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रिन्यूएबल एनर्जी में भारत ने मारी ऐतिहासिक छलांग, दुनिया में चीन-US के बाद तीसरे नंबर पर: समझें कैसे ब्राजील को पीछे छोड़ हरित उर्जा में बनाए नए कीर्तिमान

इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी की रिपोर्ट ‘रिन्यूएबल एनर्जी स्टैटिस्टिक्स 2026’ में भारत अब रिन्यूएबल एनर्जी स्थापित क्षमता के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है

भारत ने क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाते हुए दुनिया में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के अनुसार, इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी की रिपोर्ट ‘रिन्यूएबल एनर्जी स्टैटिस्टिक्स 2026’ में भारत अब रिन्यूएबल एनर्जी स्थापित क्षमता के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है।

भारत ने इस सूची में ब्राजील को पीछे छोड़ दिया है और अब केवल चीन और अमेरिका उससे आगे हैं। यह उपलब्धि सिर्फ एक रैंकिंग नहीं, बल्कि भारत की तेजी से बदलती ऊर्जा रणनीति का संकेत है।

31 मार्च 2026 तक देश की कुल नॉन फॉसिल फ्यूल आधारित क्षमता 283.46 गीगावाट पहुँच चुकी है, जिसमें 274.68 GW रिन्यूएबल एनर्जी और 8.78 GW परमाणु ऊर्जा शामिल है।

खास बात यह है कि 2025-26 में ही 55.3 GW की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई, जो अब तक की सबसे ज्यादा सालाना वृद्धि है। भारत ने जून 2025 में अपने कुल बिजली क्षमता का 50% हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर लिया, जो 2030 के लक्ष्य से पाँच साल पहले है। वहीं जुलाई 2025 में 203 GW की माँग में से 51.5% बिजली रिन्यूएबल स्रोतों से आई।

रिकॉर्ड ग्रोथ: बिजली उत्पादन और क्षमता में उछाल

वित्त वर्ष 2025-26 भारत के ऊर्जा सेक्टर के लिए बेहद अहम रहा। इस दौरान देश का कुल बिजली उत्पादन 1845.9 बिलियन यूनिट तक पहुँच गया। इसमें नॉन फॉसिल स्रोतों की हिस्सेदारी 29.2% रही, जबकि रिन्यूएबल ऊर्जा (बड़े जलविद्युत सहित) का योगदान 26.2% रहा।

ध्यान देने वाली बात यह है कि जहाँ एक तरफ कोयला आधारित बिजली उत्पादन में कमी आई, वहीं दूसरी ओर सौर और पवन ऊर्जा में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। सौर ऊर्जा से 173.5 बिलियन यूनिट और पवन ऊर्जा से 106 बिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ। यानी अब भारत की ऊर्जा व्यवस्था धीरे-धीरे पारंपरिक ईंधनों से हटकर क्लीन एनर्जी की तरफ बढ़ रही है।

सौर और पवन ऊर्जा का दबदबा, गाँव-शहर तक पहुँच

भारत में रिन्यूएबल ऊर्जा की असली ताकत सौर और पवन ऊर्जा बनकर सामने आई है। मार्च 2026 तक सौर ऊर्जा की कुल क्षमता 150.26 GW पहुँच गई, जो 2014 के मुकाबले 53 गुना ज्यादा है।

साल 2025-26 में ही 44.61 GW सौर क्षमता जोड़ी गई, जो अब तक का सबसे बड़ा इजाफा है। इसमें रूफटॉप सोलर और PM KUSUM जैसी योजनाओं का बड़ा योगदान रहा। खासतौर पर रूफटॉप सोलर से लाखों घरों को फायदा मिला और ग्रामीण इलाकों में भी बिजली की पहुँच मजबूत हुई।

पवन ऊर्जा की बात करें तो इसकी क्षमता 56.09 GW तक पहुँच चुकी है। इस सेक्टर में भी 6.05 GW की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई। रिन्यूएबल ऊर्जा के साथ-साथ भारत ने इसके उपकरणों के निर्माण में भी ग्रोथ हुआ है। सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता 2014 के 2.3 GW से बढ़कर 2026 में करीब 172 GW हो गई है।

विंड टरबाइन निर्माण क्षमता भी बढ़कर लगभग 24 GW तक पहुँच गई है। सरकार ने GST को 12% से घटाकर 5% किया, जिससे लागत कम हुई और घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिला। इसके अलावा बैटरी निर्माण और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं।

नई नीतियाँ, मजबूत सिस्टम और भविष्य की तैयारी

सरकार ने इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए कई अहम नीतियाँ लागू की हैं, जैसे REEIMS पोर्टल, VPPA व्यवस्था और CfD मॉडल। इनसे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हुआ है।

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के जरिए ट्रांसमिशन नेटवर्क को बेहतर बनाया जा रहा है, ताकि रिन्यूएबल ऊर्जा को आसानी से पूरे देश में पहुँचाया जा सके। साथ ही 345 GW क्षमता वाले ऊर्जा जोन भी चिन्हित किए गए हैं, जिससे भविष्य की योजना साफ हो सके।

ग्रीन हाइड्रोजन और स्किल डेवलपमेंट से नई रफ्तार

भारत का नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन भी इस बदलाव का बड़ा हिस्सा है। 19744 करोड़ रुपए के निवेश के साथ इसका लक्ष्य 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन करना है। इस मिशन से 8 लाख करोड़ रुपए तक का निवेश आने और 6 लाख नौकरियों के पैदा होने की उम्मीद है।

इस सेक्टर में काम करने वाले लोगों की जरूरत को देखते हुए 2025-26 में 1.24 लाख से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग दी गई है। इससे आने वाले समय में स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार होगा और सेक्टर को और मजबूती मिलेगी।

भारत ने 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल एनर्जी क्षमता का लक्ष्य रखा है। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नहीं लगता।

हालाँकि ग्रिड मैनेजमेंट, ऊर्जा भंडारण और सप्लाई चेन जैसी चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं, लेकिन जिस तरह से नीतियाँ, तकनीक और निवेश आगे बढ़ रहे हैं, उससे साफ है कि भारत आने वाले समय में दुनिया का स्वच्छ ऊर्जा नेता बन सकता है।

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विवेकानंद मिश्र
विवेकानंद मिश्र
एक पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर। राजनीति, संस्कृति, समाज से जुड़ी अनसुनी कहानियाँ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध।

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