। पीठ ने कहा है कि इस कानून को लेकर असम और त्रिपुरा का मामला अलग से सुना जाएगा।

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर दाखिल 144 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (22 जनवरी 2020) को कोई भी अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 4 हफ्तों में जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही ये भी कहा है कि इस कानून को लेकर असम और त्रिपुरा का मामला अलग से सुना जाएगा।

चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस अब्दुल नजीर और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने सीएए से संबंधित 144 याचिकाओं पर सुनवाई की।

सीएए की संवैधानिक वैधता को इंडियन यूनियन ऑफ मुस्लिम लीग, पीस पार्टी, असम गण परिषद, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन, जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द, जयराम रमेश, महुआ मोइत्रा, देव मुखर्जी, असदुद्दीन ओवैसी, तहसीन पूनावाला व केरल सरकार सहित अन्य ने चुनौती दी थी।

सीएए की सुनवाई के दौरान एक्ट को चुनौती देने वाले पक्ष की दलील रखते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बुधवार को कोर्ट में कहा कि जबतक इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती तब तक इस को निलंबित कर दिया जाना चाहिए। बता दें, कपिल सिब्बल ने इस दौरान संविधान पीठ के गठन की माँग भी की थी। इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि वह केंद्र की पूरी बात सुने बिना एकतरफा आदेश नहीं दे सकते हैं।

चीफ जस्टिस ने कहा कि सभी याचिकाओं को केंद्र के पास पहुँचना जरूरी है। इसके अतिरिक्त सिब्बल की निलंबन वाली दलील पर चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा कि यह एक तरीके से रोक की ही बात होगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि असम और त्रिपुरा से दाखिल CAA विरोधी याचिकाओं की अलग से सुनवाई होगी। अब कोर्ट में इस मामले पर इससे ज्यादा याचिका दाखिल नहीं होगी।

असम, त्रिपुरा पर अलग से सुनवाई

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने इस सुनवाई के दौरान कहा कि हम सरकार से कुछ अस्थायी परमिट जारी करने के लिए कह सकते हैं। वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने असम में अधिनियम के कार्यान्वयन के संबंध में एक पूर्व आदेश की माँग की। उन्होंने कहा कि असम की स्थिति अलग है, पिछली सुनवाई के बाद से 40,000 लोग असम में प्रवेश कर चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट में सीएए के ख़िलाफ़ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान भारत के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट में भीड़ का सवाल उठाते हुए कहा कि कोर्ट का मौहाल शांतिपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने अमेरिका और पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम के अंदर आगुंतकों के नियम का हवाला भी दिया।

केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने कहा कि सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं में से करीब 60 की प्रतियाँ सरकार को दी गई हैं। इन्हीं प्रतियों पर अभी तक उन्होंने जवाब तय किया गया है, जबकि कोर्ट में 144 याचिका दायर की गई है। वेणुगोपाल ने इस दौरान कोर्ट से अब और याचिका न दाखिल करने की माँग उठाई। लेकिन शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में वह जल्दबाजी में कोई आदेश नहीं दे सकती।

गौरतलब है कि इससे पहले गत 9 जनवरी को चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर देशभर में हो रहे हिंसक प्रदर्शन पर चिंता जताते हुए कहा था कि वह इस मामले में तभी सुनवाई करेंगे जब हिंसा रुकेगी। साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि देश कठिन दौर से गुजर रहा है। 

वामपंथियों और कॉन्ग्रेसी सरकारों की सिब्बल ने खोली पोल, कहा- CAA लागू करने से मना नहीं कर सकते राज्य

CAA समर्थन रैली में अमित शाह ने विपक्ष पर साधा निशाना, डंके की चोट पर कहा- नहीं वापस होगा कानून

CAA-NRC के विरोध में भाषण देते हुए RJD सांसद अशफाक की गिरी पैंट, लोगों ने कहा- हम भी देखेंगे

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘पूरे देश में खेला होबे’: सभी विपक्षियों से मिलकर ममता बनर्जी का ऐलान, 2024 को बताया- ‘मोदी बनाम पूरे देश का चुनाव’

टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने विपक्ष एकजुटता पर बात करते हुए कहा, "हम 'सच्चे दिन' देखना चाहते हैं, 'अच्छे दिन' काफी देख लिए।"

कराहते केरल में बकरीद के बाद विकराल कोरोना लेकिन लिबरलों की लिस्ट में न ईद हुई सुपर स्प्रेडर, न फेल हुआ P विजयन मॉडल!

काँवड़ यात्रा के लिए जल लेने वालों की गिरफ्तारी न्यायालय के आदेश के प्रति उत्तराखंड सरकार के जिम्मेदारी पूर्ण आचरण को दर्शाती है। प्रश्न यह है कि हम ऐसे जिम्मेदारी पूर्ण आचरण की अपेक्षा केरल सरकार से किस सदी में कर सकते हैं?

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
111,696FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe