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कसाब और याकूब मेमन को जो फाँसी से बचाना चाहता था, वो IAS बनेगा मुस्लिम, CAB से हुआ नाराज

सोशल मीडिया पर लोग हर्ष मंदर की कुंडली निकाल रहे हैं। वैसे यह खबर जगजाहिर है कि हर्ष मंदर वही शख्स है, जिसने आतंकी अजमल कसाब और याकूब मेमन के लिए दया याचिका दायर की थी।

यूपीए कार्यकाल में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सलाह देने के लिहाज से गठित की गई नेशनल एडवाइजरी काउंसिल के पूर्व सदस्य हर्ष मंदर ने नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) के विरोध में अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने कहा है कि अगर कैब पास हुआ तो वो ‘सविनय अवज्ञा’ की राह पर चलेंगे और खुद को आधिकारिक रूप से मुस्लिम पंजीकृत करवा लेंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि वो एनआरसी को कोई भी दस्तावेज जमा करने से मना कर देंगे।

खुद को लेखक, स्तंभकार, शोधकर्ता, शिक्षक के अलावा स्वघोषित मानवाधिकार कार्यकर्ता बताने वाले हर्ष मंदर ने ये बात खुद ट्वीट कर कही है। उन्होंने कहा है कि अगर नागरिकता संशोधन विधेयक पास होता है तो ये उनका सविनय अवज्ञा होगा कि वे पहले खुद को आधिकारिक रूप से मुस्लिम पंजीकृत करवा लेंगे और फिर एनआरसी को कोई भी दस्तावेज जमा करने से मना कर देंगे। वो यहीं नहीं रुके। बल्कि लिखते-लिखते जोश में यह भी लिख गए कि इसके बाद वह अपने लिए किसी अज्ञात जगह पर नजरबंद किए जाने से लेकर नागरिकता वापस लेने जैसी सजा की भी माँग करेंगे। ठीक वैसी ही सजा जैसे किसी मुस्लिम को मिलती है, जिनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं होते। इसके बाद मंदर ने ट्विटर पर अपने फॉलोवर्स से गुहार भी लगाई है कि वे भी कैब के विरोध में इस सविनय अवज्ञा से जुड़ें।

हालाँकि, इस ट्वीट के आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोग हर्ष मंदर को उनकी इस पहल के लिए बधाई देने में जुटे हुए हैं, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हैं जो उनके इस ट्वीट के लिए उन्हें जमकर ट्रोल कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस फैसले से भी बेहतर है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश चले जाएँ।

कुछ यूजर हर्ष मंदर से जुड़ी पुरानी बातों का भी उल्लेख करने से नहीं चूक रहे। एक यूजर ने लिखा है कि विभिन्न न्यूज वेबसाइटों के अनुसार हर्ष मंदर वही शख्स है, जिसने अजमल कसाब और याकूब मेमन जैसे आतंकियों के लिए दया याचिका दायर की थी।

यहाँ बता दें कि जिस कैब के विरोध में हर्ष ने सविनय अवज्ञा की बात की है, उस नागरिकता संशोधन बिलको लेकर विपक्ष ने लोकसभा में अपना पुरजोर विरोध दर्ज कराया था। लेकिन 7 घंटे तक चली तीखी बहस के बाद आखिरकार ये पास हो गया। बिल के पक्ष में 311 और विपक्ष में 80 वोट पड़े। अब लोकसभा के बाद राज्यभा में बिल का पास होना बाकी है। नागरिकता संशोधन बिल का पास होना मोदी सरकार की बड़ी जीत मानी जा रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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