एक साल में 940 बच्चों की मौत। मुख्यमंत्री गहलोत कहते हैं कि ये कोई नई बात नहीं। वो हेमंत सोरेन के शपथ ग्रहण समारोह में व्यस्त हैं। मीडिया चुप है क्योंकि ये भाजपा शासित राज्य में नहीं हुआ है। जाँच में पता चला है कि अस्पताल में व्यवस्थाएँ लचर हैं। अगर बच्चे मरते रहें तो सरकार किस लिए?
अपने दुख को भूल डॉ. अर्चना सिंह यह सुनिश्चित करने में जुटी थीं कि प्रियंका गॉंधी की सुरक्षा में सेंध न लगे। तब शायद ही उन्होंने सोचा होगा कि प्रियंका के सामने उनके साथ बदसलूकी होगी और उलटे आरोप उन पर ही मढ़ दिया जाएगा।
"सैल्यूट है मेरठ के सिटी एसपी अखिलेश नारायण सिंह को, पाकिस्तान ज़िंदाबाद और भारत मुर्दाबाद के नारे लगा रहे उपद्रवियों को करारा जवाब देने के लिए। अब कुछ तथाकथित प्रबुद्धों को अफ़सोस है कि भारत मुर्दाबाद और पाकिस्तान ज़िंदाबाद बोलने वाले गद्दारों को पाकिस्तान जाने को क्यों कहा।"
आयशा ने प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि वो देश में अल्पसंख्यक राजनीति को उभरते हुए देखना चाहती हैं। उन्होंने अल्पसंख्यक राजनीति का अर्थ समझाते हुए बताया कि इसका आशय 'मुस्लिम-बहुजन पॉलिटिक्स' से है।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में 2 दशक तक राजनीतिक विज्ञान पढ़ाने वाले गौतम सेन का कहना है कि धर्मांतरण के अलावा 'चर्च प्लांटिंग' भी एक अहम मुद्दा है। इसके तहत राज्य के कई गाँवों में मंदिरों से ज्यादा चर्च बना दिए गए हैं ताकि उसका प्रभाव दिखे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को आधुनिक बनाने में युवा पीढ़ी की बहुत बड़ी भूमिका होने वाली है। उन्हें विश्वास है कि भारत में यह दशक न सिर्फ़ युवाओं के विकास का होगा, बल्कि युवाओं के सामर्थ्य से देश का विकास करने वाला भी साबित होगा।
मायावती ने कहा है कि उन्होंने सबसे पहले सीएए को विभाजनकारी और असंवैधानिक बताकर इसका विरोध किया था। बावजूद इसके विधायक परिहार ने CAA का समर्थन किया। पहले भी उन्हें कई बार पार्टी लाइन पर चलने की चेतावनी दी गई थी।
"पेजावार मठ के श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी, उडुपी में उन लाखों लोगों के दिलों और दिमाग में रहेंगे, जिनके लिए वह हमेशा एक मार्गदर्शक रहे। सेवा और आध्यात्मिकता के वे ऊर्जा स्रोत थे।"
"यह अपनी तरह का देश का पहला विश्वविद्यालय होगा। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अगले साल 15 जनवरी से इस यूनिवर्सिटी में दाखिला मिलेगा। फरवरी-मार्च से कक्षाएँ शुरू हो जाएँगी।"
राशिद और उसके साथियों ने एक व्यक्ति से पुराने नोट बदलने को लेकर सौदा किया था। इनका कहना था कि उनके पास बड़ी मात्रा में पुराने नोट हैं। केंद्र में सरकार बदलने पर पुराने नोट फिर से वैध कर दिए जाएँगे।