राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी अशोभनीय हरकत की थी। उन्होंने अदालत में दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में पेश किए गए नक्शे को फाड़ दिया था। उनकी इस हरकत पर सीजेआई ने काफी नाराजगी जताई थी।
दोनों पादरी ने 2005 से 2016 के बीच में अपने कुकर्मों को अंजाम दिया। 2016 में इसका खुलासा हुआ था। कहा जा रहा है कि पोप फ्रांसिस को 2014 की शुरुआत में ही इन पादरियों में से एक पर लगे आरोपों के बारे में जानकारी थी।
गुजराल जब एयरपोर्ट के मेटल डिटेक्टर से गुजर कर निकले, तो कोई अलार्म नहीं बजा। यानी, उनके शरीर पर या पगड़ी में किसी सुरक्षा उपकरण ने कोई खतरनाक या संवेदनशील चीज़ नहीं थी। इसके बावजूद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें पगड़ी उतारने के लिए कहा।
मामले के दो मुख्य पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड और इकबाल अंसारी ने पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करने का फैसला किया है। एआईएमपीएलबी ने कहा है कि इस फैसले से न उसे फर्क पड़ता है और न इसका उसकी याचिका पर कानूनी तौर पर कोई फर्क पड़ेगा।
शिवसैनिकों ने उनके स्टूडियो में घुस कर उनकी पिटाई की थी। शिवसेना कार्यकर्ताओं ने निखिल वागले के चेहरे पर स्याही पोत दी थी। उस पिटाई के बाद वागले अक्सर शिवसेना की आलोचना करते मिलते थे। बाल ठाकरे ने वागले की पटाई करने वाले शिवसैनिकों की सराहना की थी।
चिदंबरम को 21 अगस्त को सीबीआई ने गिरफ़्तार किया था। उनके बेटे कार्ति चिदंबरम ने कहा है कि राहुल और प्रियंका का उनके पिता से मुलाक़ात करने का मतलब है कि पूरी कॉन्ग्रेस पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
"जब कोई ऐसा कुलपति (VC) हो जिसे न उस संस्थान और उसके संस्थापक के मूल्य पता हों, न हिन्दू धर्म में आस्था तो ऐसा अनर्थ होना स्वाभाविक हो जाता है। सरकार को सोचना चाहिए जब वो कुलपति का चुनाव करती है कि कहाँ के लिए कैसा कुलपति उपयुक्त है।"