"ममता दीदी का खेल तो देखो! मरीजों को अगर हॉस्पिटल में भरती करना पड़ेगा तो परिचय तो देना ही पड़ेगा! लेकिन ममता नही चाहती की उसके प्यारे रोहिंगया को कोई पहचान ले।"
आरजे फहाद ने आरोप लगाया कि पहले अगर मुस्लिमों की लिंचिंग पर निंदा होती, तो 16 अप्रैल की रात हो सकता है पालघर में साधुओं की भीड़ द्वारा लिंचिंग नहीं की जाती।