वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 9वीं बार आम बजट पेश किया। पिछले 9 सालों में उन्होंने अलग-अलग राज्यों की संस्कृति को दर्शाती अलग-अलग खासियत वाली हैंडलूम की साड़ियों को पहन कर देश का बजट पेश किया है। उनकी साड़ियों के अलग अलग रंग के अलग-अलग मायने भी हैं। ये साड़ियाँ भारतीय कारीगरों और सांस्कृतिक विरासत का सम्मान भी है।
इन साड़ियों के माध्यम से उन्होंने न केवल अपने प्रोफेशनल लुक को दर्शाया, बल्कि भारतीय शिल्प और स्थानीय कारीगरों की कला को भी सम्मानित करने का संदेश दिया।
वित्त मंत्री की साड़ियों पर चर्चा करने से पहले जानते हैं कि आखिर भारत की संस्कृति में साड़ी कितनी पुरानी है। साड़ी शब्द संस्कृत के ‘सट्टिका’ शब्द से बनी है। इसका मतलब होता है कपड़े की पट्टी। पहले पुरुष और महिलाएँ शरीर के निचले हिस्से में कपड़ा लपेटा करते थे, जिससे धोती पहनने के तरीके का विकास हुआ। महिलाओं ने थोड़ा लंबा कपड़ा लपेटना शुरू किया और इससे साड़ी की शुरुआत हुई।
ऋग्वेद में यज्ञ के वक्त पत्नी को साड़ी पहनकर साथ में बैठने का नियम था। माना जाता है कि यजुर्वेद में सबसे पहले साड़ी शब्द का उल्लेख हुआ। हड़प्पा संस्कृति में भी एक महिला की प्रतिमा मिली है, जो लंबे कपड़े को लपेट कर साड़ी की तरह पहनी हुई है यानी साड़ी पहनने की शुरुआत कब हुई, ये ठीक तरह से नहीं बताया जा सकता। इसकी चर्चा महाभारत काल में भी आती है, जब द्रौपदी के चीरहरण के वक्त भगवान श्रीकृष्ण ने उनके कपड़े की लंबाई बढ़ा कर उनकी मर्यादा की रक्षा की थी। इसे साड़ी ही कहा जाता है। ये तो हुई साड़ी की गौरवशाली इतिहास की बात, आज भी भारतीय परंपरा में महिलाओं के पोशाक के रूप में साड़ी सर्वमान्य और सर्वोपरि है।
2026 में वित्त मंत्री ने पहनी कट्टम कांजीवरम साड़ी
वित्त मंत्री सीतारमण जब 9वां बजट पेश करने लोकसभा में पहुँची तो खास कट्टम कांजीवरम साड़ी पहनी हुई थीं। मजेंटा रंग की साड़ी पर सुनहरे धागों से बेहतरीन स्क्वायर पैटर्न बना हुआ था। बॉर्डर को कॉफी ब्राउन शेड में रखते हुए सुनहरे जरी वर्क से हाइलाइट किया गया था। तमिलनाडु की इस साड़ी का इतिहास 400-500 साल पुराना है। इसे कांचीपुरम में बनाया जाता है।

2025 में मधुबनी पेंटिंग की साड़ी
2025 के बजट को पेश करने के लिए निर्मला सीतारमण बिहार की ऑफ-व्हाइट हैंडलूम सिल्क साड़ी सबसे ज्यादा चर्चा में रही थी। इस साड़ी पर मछली थीम वाली मधुबनी पेंटिंग थी, जिसे पद्मश्री सम्मानित दुलारी देवी ने तैयार किया था।

फरवरी 2024 में अंतरिम बजट पेश करते हुए पहनीं कांथा साड़ी
पश्चिम बंगाल की प्रसिद्ध ‘कांथा कढ़ाई’ वाली नीली तुसर सिल्क साड़ी में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024 में चुनाव से पहले का अंतरिम बजट पेश किया। ये बंगाल के शिल्पकारों के कौशल को दर्शाता है। इन साड़ियों की छपाई काफी लोकप्रिय है।

जुलाई 2024 में अपना पूर्ण बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑफ व्हाइट हथकरघा मंगलगिरी सिल्क साड़ी पहनी। आंध्र प्रदेश की ये साड़ी काफी सिंपल थी, जिसका बॉर्डर मजैंटा रंग का था।

2023 में पहनी इल्कल साड़ी
वित्त मंत्री सीतारमण ने 2023 में कर्नाटक की इल्कल साड़ी पहन कर बजट पेश किया। लाल और काले रंग की टेम्पल बॉर्डर वाली साड़ी पर कसुती धागे का काम था। ये साड़ी भारतीय मंदिर वास्तुकला से प्रेरित मानी जाती है।

2022 में पहनी बोंमकाई साड़ी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2022 में बजट पेश करते हुए ओडिशा की पारंपरिक बोंमकाई साड़ी पहनी थी। रस्ट ब्राउन कलर की साड़ी का बॉर्डर ऑफ व्हाइट था। ये ओडिशा की बुनाई कला को प्रदर्शित करता है।

2021 में पहनी पोचमपल्ली साड़ी
तेलंगाना की पहचान पोचमपल्ली साड़ी पहनकर वित्त मंत्री ने 2021 का बजट पेश किया था। ऑफ व्हाइट और लाल रंग की इस सिल्क साड़ी के बॉर्डर पर हरे रंग का इकत डिजाइन किया गया था। पोचमपल्ली की महीन सिल्क बुनाई और पारंपरिक डिजाइन इसे भारतीय हथकरघा कला का उत्कृष्ट उदाहरण बनाती थी।

2020 में पहनी तमिलनाडु की साड़ी
2020 में वित्त मंत्री ने तमिलनाडु की पीले रंग की सिल्क साड़ी पहनी थी, जिसका बॉर्डर हरे रंग का था। साड़ी का हल्का पीला रंग उनके शांत और गंभीर व्यक्तित्व को दर्शा रहा था, जबकि हरे रंग का बॉर्डर इसे पारंपरिक और सुरुचिपूर्ण टच दे रहा था। ये ऊर्जा और खुशी का प्रतीक था।

2019 में पहनी मंगलगिरी साड़ी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने पहले बजट 2019 को पेश करते वक्त आंध्रप्रदेश की मंगलगिरी साड़ी पहनी थी। गुलाबी रंग और सुनहरे बॉर्डर वाली यह साड़ी स्थिरता और गंभीरता का प्रतीक था।

वित्त मंत्री ने आज तक बजट पेश करते वक्त जितनी भी साड़ियाँ पहनी हैं, वे सभी हैंडलूम की खास राज्यों की संस्कृति को दर्शाती हुई थी। चाहे वह 2019 में आंध्रपर्देश की मंगलगिरी साड़ी हो या 2026 की तमिलनाडु की कट्टम कांजीवरम सिल्क साड़ी। उनका हर साल का साड़ियों का सलेक्शन उनके व्यक्तित्व को चार चाँद लगाने वाला रहा है।


