Monday, May 16, 2022
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₹215390000000: LIC के पास पड़े हैं, कोई माई-बाप नहीं; इस तरह चेक कर देख लें आपका तो नहीं

यदि आप एलआईसी पॉलिसीधारक हैं या कभी थे तो आसानी से घर बैठे पता कर सकते हैं कि आपका भी कोई बकाया तो नहीं।

देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) आने वाला है।उससे पहले भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास आईपीओ का ड्राफ्ट पेपर जमा किया गया है। आईपीओ के मार्च में कैपिटल मार्केट में आने की उम्मीद है। 

ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्ट्स (DRHP) के अनुसार, सितंबर 2021 के अंत तक एलआईसी (LIC) के पास लगभग 21,539 करोड़ रुपए लावारिस पड़े थे। यह राशि पूरे भारत में करोड़ों पॉलिसीधारकों की है, जो इसकी पॉलिसियों के पूरा होने के बाद दावा नहीं कर पाए या करना भूल गए। इसमें कई ऐसे मामले भी हैं, जिसमें पॉलिसी लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिवार के सदस्य उनकी पॉलिसी पर दावा करना भूल गए।

एलआईसी के पास अनक्लेम्ड राशि (जिस पर दावा नहीं किया गया) वित्त वर्ष 2019 में 13843.70 करोड़ रुपए थी। वित्त वर्ष 2020 में यह बढ़कर 16052.65 करोड़ रुपए हो गई। वित्त वर्ष 2021 में यह राशि 18495.32 करोड़ रुपए थी जो सितंबर 2021 तक 21 हजार करोड़ रुपए को पार कर गई थी। बता दें कि लावारिस फंड में अनक्लेम्ड राशि के साथ ही इस अवधि के दौरान इस पर आए ब्याज भी शामिल हैं।

ऐसे पता करें अनक्लेम्ड अमाउंट

अगर आप भी एलआईसी पॉलिसीधारक हैं या थे तो आसानी से घर बैठे पता कर सकते हैं कि आपका भी कोई बकाया तो नहीं। एलआईसी में लावारिस पड़े अमाउंट का पता लगाने के लिए सबसे पहले https://licindia.in/Bottom-Links/Unclaimed-Policy-Dues पर क्लिक करें। यहाँ अपना LIC पॉलिसी नंबर, पॉलिसीधारक का नाम, जन्मतिथि और पॉलिसीधारक का PAN डालें। इसके बाद सबमिट बटन दबाएँ। ऐसा करने के बाद लावारिस रकम नजर आएगी।

5 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी सरकार

दस्तावेज के मुताबिक सरकार आईपीओ के जरिए एलआईसी में करीब 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है। सरकार 6.32 अरब शेयरों में से करीब 31.6 करोड़ इक्विटी शेयर बेचेगी। इसकी फेस वैल्यू 10 रुपए है। इस ओएफएस आईपीओ के जरिए जितना भी पैसा जुटाया जाएगा, वह सारा सरकार के खजाने में जाएगा ना कि एलआईसी के पास, क्योंकि कंपनी की तरफ से कोई नया शेयर जारी नहीं किया जा रहा है।

दरअसल एलआईसी के आईपीओ से सरकार को विनिवेश के संशोधित लक्ष्य 78 हजार करोड़ रुपए को हासिल करने में मदद मिलेगी। पहले यह लक्ष्य 1.75 लाख करोड़ रुपए था। अभी तक सरकार विनिवेश के जरिए करीब 12 हजार करोड़ रुपए जुटा चुकी है। मौजूदा समय में एलआईसी में सरकार की 100 फीसदी हिस्सेदारी है, लेकिन इस आईपीओ के बाद सरकार के पास 95 फीसदी हिस्सेदारी बचेगी।

किसके लिए कितने शेयर आरक्षित?

इस आईपीओ में 50 फीसदी शेयर क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए आरक्षित हैं। करीब 15 फीसदी शेयर गैर-संस्थागत निवेशकों के लिए आरक्षित रहेंगे। रिटेल निवेशकों के लिए 35 फीसदी शेयर आरक्षित रहेंगे। एलआईसी के कर्मचारियों और पॉलिसीहोल्डर्स के लिए भी इस आईपीओ में कुछ शेयर आरक्षित रहेंगे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि LIC का आईपीओ भारत के लिए सऊदी अरामको के आईपीओ जैसा साबित हो सकता है, जो कि दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में से एक है।

अंबानी की रिलायंस छूट जाएगी पीछे

दरअसल, सेबी में जमा किए गए दस्तावेजों के अनुसार, 30 सितंबर, 2021 तक कंपनी की इंडियन एम्बेडेड वैल्यू 539,686 करोड़ रुपए थी जबकि आने वाले समय में LIC की एम्बेडेड वैल्यू 72 अरब डॉलर तक पहुँचती बताई जा रही है। रिपोर्ट बताती हैं कि ये एम्बेडेड वैल्यू जब किसी जीवन बीमा कंपनी से जुड़ी देखनी होती है तो इसमें भविष्य में होने वाले मुनाफे की मौजूदा वैल्यू के साथ एडजस्टेड नेट वैल्यू शामिल होती है। अब अगर ऐसा हुआ तो LIC की मार्केट वैल्यू 288 अरब डॉलर होगी यानी कि लगभग 22 लाख करोड़ रुपए होगी। जबकि मुकेश अंबानी की कंपनी का मार्केट कैप 16 लाख करोड़ रुपए है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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