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‘राम-राम नहीं कहा तो इमाम को पीटा’: कॉन्ग्रेस हो या इस्लामी कट्टरपंथी या फिर मीडिया… सबने अलीगढ़ की आपसी झड़प पर हिंदुओं को बदनाम करने के लिए फैलाया झूठ, जानिए सच

पुलिस ने बताया कि इस केस में दोनों पक्ष से शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस की जाँच में सामने आया है इसमें किसी भी तरह का कोई भी धार्मिक रंग व धार्मिक नारा लगाने के लिए मजबूर करने की बात सामने नही आई है, यह बात पूर्णतः गलत है अलीगढ़ पुलिस द्वारा इसका खंडन करती है।

अलीगढ़ से एक इमाम की पिटाई का मामला चर्चा में है। इमाम का नाम मुहम्मद मुस्तकीम है। पुलिस ने इस केस में जाँच के बाद स्पष्ट कहा है कि ये आपसी झड़प का मामला था। बावजूद इसके सोशल मीडिया पर वामपंथी और इस्लामी कट्टरपंथी इसे मॉब लिंचिंग का केस बताकर फैला रहे हैं।

दावा किया जा रहा है कि ‘राम-राम’ न कहने के कारण इमाम पर हमला हुआ। दिलचस्प बात ये है कि घटना से जुड़ी लिखित शिकायत में मुस्तकीम ने धार्मिक नारे लगवाने वाली बात कहीं बताई ही नहीं है। सारा प्रोपेगेंडा बाद में बनाई गई एक वीडियो को वायरल करके फैलाया जा रहा है।

वायरल वीडियो में इमाम क्या बोला?

वायरल वीडियो में मुस्तकीम बताता है कि वह लखनपुरा की मस्जिद का इमाम है और बच्चों को उर्दू पढ़ाता है। शनिवार (20 सितंबर 2025) शाम को वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर लौट रहा था। उसे बुलाकगढ़ी के पास कुछ लोगों ने रोका। उसे राम-राम बोलने के लिए कहा गया। जब उसने किसी बात का जवाब नहीं दिया तो उसके साथ मार-पीट की गई। उसे पाकिस्तान जाने के लिए कहा गया। उसने यहाँ तक आरोप लगाया कि राह चलते लोगों से बुलवाया जाता है और बदतमीजी की जाती थी।

इस्लामी कट्टरपंथी बता रहे मॉब लिंचिंग, कॉन्ग्रेस का प्रोपेगेंडा

अब उसकी इसी वीडियो को शेयर करते हुए इस्लामी कट्टरपंथी अलग एंगल दे रहे हैं। इमाम से मारपीट को स्थानीय मुफ्ती मोहम्मद अकबर काजमी ने ‘मॉब लिंचिंग’ करार दिया। उसने कहा है कि इमाम से ‘जय श्रीराम’ के नारे लगवाए गए और 10-12 लोगों ने मिलकर पीटा। पुलिस इस मामले में जल्द कार्रवाई करे।

तस्वीर साभार: दैनिक भास्कर

शाही जामा मस्जिद के इमाम महमूद रजा काजमी ने आरोप लगाया कि मुस्तकीम को 1 महीने से परेशान किया जा रहा था। लड़के उसे राम-राम कहकर परेशाम करते थे। जवाब न देने पर उसे गाली दी जाती थी-कठमुल्ला कहा जाता था। उसके साथ इन्हीं सबके कारण मारपीट हुई है। मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

इसी तरह इस वीडियो के बूते कॉन्ग्रेसी अपना प्रोपगेंडा आगे बढ़ा रहे हैं। दिखाया जा रहा है कि मस्जिद के इमाम को बंधक बनाकर इसलिए पीटा गया क्योंकि उसने राम-राम नहीं बोला।

यूपी कॉन्ग्रेस का ट्वीट

मीडिया संस्थानों ने दी गलत जानकारी को हवा

यूपी कॉन्ग्रेस और इस्लामी कट्टरपंथियों के अलावा सोशल मीडिया व मीडिया संस्थानों ने भी बिना मामले में सच्चाई की पड़ताल किए इसी दावे को हवा दी है। द ऑब्जर्वर पोस्ट ने तो ये लिखा है कि इमाम की दाढ़ी-टोपी देखकर उस पर हमला हुआ।

ऑब्जर्वर पोस्ट का ट्वीट

एबीपी ने तो अपनी रिपोर्ट में ये भी बताया कि मुस्तकीम की दाढ़ी नोचकर उसे कटवा, गाय खाने वाला कहा गया। इसी तरह दैनिक भास्कर ने भी इसी बयान के आधार पर ये रिपोर्ट की।

एबीपी और दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

पुलिस ने सारे दावे किए खारिज

वहीं अगर केस की जाँच करने वाली अलीगढ़ पुलिस का पक्ष जानें तो पता चलता है कि ये सारे दावे फर्जी हैं। ऑपइंडिया से बातचीत में भी पुलिस ने बताया कि ये सामान्य मारपीट वाली घटना है।

पुलिस के अनुसार, घटना 20 अगस्त 2025 को थाना लोदा में ग्राम बुलाकगढ़ी के मुहम्मद मुस्तकीम को लेकर है। इमाम मुस्तकीम उस दिन अपनी साइकिल से उस दिन रास्ते से जा रहा था। रास्ते में कुछ बच्चे आ गए थे और उन बच्चों को हटाने के दौरान पास खड़े जीशांत से उसकी बहस हो गई और दोनों के बीच मारपीट होने से दोनों घायल हुए और दोनों को अस्पताल लेकर जाया गया।

पुलिस ने बताया कि इस केस में दोनों पक्ष से शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस की जाँच में सामने आया है इसमें किसी भी तरह का कोई भी धार्मिक रंग व धार्मिक नारा लगाने के लिए मजबूर करने की बात सामने नही आई है, यह बात पूर्णतः गलत है अलीगढ़ पुलिस द्वारा इसका खंडन करती है।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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