Thursday, March 4, 2021
Home विचार राजनैतिक मुद्दे ‘परिवारवाद’ की छवि को मिटाने की जुगत में कॉन्ग्रेस

‘परिवारवाद’ की छवि को मिटाने की जुगत में कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस के लिए अब भी यह सोचने का वक़्त है कि केवल सीट का स्थान बदल लेने भर से परिवारवाद का ठप्पा नहीं हटता बल्कि उसके लिए कड़े फ़ैसले भी लेने पड़ते हैं, पारिवारिक स्वार्थों की आहुतियाँ देनी पड़ती हैं।

जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नज़दीक आते जा रहे हैं वैसे-वैसे कॉन्ग्रेस पार्टी अपने नए-नए चुनावी तरीक़े इस्तेमाल में ला रही है। अभी-अभी राजनीति में क़दम रखने वाली प्रियंका गाँधी वाड्रा को शायद फूँक-फूँक कर पाँव रखने के निर्देश दिए जा रहे हैं, जिन्हें वो बख़ूबी निभा भी रही हैं।

जानकारी के मुताबिक शुक्रवार (8 फ़रवरी 2019) को कॉन्ग्रेस की आधिकारिक बैठक में शामिल होने पहुँची प्रियंका गाँधी की सीट राहुल गाँधी के साइड में आवंटित न करके थोड़ा अगल की गई क्योंकि उस समय राहुल के साइड वाली सीट पर ज्योतिरादित्य सिंधिया बैठे थे। जब इस बात पर ग़ौर किया गया तो जो बात सामने आई वो हैरान कर देने जैसी थी।

ऐसा इसलिए किया गया ताकि पार्टी के अन्य सदस्यों के बीच यह संदेश जा सके कि कॉन्ग्रेस के लिए जितनी महत्वपूर्ण प्रियंका गाँधी हैं, उतने ही महत्वपूर्ण बाक़ी सब सदस्य भी हैं। बैठने की सीट पर किए गए इस मंथन को अगर राजनीतिक स्टंट ही कहा जाए तो बेहतर है।

चूँकि अभी प्रियंका गाँधी का राजनीतिक क़द बहुत छोटा है इसलिए उन्हें अधिक तवज्ज़ो देना तो वैसे भी किसी मायने में फिट नहीं बैठता। सबको एक बराबर दिखाने की भला ऐसी भी क्या नौबत आन पड़ी, ये सोचने वाली बात है। अनुमान तो यही लगाया जा सकता है कि शायद आज बरसों बाद कॉन्ग्रेस पार्टी अपनी वंशवाद की राजनीतिक छवि से ऊपर उठने का प्रयास कर रही है।

सवाल यह है कि क्या केवल इतने भर से कॉन्ग्रेस पार्टी अपनी बरसों पुरानी परिवारवाद की छवि को मिटाने में सफल हो सकती है? वैसे यह इतिहास रहा है कि राजनेताओं के बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर बनने की बजाए राजनीति को ही अपना करियर बनाते हैं। इसमें कोई नई बात तो नहीं है, लेकिन प्रियंका का राजनीति में क़दम रखना आए दिन तरह-तरह के अजीबो-गरीब इतिहास रचने की फ़िराक में रहता है।

सही मायने में तो अगर कहा जाए कि आज भी कॉन्ग्रेस अपने परिवारवाद के परंपरागत तरीक़े से निकल नहीं पाई है तो कहना ग़लत नहीं होगा। क्योंकि ऐसे तमाम अवसर हैं, जहाँ कॉन्ग्रेस ने अपनी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के बच्चों के राजनीतिक करियर को सँवारने की ज़िम्मेदारी अपने कंधे पर ली। परिवारवाद के साये में फलती-फूलती कॉन्ग्रेस भला और कर भी क्या सकती थी। प्रियंका गाँधी की सीट का आवंटन इस ओर भी इशारा करता है कि कहीं न कहीं कॉन्ग्रेस को ख़ुद भी यह एहसास होता है कि वो वंशवादी परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है, जिसे दुनिया की नज़र से धूमिल करना होगा अन्यथा इसका ख़ामियाज़ा आने वाले समय में भुगतना पड़ेगा। फ़िलहाल कॉन्ग्रेस अपनी साम, दाम, दंड की हर नीति अपनाने में व्यस्त है जिससे पार्टी सत्ता में वापसी का रास्ता बना सके।

कॉन्ग्रेस खेमे में पूर्व नेताओं की संतानें हैं, जिनके राजनीतिक करियर को पंख इसी पार्टी ने दिए। ऐसे में क्या यह सवाल नहीं उठ खड़ा होता कि जो पार्टी ख़ुद परिवारवाद की राजनीति करती आई हो, वो पूर्व नेताओं की संतानों के राजनीतिक भविष्य को सँवारने का काम तो नहीं करने लगी?

कॉन्ग्रेस द्वारा जिनका भविष्य चमकाया गया उनमें कुँवर नटवर सिंह के बेटे जगत सिंह, दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह, कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ, राजेश पायलेट के बेटे सचिन पायलेट, नवीन जिंदल जैसे कई नाम शामिल हैं जिन्होंने अपनी वंशवादी परंपरा को ज़िंदा रखा।

वैसे तो प्रियंका गाँधी के लिए राजनीति कोई नई बात नहीं है फिर पार्टी बैठक में सीट का आवंटन कॉन्ग्रेस की विचारधारा को स्पष्ट करता है। यह तो तय है कि प्रियंका गाँधी के बैठने के स्थान का निर्धारण पहले से ही तय रहा होगा, अब चाहे इस निर्धारण के पीछे राहुल गाँधी का हाथ रहा हो या सोनिया गाँधी का इससे क्या फ़र्क़ पड़ता है।

राजनीति में प्रियंका गाँधी की एंट्री के साथ ही कई मुद्दों को भी हवा मिल गई। उनके सौन्दर्य से लेकर वाड्रा को ईडी कार्यालय तक छोड़ना और उन्हें वापस लाना। इन दिनों प्रियंका गाँधी को इस तरह से पेश किया गया जैसे भारतीय महिलाओं में इकलौती वो ही आदर्श महिला हैं, उदाहरण के लिए उनका पत्नी-रूप इन दिनों काफ़ी फेमस है। इसके बाद बारी आती है उनकी शक्ल पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी (उनकी दादी) से मिलने-जुलने की। उनकी दादी से हूबहू मिलती-जुलती शक्ल कई दिनों तक सोशल मीडिया पर छाया रहा। मतलब ये कि किसी न किसी बहाने से ही सही लेकिन मुख्यधारा की मीडिया को मौक़ा तो मिल ही जाता है, जिसपर वो ख़बर बना डालते हैं। इस बात का सबूत तो रोज़ाना मिल ही जाता है।

वहीं अगर बात करें बीजेपी की तो शुरूआत करते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से। उनके बारे में जगज़ाहिर है कि वो किसी राजनीतिक परिवार से नहीं आते। उनका और उनके परिवार का राजनीति से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं। यह बात अलग है कि देशहित उन्हें राजनीति में ले आया। इस देशहित में पत्नी मोह भी उनके आड़े नहीं आया। बीजेपी के अन्य नेताओं पर भी अगर नज़र डाली जाए तो राजनीतिक परिवारों से ताल्लुक रखने वालों की सँख्या न के बराबर या बहुत कम होगी।

कॉन्ग्रेस के लिए अब भी यह सोचने का वक़्त है कि केवल सीट का स्थान बदल लेने भर से परिवारवाद का ठप्पा नहीं हटता बल्कि उसके लिए कड़े फ़ैसले भी लेने पड़ते हैं। इसके लिए पारिवारिक स्वार्थों की आहुतियाँ देनी पड़ती हैं, और इनके लिए कॉन्ग्रेस न पहले कभी सहज थी और न अब। यदि ऐसा होता तो कॉन्ग्रेस का दामन इतने सारे क़द्दावर नेता कभी न छोड़ते।

इन नेताओं में जीके वासन, विजय बहुगुणा,रीता बहुगुणा जोशी, कृष्णा तीरथ, हरक सिंह रावत, यशपाल आर्या, चौधरी बीरेंद्र सिंह, दत्ता मेघा, जगमीत सिंह बरार, अवतार सिंह भड़ाना, रंजीत देशमुख, मंगत राम शर्मा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन नेताओं ने अपने हिस्से की ज़मीन न मिलते देख पार्टी से अपना नाता तोड़ना उचित समझा।

अंत में यही कहना सटीक लगता है कि आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिस पर समय रहते सोचा नहीं गया तो भावी परिणाम निश्चित रूप से उसके ख़िलाफ़ हो सकते हैं। इस पर कॉन्ग्रेस को अभी और गहन मंथन की आवश्यकता है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

चोरी करके बनाया गया दीपिका पादुकोण का Levi’s जीन्स वाला विज्ञापन? Yeh Ballet के डायरेक्टर ने लगाया आरोप

"ऐसा कोई स्टूडियो मुंबई में नहीं था, इसलिए विज्ञापन के डायरेक्टर ने इसे देखा और हमारे सेट को प्लेगराइज किया।" - ‘Yeh Ballet’ के निर्देशक ने...

‘मुगलों-औरंगजेब ने करवाई मंदिरों की मरम्मत’ – NCERT बिना सबूत के पूरे देश को पढ़ा रहा था, भेजा गया लीगल नोटिस

मुगलों का महिमामंडल करने वाली NCERT को एक RTI कार्यकर्ता ने लीगल नोटिस भेजा है। NCERT को ये नोटिस मुगलों पर अप्रमाणित कंटेंट छापने को लेकर...

स्विडन में आतंक: अकेले कुल्हाड़ी से 8 लोगों पर हमला, 3 साल पहले इस्लामी आतंकी ने लॉरी से रौंद डाला था 5 को

पुलिस ने फिलहाल आरोपित से जुड़ी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। स्विडन की राजधानी में पहले भी दो बार इस्लामी आतंकियों ने हमले...

‘इस बार चुनाव बंगाल के भविष्य का, ऐसा करंट लगेगा कि कुर्सी से 2 फुट ऊपर उठ जाएँगी ममता’: नितिन गडकरी

"चुनाव के दिन आप लोग सुबह उठिएगा…अपने भगवान को याद कीजिएगा… इसके बाद मतदान केंद्रों पर जाकर कमल का बटन दबाइए। ऐसा करंट लगेगा कि ममता जी अपनी कुर्सी से दो फुट ऊपर उठ जाएँगी।"

ट्यूशन के लिए निकली नाबालिग लड़की गायब, शोएब पर ‘लव जिहाद’ के आरोप: 1 महीने बाद भी पुलिस के हाथ खाली

लड़की के पिता ने कहा, "आपलोग उसे ढूँढ कर ला दीजिए, वरना हम ज़हर खा कर मर जाएँगे। अपने हिन्दू होने का धर्म निभाइए। वो उसे बेच सकता है। मुस्लिम बना देगा उसे।"

अनुराग और तापसी पन्नू ‘गैंग’ के ठिकानों पर इनकम टैक्स की रेड पर लिबरलों का रोना शुरू, कहा- ‘ये तो होना ही था’

“कुछ बिंदु पर, यह रणनीति काम करना बंद कर देगी। लोग डरेंगे नहीं। वे अब भी सच बोलेंगे। फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप, अभिनेत्री तापसी पन्नू आयकर छापे का सामना कर रहे हैं।”

प्रचलित ख़बरें

BBC के शो में PM नरेंद्र मोदी को माँ की गंदी गाली, अश्लील भाषा का प्रयोग: किसान आंदोलन पर हो रहा था ‘Big Debate’

दिल्ली में चल रहे 'किसान आंदोलन' को लेकर 'BBC एशियन नेटवर्क' के शो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी (माँ की गाली) की गई।

पुलिसकर्मियों ने गर्ल्स हॉस्टल की महिलाओं को नंगा कर नचवाया, वीडियो सामने आने पर जाँच शुरू: महाराष्ट्र विधानसभा में गूँजा मामला

लड़कियों ने बताया कि हॉस्टल कर्मचारियों की मदद से पूछताछ के बहाने कुछ पुलिसकर्मियों और बाहरी लोगों को हॉस्टल में एंट्री दे दी जाती थी।

‘प्राइवेट पार्ट में हाथ घुसाया, कहा पेड़ रोप रही हूँ… 6 घंटे तक बंधक बना कर रेप’: LGBTQ एक्टिविस्ट महिला पर आरोप

LGBTQ+ एक्टिविस्ट और TEDx स्पीकर दिव्या दुरेजा पर पर होटल में यौन शोषण के आरोप लगे हैं। एक योग शिक्षिका Elodie ने उनके ऊपर ये आरोप लगाए।

‘हाथ पकड़ 20 मिनट तक आँखें बंद किए बैठे रहे, किस भी किया’: पूर्व DGP के खिलाफ महिला IPS अधिकारी ने दर्ज कराई FIR

कुछ दिनों बाद उनके ससुर के पास फोन कॉल कर दास ने कॉम्प्रोमाइज करने को कहा और दावा किया कि वो पीड़िता के पाँव पर गिरने को भी तैयार हैं।

‘बिके हुए आदमी हो तुम’ – हाथरस मामले में पत्रकार ने पूछे सवाल तो भड़के अखिलेश यादव

हाथरस मामले में सवाल पूछने पर पत्रकार पर अखिलेश यादव ने आपत्तिजनक टिप्पणी की। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद उनकी किरकिरी हुई।

आगरा से बुर्के में अगवा हुई लड़की दिल्ली के पीजी में मिली: खुद ही रचा ड्रामा, जानिए कौन थे साझेदार

आगरा के एक अस्पताल से हुई अपहरण की यह घटना सीसीटीवी फुटेज वायरल होने के बाद सामने आई थी।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,284FansLike
81,881FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe