Tuesday, April 20, 2021
Home विविध विषय भारत की बात 'तू भोजन कुत्ते की तरह चाट या मत खा': हल्दीघाटी की एक अनसुनी कहानी...

‘तू भोजन कुत्ते की तरह चाट या मत खा’: हल्दीघाटी की एक अनसुनी कहानी में गद्दारों के लिए संदेश

"तू भोजन से इनकार कर दे अथवा किसी कुत्ते की तरह इसे चट कर जाए, आज मैं इसका थोड़ा भी विचार नहीं करूँगा। राणा कभी भी तेरा सम्मान नहीं कर सकता, जानता है क्यों? क्योंकि..."

भारत का इतिहास ऐसे जयचंदों से भरा पड़ा है, जिन्होंने अपने फ़ायदे की ख़ातिर देश को बेचने की कोशिश की, राष्ट्र को धोखा दिया और समाज को बदनाम किया। महाराणा प्रताप जब चित्तौरगढ़ की गद्दी पर आसीन थे और हल्दीघाटी में उनका मुग़लों के साथ एक भीषण युद्ध देखने को मिला, तब उनकी युद्ध कला पूरे भारत में विख्यात हुई और अकबर के ख़िलाफ़ तलवार उठाने के लिए इतिहास में उन्हें एक महान योद्धा के रूप में जाना गया। हालाँकि, महाराणा की युद्ध कला, सैन्य क्षमता, नेतृत्व गुण और बुद्धिबल की चर्चा तभी से थी, जब वो किशोरावस्था में थे। लेकिन, सिंहासन धारण करने के बाद उन्होंने इस सभी चीजों को वास्तविक जीवन में सफलतापूर्वक उतार कर दिखाया। महाराणा प्रताप के युद्धकला की चर्चा तो ख़ूब होती है और होनी भी चाहिए, लेकिन राष्ट्र और कुल को लेकर उनके क्या विचार थे, इस पर भी चर्चा आवश्यक है।

अकबर जब एक-एक कर भारत के बड़े भू-भाग को जीतता जा रहा था और उसकी बादशाहत पर कोई आँच नहीं था, ऐसे समय में महाराणा के उदय ने उसे भयाक्रांत कर दिया था। सुरभित जयमाला से सुसज्जित उसका वक्षस्थल और हीरों से जड़ित मुकुट तो उसकी पहचान होती ही थी, लेकिन उसके मन में एक डर समाया रहता था। यह एक देशभक्त द्वारा आज़ादी का बिगुल बजाने और चित्तौरगढ़ के किले पर ‘जय एकलिंग’ बोल कर भगवा ध्वज फहराने का डर था। यह एक ऐसा भय था, जो एक विदेशी आक्रांता को भारत की स्वदेशी ताक़त से लग रहा था। राणा की आज़ादी उसे काँटों की तरह चुभती थी। एक दिन उसने मानसिंह को बुला कर शोलापुर जीतने को कहा और पथ में राणा से मिल कर उसे भी समझाने को कहा। वह राणा को लालच देकर और भय दिखा कर अपने वश में करना चाहता था।

मानसिंह जैसे लोग ही थे, जिनके बल से अकबर शासन कर रहा था। उसके नवरत्नों में शामिल मानसिंह एक राजपुत योद्धा था और जोधाबाई का रिश्तेदार भी। अपने समाज, कुल और देश की उपेक्षा कर अकबर की उँगलियों पर नाचने वाले मानसिंह ने शोलापुर को जीत कर अकबर को अपनी निष्ठा का सन्देश पहुँचाया। घमंड से चूर मानसिंह को शायद पता नहीं था कि जिसके लिए वह कार्य कर रहा है, वह एक आक्रांता है, जो अपनी कूटनीति के बल पर नरम भी बना रहा और जिसने मीठी छुरी बन कर हिन्दुओं को हिन्दुओं से लड़वाया भी। ऐसे व्यक्ति के साथ क्या किया जाना चाहिए? आज यह प्रश्न प्रासंगिक है क्योंकि आज भी ऐसे कई गद्दार और हैं, जो खाते तो इस देश का हैं लेकिन अपने ही समाज की पीठ में छुरा घोंपते हैं। आइए आज से क़रीब 450 वर्ष पीछे जाकर महाराणा प्रताप सिंह से सीखते हैं कि ऐसे लोगों के साथ क्या किया जाना चाहिए?

हुआ यूँ कि अकबर मानसिंह ने अपने आने का सन्देश उदयपुर भिजवा दिया। महाराणा ने अमर सिंह को बुलाकर उसकी आवभगत करने को कहा। ‘अतिथि देवो भवः’ की नीति पर चलने वाले राणा को ख़ूब पता था कि मानसिंह के मन में छल है, कपट है, मुग़लों के प्रति वफ़ादारी है, लेकिन फिर भी उन्होंने अपने लोगों को आदेश दिया कि उसके स्वागत में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। महाराणा का विचार तो देखिए, दुश्मन के साथ भी ऐसा व्यवहार! मानसिंह उदयपुर पहुँचा और अमर सिंह ने उसका पूरा स्वागत किया। उस पर पुष्प-वर्षा की गई, गुलाबजल से सड़कों को धुलवाया गया और पूरा शहर जगमगा रहा था। मानसिंह के स्वागत में कलशें रखी गईं, दीप जलाए गए और दरवाजों को सजाया गया। चकित मानसिंह ने कहा कि उसे ख़ुद इस बात का विश्वास नहीं था कि उसका इतना स्वागत होगा।

ख़ैर, मानसिंह राजमहल पहुँचा और उसके लिए भोजन परोसा गया। सोने-चाँदी की थाली में राजस्थानी पकवान से लेकर अन्य प्रकार की खाद्द सामग्रियाँ डाली गईं। लेकिन, यहाँ एक समस्या खड़ी हो गई। मानसिंह को जिसका इन्तजार था, वह जिसके साथ भोजन करना चाहता था, वह जिससे मिलने आया था, जिसे अकबर का सन्देश देने आया था, वह कहीं भी दिख नहीं रहा था। अतः, उसने अमर सिंह को राणा के पास भेजकर कहवाया कि वह तब तक भोजन का एक कण भी नहीं छुएगा, जब तक महाराणा उसके साथ बैठ कर भोजन न करेंगे। अमर सिंह ने वापस आकर मानसिंह को सन्देश दिया कि चूँकि, महाराणा के सिर में दर्द है, वह मानसिंह के साथ भोजन नहीं कर सकते हैं।

महाराणा प्रताप धर्मभीरु थे, प्रखर हिंदूवादी थे और सनातन परंपरा के वाहक एवं रक्षक थे। जहाँ एक तरफ़ उन्होंने मानसिंह का स्वागत कर अपने हिन्दू चरित्र, स्वाभाव और उदार नीतियों का परिचय दिया, वहीं दूसरी तरफ़ एक कुलघाती के साथ बैठ कर भोजन करना उन्हें सपने में भी मंज़ूर नहीं था। राणा ऐसा नहीं कर सकते थे क्योंकि उनके कुछ सिद्धांत थे, कुछ विचारधारा थी, और वह एक सच्चे राजपूत थे, हिन्दू थे और राष्ट्रवादी थे। मानसिंह ने राणा के सन्देश को अपनी अवज्ञा की तरह लिया और वह राणा के सिर में दर्द होने की ख़बर सुनते ही काँपने लगा। उसकी भृकुटियाँ तन गईं और उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया। गुस्से से काँपते हुए मानसिंह ने युद्ध की धमकियाँ देनी शुरू कर दी और दावा किया कि उसी के कारण राणा की स्वतंत्रता बची हुई है। उसने अपनी युद्धकला के बारे में बखान शुरू कर दिया और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा।

चकाचौंध सी लगी मान को
राणा की मुख–भा से।
अहंकार की बातें सुन
जब निकला सिंह गुफा से।।

60, (हल्दीघाटी, पंचम सर्ग)

राणा प्रताप भला यह सब कैसे बर्दाश्त कर सकते थे? एक महावीर कैसे अपने सामने मुग़लों के दास की वीरता का बखान सुन सकता था? एक राष्ट्रवादी राजा कैसे किसी को अपनी ही धरती पर अपने ही देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने की इज़ाज़त दे सकता था? विशाल कद-काठी और प्रखर तेजमय व्यक्तित्व के राणा जब अचानक से निकल कर मानसिंह के सामने आए, तब उसकी आँखें चकाचौंध सी हो गई, उसे कुछ भी सूझना बंद हो गया और जिस अकबर के बल पर वह कूद रहा था, उसकी याद तत्काल मिट गई। इसके बाद राणा प्रताप ने मानसिंह से जो कहा, वह एक सन्देश है सभी गद्दारों के लिए। यह भारतीय सेना को बलात्कारी बोलने वालों के लिए भी सन्देश है, यह हिन्दुओं को हिंसक बताने वालों के लिए भी सन्देश है, यह कश्मीर को भारत से अलग करने की कोशिश करने वालों के लिए भी सन्देश है और यह विदेशी पैसों से भारत को बर्बाद करने की साज़िश रचने वालों के लिए भी सन्देश है। महाराणा ने कहा:

“अरे तुर्क, तू अपनी यह बकवास बंद कर। तेरे लिए उत्तम भोजन का इंतजाम किया गया है, तेरे लिए शीतल पेय की व्यवस्था की गई है, वो सब ग्रहण कर। या फिर निकल जा यहाँ से। तू जिस युद्ध की धमकी मुझे दे रहा है न, उससे मैं डरता नहीं। तू आ जाना और मुझ से लड़ लेना, अगर इतनी ही इच्छा है तो चित्तौर पर चढ़ाई कर लेना। अरे मूर्ख, तुम तब कहाँ थे जब मैंने स्वतंत्रता का बिगुल फूँका था? मैं अपनी जाति और धर्म का रक्षक हूँ, समझ क्या रखा है तूने मुझे? मैं क्या हूँ, कौन हूँ, ये सब अभी नहीं बता सकता। ये सब मैं तुझे युद्ध में बताऊँगा। तेरे सारे प्रश्नों का उत्तर मैं युद्ध में ही दूँगा, महामृत्यु के साथ इधर-उधर लहराते हुए। प्रताप के प्रखर तेज की आग कैसे जलाती है, तुझ जैसे समाज का त्याग करने वालों को मैं बता दूँगा।”

“तेरे लिए नरक के द्वार खुले हुए हैं, तुझे जीवन भर धिक्कार है, क्योंकि तूने दुश्मनों का साथ दिया है। तुझे एक नज़र देख लेने से ही मन में निराशा का भाव आ जाता है और तुझे छूने से तो पाप लगता ही है। हिन्दू जनता के लिए तू एक क्लेश है, पश्चाताप है। तू इस अम्बर कुल समाज पर कलंक है। राणा कभी भी तेरा सम्मान नहीं कर सकता, जानता है क्यों? क्योंकि, अकबर तेरा मालिक है और मुग़ल पठान तेरे साथी हैं। तू भोजन से इनकार कर दे अथवा किसी कुत्ते की तरह इसे चट कर जाए, आज मैं इसका थोड़ा भी विचार नहीं करूँगा। अरे, तुझे सौ-सौ बार लानत है। तू म्लेच्छ वंश का सरदार है, तू हमारे इस अम्बर कुल पर अभिशाप है। और सुन, अगर इस बात पर तलवार उठती है तो मैं लड़ने को तैयार हूँ।”

महाराणा प्रताप का यह सन्देश आज जन-जन तक पहुँचनी चाहिए। उनकी हर जयंती पर महाराणा के दिखाए रास्ते पर चलने का प्राण करने वाले इस देश को भी गद्दारों के साथ ऐसा ही व्यवहार करना चाहिए, जैसा हमारे पूर्वज प्रताप ने किया था। आज जब उनकी जयंती है तो राणा के युद्ध के साथ-साथ उनके वाक्यों को भी गंभीरता से लेने की ज़रूरत है और मानसिंह एवं जयचंद जैसे कुलघातकों को इसी भाषा में जवाब देना भी वक़्त की माँग है। कहानी आगे की भी है कि किस तरह मानसिंह ने रोते-रोते अकबर के भरे दरबार में राणा द्वारा कही गई बातों को दुहराया और अंततः कैसे हल्दीघाटी का युद्ध हुआ। लेकिन, वो सब फिर कभी। एक और बात, मानसिंह के जाने के बाद महाराणा ने पूरे घर को खुदवा कर गंगाजल से अच्छी तरह सफाई करवाई थी।

(यह पूरा का पूरा लेख 20वीं सदी के लेखक श्यामनारायण पांडेय की कविता-रूपी पुस्तक ‘हल्दीघाटी‘ पर आधारित है।)

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

काशी की 400 साल पुरानी परंपरा: बाबा मसाननाथ मंदिर में मोक्ष की आकांक्षा में धधकती चिताओं के बीच नृत्य करती हैं नगरवधुएँ

काशी की महाशिवरात्रि, रंगभरी एकादशी, चिता भस्म की होली के बाद एक और ऐसी प्राचीन परंपरा जो अपने आप में अनूठी है वह है मणिकर्णिका घाट महाश्मशान में बाबा मसाननाथ के दर पर नगरवधुओं का नृत्य।

सुबह का ‘प्रोपेगेंडाबाज’ शाम को ‘पलटी मारे’ तो उसे शेखर गुप्ता कहते हैं: कोरोना वैक्सीन में ‘दाल-भात मूसलचंद’ का क्या काम

स्वदेशी वैक्सीन पर दिन-रात अफवाह फैलाने वाले आज पूछ रहे हैं कि सब को वैक्सीन पहले क्यों नहीं दिया? क्या कोरोना वॉरियर्स और बुजुर्गों को प्राथमिकता देना 'भूल' थी?

बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से होएः दिल्ली में CM केजरीवाल के ‘मैं हूॅं ना’ पर मजदूरों की बेबस भीड़ क्यों भारी

केजरीवाल ने मज़दूरों से अपील करते हुए 'मैं हूॅं ना' के शाहरुख़ खान स्टाइल में कहा: सरकार आपका पूरा ख़याल रखेगी। फिर भी वही भीड़ क्यों?

‘भारत में कोरोना के डबल म्यूटेशन ने दुनिया को चिंता में डाला’: मीडिया द्वारा बनाए जा रहे ‘डर के माहौल’ का FactCheck

'ब्लूमबर्ग' की रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत के इस डबल म्यूटेशन ने दुनिया को चिंता में डाल दिया है। जानिए क्या है इसके पीछे की सच्चाई।

‘सरकार पर विश्वास नहीं’: मजदूरों ने केजरीवाल की नहीं सुनी, 5 लाख ने पकड़ी ट्रेन-बस टर्मिनल पर 50000; दिल्ली से घर लौटने की मारामारी

घर वापसी की यह होड़ केजरीवाल सरकार की साख पर सवाल है। यह बताती है कि दिल्ली के सीएम की बातों पर मजदूरों को भरोसा नहीं है।

कोरोना से लड़ाई में मजबूत कदम बढ़ाती मोदी सरकार: फर्जी प्रश्नों के सहारे फिर बेपटरी करने निकली गिद्धों की पाँत

गिद्धों की पाँत फिर से वैसे ही बैठ गई है। फिर से हेडलाइन के आगे प्रश्नवाचक चिन्ह के सहारे वक्तव्य दिए जा रहे हैं। नेताओं द्वारा फ़र्ज़ी प्रश्न उठाए जा रहे हैं। शायद फिर उसी आकाँक्षा के साथ कि भारत कोरोना के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई हार जाएगा।

प्रचलित ख़बरें

‘वाइन की बोतल, पाजामा और मेरा शौहर सैफ’: करीना कपूर खान ने बताया बिस्तर पर उन्हें क्या-क्या चाहिए

करीना कपूर ने कहा है कि वे जब भी बिस्तर पर जाती हैं तो उन्हें 3 चीजें चाहिए होती हैं- पाजामा, वाइन की एक बोतल और शौहर सैफ अली खान।

‘छोटा सा लॉकडाउन, दिल्ली छोड़कर न जाएँ’: इधर केजरीवाल ने किया 26 अप्रैल तक कर्फ्यू का ऐलान, उधर ठेकों पर लगी कतार

केजरीवाल सरकार ने 26 अप्रैल की सुबह 5 बजे तक तक दिल्ली में लॉकडाउन की घोषणा की है। इस दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त कर लेने का भरोसा दिलाया है।

‘मैं इसे किस करूँगी, हाथ लगा कर दिखा’: मास्क के लिए टोका तो पुलिस पर भड़की महिला, खुद को बताया SI की बेटी-UPSC टॉपर

महिला ने धमकी देते हुए कहा कि उसका बाप पुलिस में SI के पद पर है। साथ ही दिल्ली पुलिस को 'भिखमंगा' कह कर सम्बोधित किया।

नासिर ने बीड़ी सुलगाने के लिए माचिस जलाई, जलती तीली से लाइब्रेरी में आगः 3000 भगवद्गीता समेत 11 हजार पुस्तकें राख

कर्नाटक के मैसूर की एक लाइब्रेरी में आग लगने से 3000 भगवद्गीता समेत 11 हजार पुस्तकें राख हो गई थी। पुलिस ने सैयद नासिर को गिरफ्तार किया है।

पुलिस अधिकारियों को अगवा कर मस्जिद में ले गए, DSP को किया टॉर्चरः सरकार से मोलभाव के बाद पाकिस्तान में छोड़े गए बंधक

पाकिस्तान की पंजाब प्रांत की सरकार के साथ मोलभाव के बाद प्रतिबंधित इस्लामी संगठन TLP ने अगवा किए गए 11 पुलिसकर्मियों को रिहा कर दिया है।

‘F@#k Bhakts!… तुम्हारे पापा और अक्षय कुमार सुंदर सा मंदिर बनवा रहे हैं’: कोरोना पर घृणा की कॉमेडी, जानलेवा दवाई की काटी पर्ची

"Fuck Bhakts! इस परिस्थिति के लिए सीधे वही जिम्मेदार हैं। मैं अब भी देख रहा हूँ कि उनमें से अधिकतर अभी भी उनका (पीएम मोदी) बचाव कर रहे हैं।"
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,985FansLike
82,232FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe