"सोशल मीडिया और व्हाट्सएप जैसे मैसेजिंग एप के ज़रिए लोगों को आतंकवादी बनाने को लेकर काम तेज़ी से चल रहा है। इस सम्बन्ध में भारतीय अधिकारियों ने वैश्विक सोशल मीडिया कम्पनियों के प्रतिनिधियों से भी मुलाक़ात की है।"
अगर आप फौजिया इलियास की फेसबुक प्रोफाइल पर जाएँगे तो आपको और भी कई ऐसी तस्वीरें मिल जाएँगी, जहाँ महिलाएँ व पुरुष अपनी सेमी-न्यूड तस्वीरें पोस्ट कर के रबी पीरजादा का समर्थन कर रहे हैं। इनमें कई आपत्तिजनक तस्वीरें भी हैं।
यह 138 किलोमीटर के 'रेलवे लाइन डबलिंग प्रोजेक्ट' में बाधा बन रहा था, जिसके कारण इसे हटाया गया। इस शस्त्रागार को शिफ्ट न किए जाने के कारण रेलवे का ये डबलिंग प्रोजेक्ट क़रीब एक दशक तक अधर में रहा।
प्रदूषित हवा में साँस लेने से बचने के लिए अच्छे क्वालिटी का मास्क लेना बेहद जरूरी है, ताकि आप 'विषपान' की स्थिति वाले दिल्ली-एनसीआर में अपनी सेहत का ख्याल रख सकें।
एनआरसी की आलोचना करने वालों पर निशाना साधते हुए जस्टिस गोगोई ने मीडिया घरानों की गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मीडिया के कुछ हिस्सों की गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग के चलते इस मुद्दे को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसके चलते स्थिति खराब हो गई।
“अगर आपके घर कुछ लड़के-लड़कियाँ आते हैं और कहते हैं कि वो मेडिकल के स्टूडेंट हैं और आपका शूगर या बीपी या कोई अन्य ब्लड टेस्ट फ्री में करने के लिए बोलते हैं तो आप तुरंत पुलिस को फोन करें क्योंकि वो आतंकवादी संगठन के लोग हैं और उनके इंजेक्शन में एड्स का वायरस है जो वो ब्लड लेने के बहाने आपके शरीर में डाल देंगे। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने घर में न घुसने दें। जनहित में जारी।”
एलन सुहैब और थाहा फ़ज़ल ने माओवादियों के मारे जाने पर राज्य पुलिस को धमकाते हुए नोटिस जारी किए थे। प्रारम्भिक जाँच में, पुलिस ने दावा किया है कि इस बात के ठोस सबूत हैं कि दोनों ने माओवादी पदाधिकारियों के साथ संपर्क बना रखा था।
मोहम्मद इस्माइल ने हड़िया के नशे में एक लड़की के साथ छेड़खानी की। इस तरह की हरकत वह पहले भी कर चुका था। इससे नाराज लड़की के भाई ने दो अन्य लोगों के साथ मिलकर लाठी-डंडों से उसकी पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई।
इस्लामाबाद के रेड जोन में घुस सकते हैं आजादी मार्च में शामिल प्रदर्शनकारी। भीड़ इतनी कि बलप्रयोग से भी हटाने में हो सकती है मुश्किल। इमरान ने कहा- मौलाना को हर हल में रोका जाए।
"कॉन्ग्रेस पार्टी भले ही दस साल आगे की सोच रखने का दावा करती हो मगर सच्चाई यह है कि इस पार्टी के लोग अगले दस मिनट में क्या कर डालेंगे, इसका किसी को कोई अंदाज़ा नहीं। हकीकत यह है कि आप आने वाले समय में एक वेब सीरीज बना सकते हैं कि कैसे कॉन्ग्रेस पार्टी जनता से दूर होती चली गई।"