क्या कनेक्शन है केजरीवाल का टैक्स-हेवन देशों और हेम प्रकाश शर्मा से?

केजरीवाल के राजनीतिक उद्गम, और नैतिक श्रेष्ठता के उनके ऊँचे होते जा रहे दावे, दोनों का तकाजा यही है कि केजरीवाल खुद आगे आकर अपने और हेम प्रकाश शर्मा के संबंधों का खुलासा करें, और यह साफ़ करें कि उनके विज्ञापन इतने सारे टैक्स-हेवन देशों में क्यों चल रहे हैं।

कल ही ऑपइंडिया ने यह खुलासा किया कि आप सुप्रीमो और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल मध्य-पूर्व के मुस्लिम-बहुल देशों से चंदा माँग रहे हैं, और उसके लिए आम आदमी पार्टी के विज्ञापन इन देशों में चल रहे हैं। आज यह पता चला कि यह खबर बाहर आने के बाद भी आम आदमी पार्टी का संदिग्ध चंदा-उगाही अभियान थमा नहीं है बल्कि और फैल गया है। और इस फेहरिस्त में टैक्स-चोरी आसान करने के लिए बदनाम (लेकिन टैक्स-चोरों में ‘हेवन’ के रूप में मशहूर) देशों में भी अब आम आदमी पार्टी के विज्ञापन भेजे जा रहे हैं।

जिन 62 देशों में आप के विज्ञापन चिह्नित हैं, उनमें भारत, ऑपइंडिया द्वारा पहले ही खुलासा किए गए चार देशों सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, और क़तर, के अलावा ऑलैंड आइलैंड्स, मखदूनिया (Macedonia, आक्रान्ता सिकंदर का देश), मॉलडोवा जैसे देश भी शामिल हैं।


टैक्स-हेवन देशों का नाम निकल कर आता है सामने

ऑलैंड आइलैंड्स की कुल आबादी 2017 की जनगणना के हिसाब से 30,000 है। अप्रवासी हिन्दुस्तानी भी यहाँ केवल 38 ही हैं। केजरीवाल यहाँ से कितने चंदे की उम्मीद कर रहे थे?

ऐसा ही एक और देश गर्न्सी भी इस सूची में है जहाँ 2016 की जनगणना 63,000 की आबादी बताती है। इसके अलावा यह देश टैक्स-हेवन के रूप में भी विख्यात/कुख्यात है। एंडोरा भी एक और देश है जो आप की विज्ञापन सूची और आंशिक टैक्स-हेवन देशों की सूची, दोनों में मौजूद है।

मखदूनिया, अल्बेनिया, कोसोवो- तीनों के तीनों टैक्स-हेवन देशों की सूची में हैं, और आम आदमी पार्टी की संभावित दानदाता-लक्ष्य की सूची में भी हैं। मॉलडोवा भी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई से अपनी राजनीति शुरू करने वाले अरविन्द केजरीवाल के चंदा-अभियान के लक्ष्य पर है, और सावर्जनिक भ्रष्टाचार पर नज़र रखने वाली संस्था CiFAR इस देश को ‘यूरोप का बिसराया भ्रष्टाचार का स्वर्ग’ कहती है।

केजरीवाल वेटिकेन सिटी में भी चंदे के लिए विज्ञापन लगाए हैं, और यहाँ कुल 1000 ही लोग रहते हैं, जिनमें शायद ही कोई हिंदुस्तान का नागरिक या गैर-ईसाई होगा!

केजरीवाल और चंदा- दाल में काला, या फिर…?

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2017 में आम आदमी पार्टी पर यह आरोप लगा था कि उसने हवाला के जरिए शेल कम्पनियों से चंदे के पैसे लिए। उसके पहले केजरीवाल के ‘गुरु’ अन्ना हजारे भी उन्हें पत्र लिखकर पार्टी को मिल रहे चंदे के बारे में स्थिति स्पष्ट करने के लिए कह चुके थे।

यही नहीं, केजरीवाल पर 2014 के आम चुनावों के पहले भी संदिग्ध स्रोतों से चंदा लेने का आरोप है। आप के बागी विधायक कपिल मिश्रा ने यह आरोप लगाया था कि उनके (केजरीवाल के) वाराणसी से लोकसभा चुनावों का पर्चा भरने के एक सप्ताह पूर्व 5 अप्रैल 2014 को आम आदमी पार्टी के खाते में 4 शेल कम्पनियों से ₹2 करोड़ जमा किए गए। उन तीन कम्पनियों में एक डायरेक्टर समान था- हेम प्रकाश शर्मा।  नोटबंदी के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में छापा मारकर ₹13 करोड़ से अधिक की नकदी बरामद की थी। इस मामले में फँसी कम्पनी में भी हेम प्रकाश शर्मा के डायरेक्टर होने की बात निकल कर सामने आई थी।

कपिल मिश्रा इस हेम प्रकाश शर्मा को ही नोटबंदी के समय की केजरीवाल की विवादास्पद प्रेस कांफ्रेंस के पीछे बताते हैं। और कपिल मिश्रा के आरोप यहाँ से और संगीन ही होते गए। उन्होंने न केवल हेम प्रकाश शर्मा के फर्जी डायरेक्टर होने का आरोप लगाया बल्कि यह अंदेशा भी जताया कि शायद हेम प्रकाश शर्मा का कोई अस्तित्व ही नहीं है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि केजरीवाल को नोटबंदी की वजह से ही चुनाव लड़ने में दिक्कत हो रही है, और नोटबंदी में केजरीवाल का भारी नुकसान हुआ है। केजरीवाल के शुरूआती दिनों में भ्रष्टाचार विरोधी भाषणों को अगर याद करें तो यह आरोप चौंकाने वाले हैं।

DNA की तफ्तीश वेबसाइट से गायब!  

ऑपइंडिया ने जब इस रहस्यमयी हेम प्रकाश शर्मा की तहकीकात करने का प्रयास किया तो हमें इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट मिली जिसमें कई असहज कर देने वाले तथ्य दर्ज थे। इस रिपोर्ट के अनुसार आप को चंदा देने वालीं जिन तीन कम्पनियों का जिक्र ऊपर किया गया है, उनके पास दिखाने के लिए कोई राजस्व नहीं है। इन सभी में तीन लोग डायरेक्टर थे- हेम प्रकाश शर्मा, धरमेंदर कुमार, और मुकेश कुमार। इन कम्पनियों का जो पता रजिस्ट्रार हाउस में दर्ज है वहाँ पर एक डाकखाना, एक शटरबंद किराने की दुकान, और एक छोटा से सिलाई कारखाना है। रिपोर्ट पढ़कर यह कम्पनियाँ निश्चय ही शेल कम्पनियाँ प्रतीत होतीं हैं।

एक और भी चौंकाने वाला वाकया हमारे यह खबर लिखने के बाद हुआ है, जिसके लिए हम इस रिपोर्ट को सम्पादित कर रहे हैं। DNA ने उपरोक्त डायरेक्टरों में से एक मुकेश कुमार को तलाशा और उसके हवाले से यह दावा किया था कि हालाँकि वह इन कागजी कम्पनियों के मालिक जरूर हैं पर उन्होंने कभी आप को चंदा नहीं दिया। DNA ने यह भी लिखा था कि वह हेम प्रकाश शर्मा के आधिकारिक रूप से दर्ज पते पर पहुँचे तो उन्हें वहाँ एक दो-मंजिला घर मिला जहाँ एक अन्य 60-वर्षीया महिला और अपने परिवार के साथ रह रहीं दीपिका शर्मा ने हेम प्रकाश शर्मा की कोई भी जानकारी होने से इंकार किया है।

पर यह खबर लिखे जाने के बाद ऑपइंडिया को यह जानकारी मिली कि यह रिपोर्ट DNA के पोर्टल से हट चुकी है, और वहाँ अब केवल एक error message आ रहा है।

आखिर हेम प्रकाश शर्मा का ऐसा कौन सा सच है, जिसे छिपाने के लिए इस रिपोर्ट को हटाया गया है?? और हेम प्रकाश शर्मा का अरविन्द केजरीवाल से असली connection क्या है?

बेहतर होगा केजरीवाल खुद स्थिति स्पष्ट करें   

केजरीवाल के राजनीतिक उद्गम, और नैतिक श्रेष्ठता के उनके ऊँचे होते जा रहे दावे, दोनों का तकाजा यही है कि केजरीवाल खुद आगे आकर अपने और हेम प्रकाश शर्मा के संबंधों का खुलासा करें, और यह साफ़ करें कि उनके विज्ञापन इतने सारे टैक्स-हेवन देशों में क्यों चल रहे हैं।

अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो वे अपने ऊपर उँगलियाँ उठने से नहीं रोक सकते।

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