Homeविविध विषयधर्म और संस्कृतिबर्लिन में बन कर तैयार हुआ जर्मनी का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर: दीपावली में...

बर्लिन में बन कर तैयार हुआ जर्मनी का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर: दीपावली में विराजेंगे भगवान, 50 साल पहले नौकरी के लिए पहुँचे इस शख्स ने कर दिया कमाल

एसोसिएशन बनने के कुछ दिनों बाद ही बर्लिन जिला प्रशासन ने मंदिर बनाने के लिए हसेनहाइड पार्क के किनारे एक प्लॉट दे दिया। इसके बाद उन्होंने मंदिर बनाने के लिए पैसा जुटाना शुरू किया।

यूरोपीय देश जर्मनी में 20 साल की मेहनत के बाद हिंदू मंदिर बनकर तैयार हो गया है। राजधानी बर्लिन में बना भगवान श्रीगणेश का यह मंदिर 70 वर्षीय विल्वनाथन कृष्णामूर्ति के अथक परिश्रम और प्रयासों का परिणाम है। इस मंदिर में अब तक भगवान की मूर्ति विराजमान नहीं हुई है। कृष्णामूर्ति दीवाली के समय भव्य कार्यक्रम कर यहाँ भगवान की प्राण प्रतिष्ठा करने की योजना बना रहे हैं।

डीडब्ल्यू से हुई बातचीत में विल्वनाथन कृष्णामूर्ति ने कहा है कि वह 50 साल पहले जर्मनी आए थे। यहाँ वह बर्लिन में रहते हुए एक इलेक्ट्रिकल कंपनी में काम करते थे। जर्मनी आने के बाद से उनका सपना मंदिर बनाने का था। इस सपने को लेकर उनका कहना है कि वह त्यौहार घर भी मना सकते हैं। लेकिन दोस्तों के साथ त्यौहार का जश्न मनाने के लिए उन्हें एक स्थान की जरूरत थी। इसलिए उन्होंने श्री-गणेश हिंदू मंदिर बनाने के लिए साल 2004 में एक एसोसिएशन की स्थापना की।

एसोसिएशन बनने के कुछ दिनों बाद ही बर्लिन जिला प्रशासन ने मंदिर बनाने के लिए हसेनहाइड पार्क के किनारे एक प्लॉट दे दिया। इसके बाद उन्होंने मंदिर बनाने के लिए पैसा जुटाना शुरू किया। प्लान था कि साल 2007 में ही मंदिर बनना शुरू हो जाएगा। लेकिन साल 2010 तक भी शुरू नहीं हो पाया। कृष्णामूर्ति बताते हैं कि मंदिर बनाने में उन्हें 4 तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। पहली समस्या सरकार से अप्रूवल थी। दूसरी मंदिर बनाने को लेकर नियम, तीसरी समस्या पैसों की थी और चौथी डेडलाइंस थी।

कृष्णामूर्ति का कहना है कि वह उधार लेकर मंदिर नहीं बनाना चाहते थे। क्योंकि आने वाली पीढ़ी को उधार वापस करना पड़ता। इसलिए वह दान के पैसों को अधिक से अधिक जुटाने में लगे हुए थे। उन्होंने कहा है कि मंदिर निर्माण दान के पैसों के दम पर ही हुआ है। बर्लिन प्रशासन की ओर से इसमें किसी भी तरह का सहयोग नहीं मिला। जब वह मंदिर के लिए दान जुटा थे तब बर्लिन में भारतीयों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही थी। इसके साथ ही दान में भी बढ़ोतरी हो रही थी।

उन्होंने आगे कहा है कि बर्लिन में अमेजॉन की सबसे बड़ी बिल्डिंग तैयार की जा रही है। इस बिल्डिंग से ज्यादातर भारतीय काम कर रहे हैं। बीते 5 सालों में मंदिर निर्माण के लिए मिल रहे दान में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है। युवा खुले दिल से दान कर रहे हैं। युवा पुरुष और महिलाएँ दोनों नौकरी करते हैं। इसलिए उनके पास किसी त्यौहार को मनाने के लिए घर में समय नहीं मिलता। ऐसे में सभी मंदिर में भगवान के विराजमान होने का इंतजार कर रहे हैं।

विल्वनाथन कृष्णामूर्ति ने कहा है कि दीवाली के समय वह 6 दिवसीय कुंभाभिषेकम अभिषेक समारोह आयोजित करना चाहते हैं। इसी कार्यक्रम के दौरान भगवान श्री गणेश भी मंदिर में विराजित होंगे और उनकी प्राण प्रतिष्ठा होगी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -