अब स्थिति सामान्य है। लेकिन गाँव वाले फ्लैगमार्च निकालकर अपना विरोध दिखा रहे हैं। मामले के संबंध में 3 युवकों को गिरफ्तार किया गया है। मगर रिपोर्ट अभी किसी के ख़िलाफ़ दर्ज नहीं हुई हैं
"अभी यह फैसला नहीं लिया गया है कि इंटरनेट सेवाएं कब शुरू की जाएँगी। यह मुद्दा सरकार के संज्ञान में है। स्थिति सुधरने के साथ जल्द ही इंटरनेट सेवा भी शुरू कर दी जाएगी।"
भाजपा ने कहा कि उसके विधायकों ने 50 लाख रुपए की सहायता राशि दी है लेकिन कॉन्ग्रेस की तरफ़ से कोई देखने तक नहीं आया है। भाजपा सांसदों ने आरोप लगाया कि जब बच्चों की मौत हो रही थी, तब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत झारखण्ड में जश्न मनाने गए हुए थे।
उद्धव के बेटे आदित्य, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और अमित देशमुख नए मंत्रियों में प्रमुख नाम हैं। पुणे पुलिस ने बताया कि थोपते के नाराज़ समर्थकों ने कॉन्ग्रेस कार्यालय पर हमला बोल दिया और वहाँ मौजूद कुर्सियों व गद्दों को फेंक डाला।
अगर मुस्लिमों को एससी कैटेगरी में आरक्षण X% मिलता है तो इसका अर्थ ये है कि उतनी ही संख्या में दलितों का हिस्सा कट जाएगा। क्या शेहला चाहती हैं कि दलितों को अगर मुस्लिमों के साथ रहना है तो उन्हें अपने हिस्से के आरक्षण की कुर्बानी देनी होगी?
फेसबुक पर मुस्लिम स्टूडेंट ऑफ जेएनयू द्वारा अपलोड की गई 14 दिसंबर 2019 की वीडियो है। जिसमें शर्जील सीएए के ख़िलाफ़ लोगों को कहता नजर आ रहा है कि उनकी संपत्तियाँ जब्त कर ली जाएँगी और उन्हें पाकिस्तान भेज दिया जाएगा। इसके अलावा 40 सेकेंड की वीडियो में वो कुरान का हवाला दे देकर बताने की कोशिश कर रहा है कि आखिर किस तरह कुरान, संविधान से ऊपर हैं।
इत्तेहाद उलेमा ए हिन्द के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुफ्ती असद कासमी ने कहा है कि आम तौर पर जनवरी को ही नए साल के रूप में मनाया जाता है। लेकिन इस्लामी नजरिए के एतबार से इस्लाम का नया साल मोहर्रम से शुरु होता है और इस्लाम के अंदर मोहर्रम को ही नया साल माना जाता है।
शिवसेना कार्यकर्ताओं ने बुजुर्ग को चारों ओर से घेर रखा था और उसे खरी-खोटी सुना रहे थे। इस दौरान वहाँ उपस्थित कई लोग तमाशबीन बन कर देखते रहे। अंत में महिला ने स्याही भरी बोतल निकाली और बजुर्ग के सिर और गले पर उड़ेल दिया।
अगर सच में बैंडेज पहनने का शौक है तो उपद्रवियों के लिए दो विकल्प हैं। पहला विकल्प ये है कि वो यूपी में जाकर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का प्रयास कर सकते हैं। पुलिस उनकी ऐसी मरम्मत करेगी कि वो ख़ुद असली मरहम-पट्टी के साथ लौटेंगे। लेकिन हाँ, वो फिर सड़क पर उतर कर 'ड्रामा खेलने' की हिम्मत शायद ही जुटा सकें।