सआदत छात्रावास के नाबालिग लड़कों ने ख़ुद दावा किया कि उनके गुदा से ख़ून बहने की ख़बरें झूठी हैं। सीतापुर के रहने वाले 21 साल के इरफ़ान हैदर ने बताया कि 'कुछ मदरसा छात्रों को पुलिस यातना का दंश झेलना पड़ा' जैसी सारी ख़बरें झूठी थीं, इनका कोई आधार नहीं था।
आजमगढ़ की सीता से शाहनवाज की दोस्ती सोशल साइट के जरिए हुई। निकाह के बाद दोनों कानपुर आ गए। एक दिन ससुराल ले जाने के बहाने वह सीता को लेकर निकला और फिर झाड़ियों से दुल्हन के जोड़े में लाश मिली।
अतिथि विद्वान 28 दिन से धरने पर हैं। कफन ओढ़कर प्रदर्शन कर चुके हैं। खून से दीया जला चुके हैं। शहर की सड़कों पर शू पॉलिश कर विरोध जता चुके हैं। लेकिन, कमलनाथ कैबिनेट का मतभेद है कि मिटता नहीं।
"पाकिस्तान की हज़ारों वर्ष पुरानी संस्कृति का भारत से कोई लेना-देना नहीं है। पाकिस्तान का अपना इतिहास है, जो हज़ारों साल पहले जाता है। पाकिस्तान की संस्कृति या इतिहास का भारत से कोई भी संबंध नहीं है।" यह 'महान' फैज़ के विचार थे। हरिशंकर परसाई ने 'इकबाल की बेइज्जती' में इसका जिक्र किया है।
"आज मुझे अपने भाई की लाश उठानी पड़ रही है। कल को मेरे और भी हिन्दू, सिख और ईसाई भाइयों को इस स्थिति से गुजरना पड़ सकता है। पाकिस्तान दुनिया भर में ढिंढोरा पीटता है कि यहाँ अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं। लेकिन हमारी हालत देखिए, हम रोते-बिलखते आपके सामने खड़े हैं।"
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को हिरासत में लिए जाने के बाद उनकी इच्छा से मांसाहारी भोजन मुहैया कराया जाता था। लेकिन, एक महीने से दोनों ने मांसाहारी खाना चखा तक नहीं है। अब साग, दाल, सब्जी ही उनकी खुराक है।
शेहला रशीद ने ट्विटर पर लिखा- "अल्लाह का शुक्र है कि नरेंद्र मोदी की कोई औलाद नहीं है। अगर उनके बच्चे होते तो उन्हें स्कूल में काफ़ी शर्मिंदा होना पड़ता।" ये पहली बार नहीं है जब शेहला रशीद ने पीएम मोदी को लेकर ऐसी टिप्पणी की हो।
दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे अमित देशमुख को चिकित्सा एवं संस्कृति मंत्रालय दिया गया। बाकी कॉन्ग्रेस नेताओं को आदिवासी विकास, स्कूली शिक्षण, जनजातीय विकास, मत्स्य, ओबीसी कल्याण और डेयरी विकास देकर निपटा दिया गया।
कमांडर सुलेमानी की मौत के बाद ईरान ने कोम की जमकारन मस्जिद की गुंबद पर लाल झंडा लहरा दिया है। इसे अमेरिका के खिलाफ जंग के ऐलान के तौर पर देखा जा रहा है। लाल झंडा शिया परंपरा में ख़ूनी प्रतिशोध का प्रतीक होता है।
रोजाना 300-400 लोग भारत से बांग्लादेश लौट रहे हैं। अधिकांश लोगों ने वहॉं की एजेसियों को बताया है कि वे काम के सिलसिले में अरसे से भारत में रह रहे थे। इनके पास से भारतीय पहचान पत्र भी बरामद हुए हैं।