"फ़रहान अख्तर CAA के बारे में कुछ नहीं जानते थे और सिर्फ़ लोगों को CAA के ख़िलाफ़ खड़े होने के लिए उकसा रहे थे, इस दौरान वो कई मीडिया चैनल्स और उनके कैमरों में कैप्चर हो गए थे। अधिक परेशान करने वाली बात यह है कि इस विरोध के लिए लोगों को आमंत्रित करते समय उन्होंने भारत के ग़लत नक़्शे वाले पोस्टर का इस्तेमाल किया।"
UGC के द्वारा भेजी गई जाँच कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के लगातार गिरते हुए हालातों की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर यही परिस्थितियाँ रही तो एक दिन यह बर्बाद हो जाएगा। वीसी हांगलू के चार वर्षों के कार्यकाल में विश्वविद्यालय NIRF की रैंकिंग में 200 के बाहर चला गया है।
बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद पिछले सप्ताह 27 हीटर खरीदे गए। इन्हें वार्डों में लगाया जाना था। लेकिन, खरीदे जाने के बाद ये हीटर कहॉं गए इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। अंदाजा लगाया जा सकता है गहलोत सरकार कितनी गंभीर है।
IIT, फैज, CAA, मोदी-शाह विरोध... मतलब गिरोह विशेष के लिए फेक न्यूज फैलाने का भरपूर मसाला। ऐसे में सिर्फ BBC ही इसमें क्यों आगे रहे! मीडिया के तमाम बड़े नामों ने 'फैज की नज्म हिंदू विरोधी' के टाइटल से खबर चलाई। किसी ने भी सच जानने की कोशिश नहीं की।
लिबरल गैंग को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनका कहा सच है या झूठ। वे केवल अपने एजेंडे की परवाह करते हैं। उसे आगे बढ़ाने के लिए हिंदुओं पर क्रूर अत्याचार करने वाले इस्लामी शासकों का महिमामंडन करते हैं।
राहुल गाँधी का प्रशंसा पत्र केरल के सीएम के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सार्वजनिक किया गया। इसके बाद UDF को बेहद शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। यूडीएफ केरल का विपक्षी गठबंधन है जिसकी अगुवाई कॉन्ग्रेस करती है।
यूपी में सीएए के विरोध में हुई हिंसा में पीएफआई की संलिप्तता सामने आई है। इस कट्टरपंथी संगठन के संबंध आतंकियों से बताए जा रहे हैं। इस पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा गया है। बावजूद बंगाल में उसे प्रदर्शन की इजाजत किसने दी?
सिंध से आई दमी कोहली जोधपुर के पास एक रिफ्यूजी कैंप में रहती है। सालभर से यहीं पढ़ाई कर रही है। 11वीं की परीक्षा भी यहीं से पास की। बावजूद इसके राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने उसका 12वीं का परीक्षा फॉर्म खारिज कर दिया है।
अब केरल विधानसभा में राज्य सरकार द्वारा पास किए गए प्रस्ताव का कोई अर्थ नहीं रहा। क्योंकि इस प्रस्ताव पर आगे काम करने के लिए पिनरई विजयन सरकार को राज्यपाल के हस्ताक्षर लेने अनिवार्य हैं, जो खुले तौर पर इसका विरोध कर चुके।