Tuesday, October 19, 2021
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UP पुलिस को गुमराह कर रहे समुदाय के लोग, दंगाइयों को सुपुर्द करने का वादा भी नहीं किया पूरा

दंगाइयों ने मेरठ शहर में एक साथ लगभग डेढ़ दर्जन स्थानों पर पथराव, फायरिंग और आगजनी की थी। हिंसा में छह बवालियों की मौत हुई थी, जबकि तीन पुलिसकर्मी गोली से घायल हो गए थे। मामले के 250 वीडियो फुटेज के आधार पर 132 दंगाइयों को चिह्नित करने का काम किया गया है।

उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम पर हिंसा करने वालों को बचाने में समुदाय विशेष के लोग जुट गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार समाज के लोगों ने दंगाइयों को खुद पकड़कर पुलिस के हवाले करने का वादा किया था। लेकिन, इस पूरा नहीं किया। इतना ही नहीं बवालियों तक पुलिस पहुॅंच नहीं पाए इसलिए उसे गुमराह करने की कोशिश भी हो रही।

इसे देखते हुए मेरठ में मंगलवार (दिसंबर 31, 2019) को पुलिस ने चार थानों की टीमें बनाकर उपद्रवियों की पहचान शुरू कर दी। सूचना के अनुसार, फोटो और सीसीटीवी वीडियो के आधार पर बवालियों की पहचान की जा रही है। दिक्कत ये है कि एक ही चेहरे के अलग-अलग नाम बताकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की जा रही। मसलन, एक चेहरे को किसी ने इस्लाम नगर का कबीर बताया तो दूसरे ने श्याम नगर का रशीद बता दिया।

ज्ञात हो कि दंगाइयों ने मेरठ शहर में एक साथ लगभग डेढ़ दर्जन स्थानों पर पथराव, फायरिंग और आगजनी की थी। हिंसा में छह बवालियों की मौत हुई थी, जबकि तीन पुलिसकर्मी गोली से घायल हो गए थे। मामले के 250 वीडियो फुटेज के आधार पर 132 दंगाइयों को चिह्नित करने का काम किया गया है। स्थानीय खत्ता रोड पर काली पट्टी बाँध कर फायरिंग करने वाले फैसल समेत तीन आरोपितों पर पुलिस द्वारा 20-20 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है।

पुलिस ने स्वीकार किया है कि दंगा होने का एक कारण ये भी रहा कि कुछ इलाकों में पब्लिक के साथ रिलेशन नहीं बन पाना भी है। जैसे सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला को ही ले लीजिए। उनकी तैनाती को दो साल हो चुके हैं। बावजूद उन्हें उपद्रवियों को लेकर कोई सुराग तक नहीं मिल पाया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसका अर्थ ये है कि अधिकारी अपने सर्किल एरिया में इतना पब्लिक रिलेशन नहीं बना पाए कि हिंसा या आगजनी के दौरान आमजन पुलिस के साथ सहयोग करें।

दैनिक जागरण के मेरठ संस्करण में प्रकाशित खबर

पब्लिक रिलेशन नहीं बनाने पर वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी थाना प्रभारियों और सर्किल ऑफिसर को फटकार लगाई है। हालाँकि, 27 दिसंबर को जुमे की नमाज पर शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे। समुदाय विशेष के मोहल्लों में लोग पुलिस को गुमराह करते हुए आरोपितों का ग़लत नाम-पता बता रहे हैं।

आरोप है कि मुस्लिम समाज के लोग बवालियों को बचाने के लिए पुलिस को इधर-उधर भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि किसी निर्दोष को जेल नहीं भेजा जाएगा। साथ ही कहा है कि दोषियों को भी नहीं बख्शा जाएगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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