ख़ुर्शीद ने कहा राहुल जी सदृश दूसरा मूर्ख मिलना मुश्किल, उनकी जगह कोई ले ही नहीं सकता

सलमान खुर्शीद ने आज खुलकर अपने मन की बात करते हुए कह दिया कि राहुल गाँधी जितने 'मूर्ख' नेतृत्व का विकल्प ढूँढ पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है।

अगर आप पूरी शिद्दत से किसी चीज़ को चाहो, तो सारी कायनात आपको उससे मिलाने में जुट जाती है। ये बहुत ही प्रचलित वाक्य जिस तरह से कॉन्ग्रेस ने अंगीकृत किया है, शायद ही कोई दूसरा राजनीतिक दल इस पर इतनी गंभीरता से काम कर पाया हो। कॉन्ग्रेस की लुटिया डुबोने के बाद राहुल गाँधी मौनव्रत अवस्था में चले गए और कॉन्ग्रेस के तमाम बड़े-छोटे नेता उन्हें चुस्की-गोला ले जाकर मनाने उनसे मिलने गए। ये सब इसलिए किया गया क्योंकि कॉन्ग्रेस अपनी प्राथमिक आइडियोलॉजी “हुआ तो हुआ” की नीति का गंभीरता से अनुसरण करती है।

कॉन्ग्रेस के अलावा पूरे देश के लिए यह हमेशा से ही एक तलिस्मान रहा है कि गाँधी-नेहरू परिवार में आखिर ऐसा क्या है कि इस दल के कोई भी बड़े-छोटे नेता खुद ही इस परिवार के बाहर किसी को नेतृत्व करते नहीं देख पाते हैं। सारा देश इस पहेली को समझना चाहता है। इस बार के लोकसभा चुनाव में जनता द्वारा कॉन्ग्रेस के सम्पूर्ण अपमान के लक्ष्य को निभाने के बाद लोगों में उम्मीद जागी थी कि अब शायद कॉन्ग्रेस में आखिरकार किसी वरिष्ठ नेता का जमीर जागेगा और वो कह पड़ेगा कि बहुत हो गया अब नेतृत्व पर विचार करने का समय आ गया है।

बजाय इसके, लोगों के सामने नई किस्म की नौटंकी पेश की गई। कॉन्ग्रेस के युवराज को नाराज बच्चे की भूमिका में उतारा गया और उसे इस्तीफ़ा देने की लुका-छिपी खिलाई गई। इसके समानांतर कॉन्ग्रेस के छोटे-बड़े गुर्गे EVM से लेकर जनता को मूर्ख साबित करने का अपना काम निभाते गए और अपने नंबर बढ़ाते गए।

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लेकिन भगवान के घर में देर है अंधेर नहीं। इस बार पार्टी के एक वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद की अंतरात्मा का स्वर फूटा और वो आज कह पड़े कि राहुल गाँधी का विकल्प आज भी कॉन्ग्रेस में मौजूद नहीं है। गोदी मीडिया सलमान खुर्शीद के कथन को आपके सामने नहीं लाएगी लेकिन ऑपइंडिया तीखीमिर्ची सेल के विश्वसनीय सूत्रों ने यह स्पष्ट करते हुए बताया है कि सलमान खुर्शीद के कहने का असल मतलब यह था कि कॉन्ग्रेस में रहते हुए कॉन्ग्रेस का बंटाधार करने लायक मूर्ख आज भी राहुल गाँधी के समान कोई नहीं है। यानी, विकल्प तलाशने का तो प्रश्न ही नहीं उठता है।

कॉन्ग्रेस की हर शाख पर राहुल गाँधी बैठा है

शौक़ बहराइची का एक लोकप्रिय शेर है – “बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था, हर शाख़ पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा।” चुनाव आएँगे-जाएँगे, लेकिन कॉन्ग्रेस ने इस शेर को हमेशा ही प्रासंगिक बनाए रखा है।

एक ओर जहाँ कॉन्ग्रेस के नेता कह रहे थे कि राहुल गाँधी को इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए, वहीं अक्ल के बजाए अपने सफ़ेद बालों से वरिष्ठ नजर आने वाले सलमान खुर्शीद ने अपने बयान के साथ इस विवाद को अब समाप्त कर दिया है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस में छुपे हुए हमारे गुप्त सूत्रों का कहना है कि सलमान खुर्शीद के राहुल गाँधी को पार्टी का सबसे बड़ा मूर्ख घोषित करने के प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर के पार्टी में अभी भी बची हुई एकता का परिचय दिया है। जाहिर सी बात है; कॉन्ग्रेस की हर शाख पर उल्लू बैठा है।

सलमान खुर्शीद ने आज खुलकर अपने मन की बात करते हुए कह दिया कि राहुल गाँधी जितने ‘मूर्ख’ नेतृत्व का विकल्प ढूँढ पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है। देश के इस राजपरिवार के पास आज चाहे लोकतंत्र और बहुमत नहीं है लेकिन, उनके पास अपना एक व्यक्तिगत जनादेश जरूर है जो पिछले कुछ दिनों से अपनी स्वामी भक्ति साबित करने राहुल गाँधी को मनाते हुए नजर आ रहा है। भारत को स्वतंत्र हुए बहुत साल हो चुके हैं, लेकिन एक बड़ी जमात अभी भी ऐसी है, जिनका स्वतंत्र होना अभी भी बाकी है।

कॉन्ग्रेस चाहे तो अपनी इस बची हुई टुकड़ी को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर सकती है। यही एक विकल्प अब बाकी है, जिससे कॉन्ग्रेस की शाख पर बैठे उल्लू का राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री बने देखने का सपना पूरा हो पाएगा। वरना योग्यता तो राहुल गाँधी की इतनी भी नहीं है कि वो किसी गाँव में प्रधानी का चुनाव लड़ें और उसमें पीछे से प्रथम आने पर एकमत में वार्ड मेंबर घोषित कर लिए जाएँ। खैर, राहुल गाँधी का कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में बने रहना देशहित में है ये बात सारा देश और भाजपा कार्यालय जानता है। नाम न बता पाने की शर्त पर कुछ गुप्त सूत्रों का तो यहाँ तक कहना है कि राहुल गाँधी से इस्तीफ़ा वापस लेने का विरोध करने पहुँची भीड़ में 99 प्रतिशत लोग भाजपा के कार्यकर्ता निकले।

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