Homeविविध विषयमनोरंजनअपने 1 महीने के शिशु को गायत्री मंत्र गुनगुना कर सिखाती हैं ये अभिनेत्री,...

अपने 1 महीने के शिशु को गायत्री मंत्र गुनगुना कर सिखाती हैं ये अभिनेत्री, ताकि वो बड़ा होकर समझे इसकी महत्ता: देखें वीडियो

अनीता हसनंदानी ने फरवरी 9, 2021 को अपने बच्चे को जन्म दिया था। उन्होंने अपने बच्चे होने की खबर भी एक क्रिएटिव वीडियो के जरिए शेयर की थी, जिसमें उन्हें 'बेबी बम्प' के साथ दिखाया जाता है और अगले ही पल उनके और उनके पति के हाथों में शिशु होता है।

बॉलीवुड में जब फिल्मों में हिन्दू धर्म का अपमान आम बात हो गया है, एक अभिनेत्री ऐसी भी हैं जो अपने छोटे से बच्चे को गायत्री मंत्र सिखा रही हैं। हाल ही में अनीता हसनंदानी और रोहित रेड्डी को लड़का हुआ था। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। इसमें वो अपने बच्चे को बाहों में लिए हुए हैं और गायत्री मंत्र पढ़ कर उसे सुना रही हैं। वो चाहती हैं कि उनका बच्चा गायत्री मंत्र सीखते हुए बड़ा हो और इसकी महत्ता समझे।

माँ से इस मंत्र को सुनकर आरव कभी अंगड़ाइयाँ ले रहा है तो कभी क्यूट चेहरा बना रहा है। बेटे को संभालते हुए अनीता उसे पूरा गायत्री मंत्र सुनाती हैं। देखें वीडियो:

अपने बच्चे को गायत्री मंत्र सुनाती अनीता हसनंदानी

अनीता हसनंदानी ने फरवरी 9, 2021 को अपने बच्चे को जन्म दिया था। उन्होंने अपने बच्चे होने की खबर भी एक क्रिएटिव वीडियो के जरिए शेयर की थी, जिसमें उन्हें ‘बेबी बम्प’ के साथ दिखाया जाता है और अगले ही पल उनके और उनके पति के हाथों में शिशु होता है। उन्होंने अपने बेटे का नाम आरव रखा है। उन्होंने शुभकामनाओं के लिए फैंस का भी धन्यवाद दिया है।

अनीता हसनंदानी यूँ तो 3 दर्जन से भी अधिक टीवी सीरियलों और रियलिटी शोज में काम कर के छोटे पर्दे पर धमाल मचाती रही हैं, लेकिन फिल्मों के मामले में उन्हें तेलुगु इंडस्ट्री में भी खासी सफलता मिली। साथ ही वो तमिल फिल्मों भी काम करती हैं। उन्हें ‘ये हैं मोहब्बतें’ और ‘नागिन 3 & 4’ से खासी लोकप्रियता मिली। उनका जन्म मुंबई के एक सिंधी परिवार में हुआ था। उनके पति रोहित रेड्डी कारोबारी हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -