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एक गाना, उसमें कुरान के शब्द और… एआर रहमान के पीछे पड़ गए थे इस्लामी कट्टरपंथी, हटाना पड़ा था हॉल से सिनेमा

इस्लामी कट्टरपंथियों ने “नूर-उन-अला-नूर” नाम के इस गाने को अपमानजनक (अल्लाह के लिए) बताया था। मौलवियों का आरोप था कि इस गाने के कुछ शब्द सीधे क़ुरान से लिए गए हैं।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड में छिड़ी बहस का कोई अंत नज़र नहीं आ रहा है। इस मामले में मशहूर संगीतकार एआर रहमान ने भी अपना नज़रिया पेश किया है। उन्होंने बताया है कि बॉलीवुड का एक पूरा गैंग उनके खिलाफ़ काम कर रहा है। वह गैंग चाहता है कि एआर रहमान की बॉलीवुड में सक्रियता लगभग न के बराबर रह जाए। साथ ही उन्होंने इस्लाम धर्म पर बेबाकी से अपना पक्ष रखा है। 

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा उनके विरोध में काम करने वाला गैंग यह सुनिश्चित करता है कि बॉलीवुड में उन्हें कम से कम काम मिले। इस गुटबाज़ी की वजह से उन्हें सिर्फ डार्क फिल्म में काम करना पड़ता है। इसके अलावा उन्हें अच्छी फिल्मों से दूर रखने का हर संभव प्रयास किया जाता है। इस बात का भी ख़याल नहीं किया जाता है कि इससे उनके करियर पर बेहद नकारात्मक असर पड़ता है। 

एआर रहमान ने बताया कि वह बॉलीवुड के निशाने पर तो रहते ही हैं। इसके अलावा उन्होंने एक ऐसी घटना का भी ज़िक्र किया जिसमें वह मौलवियों के निशाने पर आए थे। उन्हें अपनी एक छोटी सी बात को लेकर सामाजिक तौर पर डराया और प्रताड़ित किया गया था। उन्होंने बताया कि यह घटना लगभग 16 साल पुरानी है, जिसमें उन्हें इतने बुरे अनुभव से गुज़रना पड़ा। 

यह विवाद एक फिल्म की कव्वाली से शुरू हुआ था। जिसके बाद एआर रहमान और मशहूर चित्रकार एमएफ़ हुसैन ऑल इंडिया उलेमा काउंसिल के कट्टर मौलवियों के निशाने पर आ गए थे। एआर रहमान ने एमएफ़ हुसैन की फिल्म “मीनाक्षी” के गाने का संगीत तैयार किया था। जिस पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उन पर इस्लाम का अपमान करने का आरोप लगाते हुए ख़ूब विरोध किया था।        

इस्लामी कट्टरपंथियों ने “नूर-उन-अला-नूर” नाम के इस गाने को अपमानजनक (अल्लाह के लिए) बताया था। मौलवियों का आरोप था कि इस गाने के कुछ शब्द सीधे क़ुरान से लिए गए हैं। इस गाने में ही फिल्म की नायिका तब्बू को दिखाया गया था। इसके बाद तमाम इस्लामी संगठन एआर रहमान के विरोध में उतर आए थे। इसमें मिली काउंसिल, ऑल इंडिया मुस्लिम काउंसिल, रज़ा एकेडमी, जमात-ए-इस्लामी और जमात-उल-उलेमा-ए-हिन्द मुख्य रूप से शामिल थे। 

ऑल इंडिया उलेमा काउंसिल के सचिव मौलाना अब्दुल कुदुस कश्मीरी ने इस मुद्दे पर आधिकारिक बयान जारी किया था। बयान में उन्होंने कहा था, “हमारे लिए ‘नूर-उन-अला-नूर’ पवित्र शब्द है, इसे नायिका की खूबसूरती बताने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।”

इतना ही नहीं, इस मामले में मुंबई में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। यह माँग भी की गई थी कि इस गाने से यह शब्द हटा दिया जाए। इस्लामी कट्टरपंथियों और मौलवियों के लगातार विरोध के चलते “मीनाक्षी – ए टेल ऑफ़ थ्री सिटीज़” को सिनेमाघरों से बाहर निकालना पड़ा था। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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