दावा किया जा रहा है कि ‘राम-राम’ न कहने के कारण इमाम पर हमला हुआ। दिलचस्प बात ये है कि घटना से जुड़ी लिखित शिकायत में मुस्तकीम ने धार्मिक नारे लगवाने वाली बात कहीं बताई ही नहीं है। सारा प्रोपेगेंडा बाद में बनाई गई एक वीडियो को वायरल करके फैलाया जा रहा है।
वायरल वीडियो में इमाम क्या बोला?
वायरल वीडियो में मुस्तकीम बताता है कि वह लखनपुरा की मस्जिद का इमाम है और बच्चों को उर्दू पढ़ाता है। शनिवार (20 सितंबर 2025) शाम को वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर लौट रहा था। उसे बुलाकगढ़ी के पास कुछ लोगों ने रोका। उसे राम-राम बोलने के लिए कहा गया। जब उसने किसी बात का जवाब नहीं दिया तो उसके साथ मार-पीट की गई। उसे पाकिस्तान जाने के लिए कहा गया। उसने यहाँ तक आरोप लगाया कि राह चलते लोगों से बुलवाया जाता है और बदतमीजी की जाती थी।
अलीगढ़ में एक स्थानीय मस्जिद के इमाम को कुछ सत्ता-पोषित गुंडों ने बंधक बनाकर एक घंटे से अधिक समय तक बेरहमी से पीटा और उन्हें 'राम-राम' कहने के लिए मजबूर किया।
— UP Congress (@INCUttarPradesh) September 21, 2025
डबल इंजन वाली भाजपा सरकार पूरे प्रदेश को नफरत की आग में झोंकना चाहती है।
एक समुदाय विशेष के खिलाफ सरकार की नफरत इस कदर… pic.twitter.com/G5xLjIgOLA
इस्लामी कट्टरपंथी बता रहे मॉब लिंचिंग, कॉन्ग्रेस का प्रोपेगेंडा
अब उसकी इसी वीडियो को शेयर करते हुए इस्लामी कट्टरपंथी अलग एंगल दे रहे हैं। इमाम से मारपीट को स्थानीय मुफ्ती मोहम्मद अकबर काजमी ने ‘मॉब लिंचिंग’ करार दिया। उसने कहा है कि इमाम से ‘जय श्रीराम’ के नारे लगवाए गए और 10-12 लोगों ने मिलकर पीटा। पुलिस इस मामले में जल्द कार्रवाई करे।

शाही जामा मस्जिद के इमाम महमूद रजा काजमी ने आरोप लगाया कि मुस्तकीम को 1 महीने से परेशान किया जा रहा था। लड़के उसे राम-राम कहकर परेशाम करते थे। जवाब न देने पर उसे गाली दी जाती थी-कठमुल्ला कहा जाता था। उसके साथ इन्हीं सबके कारण मारपीट हुई है। मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
अलीगढ़
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) September 21, 2025
➡दबंगों ने मस्जिद इमाम से लगवाए धार्मिक नारे
➡नारे लगाने से इनकार करने पर पीटने का आरोप
➡घटना से समुदाय विशेष के लोगों में पनपा आक्रोश
➡बुलाकगढ़ी बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने जाते हैं इमाम
➡पुलिस ने जांच कर कार्रवाई का दिया आश्वासन
➡थाना लोधा क्षेत्र के गांव बुलाकगढ़ी के… pic.twitter.com/FQFtHuxKSc
इसी तरह इस वीडियो के बूते कॉन्ग्रेसी अपना प्रोपगेंडा आगे बढ़ा रहे हैं। दिखाया जा रहा है कि मस्जिद के इमाम को बंधक बनाकर इसलिए पीटा गया क्योंकि उसने राम-राम नहीं बोला।

मीडिया संस्थानों ने दी गलत जानकारी को हवा
यूपी कॉन्ग्रेस और इस्लामी कट्टरपंथियों के अलावा सोशल मीडिया व मीडिया संस्थानों ने भी बिना मामले में सच्चाई की पड़ताल किए इसी दावे को हवा दी है। द ऑब्जर्वर पोस्ट ने तो ये लिखा है कि इमाम की दाढ़ी-टोपी देखकर उस पर हमला हुआ।

एबीपी ने तो अपनी रिपोर्ट में ये भी बताया कि मुस्तकीम की दाढ़ी नोचकर उसे कटवा, गाय खाने वाला कहा गया। इसी तरह दैनिक भास्कर ने भी इसी बयान के आधार पर ये रिपोर्ट की।

पुलिस ने सारे दावे किए खारिज
वहीं अगर केस की जाँच करने वाली अलीगढ़ पुलिस का पक्ष जानें तो पता चलता है कि ये सारे दावे फर्जी हैं। ऑपइंडिया से बातचीत में भी पुलिस ने बताया कि ये सामान्य मारपीट वाली घटना है।
पुलिस के अनुसार, घटना 20 अगस्त 2025 को थाना लोदा में ग्राम बुलाकगढ़ी के मुहम्मद मुस्तकीम को लेकर है। इमाम मुस्तकीम उस दिन अपनी साइकिल से उस दिन रास्ते से जा रहा था। रास्ते में कुछ बच्चे आ गए थे और उन बच्चों को हटाने के दौरान पास खड़े जीशांत से उसकी बहस हो गई और दोनों के बीच मारपीट होने से दोनों घायल हुए और दोनों को अस्पताल लेकर जाया गया।
थाना लोधा- सोशल मीडिया के माध्यम से एक प्रकरण संज्ञान में आया है, जिसमें एक व्यक्ति द्वारा बताया जा रहा है कि उसे कुछ धार्मिक नारे लगाने को मजबूर किया गया था और उसके साथ मारपीट की गई थी, इस संबंध में अवगत कराना है कि कल दि0 20.09.2025 को थाना लोधा में ग्राम बुलाकगढ़ी अन्तर्गत… pic.twitter.com/w6C66VHg67
— ALIGARH POLICE (@aligarhpolice) September 21, 2025
पुलिस ने बताया कि इस केस में दोनों पक्ष से शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस की जाँच में सामने आया है इसमें किसी भी तरह का कोई भी धार्मिक रंग व धार्मिक नारा लगाने के लिए मजबूर करने की बात सामने नही आई है, यह बात पूर्णतः गलत है अलीगढ़ पुलिस द्वारा इसका खंडन करती है।


