Homeविविध विषयमनोरंजनगरीब भी था और नेपोटिज्म तो था ही... हटाना पड़ा था 'शुक्ला' सरनेम: रवि...

गरीब भी था और नेपोटिज्म तो था ही… हटाना पड़ा था ‘शुक्ला’ सरनेम: रवि किशन ने बॉलीवुड की खोली पोल

"मुंबई में लोग हमें भैया कह कर पुकारते हैं और उत्तर प्रदेश या फिर बाकी छोटे क्षेत्रों से जो लोग आते हैं, उन्हें नेपोटिज्म का शिकार बनने को मजबूत होना पड़ता है। अभी जो लड़ाई लड़ी जा रही है, ये केवल सुशांत सिंह राजपूत की ही नहीं बल्कि..."

गोरखपुर से सांसद रवि किशन ने बॉलीवुड में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद नेपोटिज्म पर चल रही बहस को आगे बढ़ाते हुए एक बड़ा खुलासा किया है। एक दौर में भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार रहे और कई बॉलीवुड फिल्मों में अलग-अलग भूमिकाएँ निभा चुके रवि किशन ने कहा है कि मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म इतना ज्यादा हावी है कि उन्हें अपना सरनेम (शुक्ला) तक हटाना पड़ा था।

बता दें कि संसद में भी वो रवि किशन शुक्ला के रूप में पुकारे जाते हैं क्योंकि उनका आधिकारिक नाम यही है और चुनाव भी उन्होंने इसी नाम से लड़ा था लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में कभी भी उनके नाम के साथ ‘शुक्ला’ लगा हुआ नहीं देखा गया। भाजपा नेता ने बताया कि उन्होंने नेपोटिज्म के कारण बहुत कुछ खोया है। उन्होंने कहा कि वो इंडस्ट्री में रुपए कमाने और अपने माँ-बाप का नाम रौशन करने आए थे।

रवि किशन ने कहा कि इन सबके बावजूद वो एक गरीब परिवार से मुंबई आए थे, इसीलिए उन्हें यहाँ आकर अपना सरनेम हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा। ‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई जाँच के आदेश देने और मुंबई पुलिस को जाँच एजेंसी का सहयोग करने का आदेश देने वाले फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ये एक ऐतिहासिक फैसला है।

ये बातें उन्होंने ‘न्यूज़ 18’ की प्रीति श्रीवास्तव से बातचीत में कही। रवि किशन शुक्ला ने कहा कि ये दिवंगत अभिनेता के परिवार ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए ख़ुशी का विषय है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ये मामला आत्महत्या का नहीं लग रहा है और मुंबई पुलिस को इस बात पर सोच-विचार करना चाहिए कि आखिर उसने क्या खोया है? साथ ही उन्होंने बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय की भी तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने काफी अच्छा काम किया है। उन्होंने कहा:

“मुंबई में लोग हमें भैया कह कर पुकारते हैं और उत्तर प्रदेश या फिर बाकी छोटे क्षेत्रों से जो लोग आते हैं, उन्हें नेपोटिज्म का शिकार बनने को मजबूत होना पड़ता है। अभी जो लड़ाई लड़ी जा रही है, ये केवल सुशांत सिंह राजपूत की ही नहीं बल्कि पूरे देश के नौजवानों की लड़ाई है। उत्तर प्रदेश और बिहार से या किसी भी राज्य से जब कोई कलाकार मुंबई काम करने के लिए जाए तो उसे हीन भावना से भैया ना बोला जाए। उन्हें नज़रअंदाज़ न किया जाए।”

साथ ही रवि किशन ने ये भी कहा कि आगे यूपी-बिहार से जाने वाले नए कलाकारों के खिलाफ किसी भी प्रकार की गुटबाजी भी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो कलाकार वहाँ काम करने जाते हैं, उनका सम्मान किया जाना चाहिए। रवि किशन द्वारा ‘शुक्ला’ सरनेम हटाने के खुलासे के बीच बता दें कि सिने इंडस्ट्री में कई ऐसे अभिनेता हैं, जो सिल्वर स्क्रीन के लिए अपना पूरा नाम या सरनेम बदल कर या हटा कर काम कर रहे हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

गुजरात के अमरेली में युवक को मारने वाले चार शेरों को उम्रकैद: जानिए कैसे किसी शेर को घोषित किया जाता है ‘आदमखोर’ और क्या...

गुजरात के अमरेली की घटना से समझें कैसे किसी शेर को 'आदमखोर' घोषित किया जाता है और क्यों कई बार उसे हमेशा के लिए जंगल से हटाया जाता है।

पहलगाम आतंकी हमले पर UN रैपोर्टियर बेन सॉल ने दिए थे भारत विरोधी बयान, ऑपइंडिया ने उसी समय उठाए थे सवाल: जाँच में चीन...

UN वॉच की रिपोर्ट में बेन सॉल पर चीन से फंडिंग लेने और भारत के आतंकवाद-रोधी अभियानों के खिलाफ पक्षपातपूर्ण रुख अपनाने के आरोप लगे।
- विज्ञापन -