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Amasia: पूरी दुनिया का जमीन वाला हिस्सा लगभग एक हो जाएगा, न एशिया बचेगा ना अमेरिका, वैज्ञानिकों के शोध में सुपरकॉन्टिनेंट

शोध में यह भी सामने आया है कि यह सुपरकॉन्टिनेंट प्रशांत महासागर के सिमट कर बंद हो जाने से बनेगा। इस दौरान अमेरिकी और एशिया महाद्वीप एक हो जाएँगे। यही कारण है कि वैज्ञानिकों ने इसे एमेशिया (Amasia Supercontinent) नाम दिया है।

न्यू कर्टिन यूनिवर्सिटी (New Curtin University) की अगुवाई में किए गए शोध में दुनिया के अगले सुपरकॉन्टिनेंट के बारे में पता लगाया गया है। नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि पृथ्वी का अगला सुपरमहाद्वीप 20 से 30 करोड़ साल के बीच बनेगा। इसका नाम एमेशिया (Amasia Supercontinent) भी तय हो चुका है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी है कि पृथ्वी की सतह पर सुपरमहाद्वीप के बनने (Formation of Supercontinent) और विखंडित होने की प्रक्रिया लगातार चल रही है। अच्छी खबर यह है कि हमारे ग्रह यानी कि पृथ्वी के सबसे पुराने महासागर को खत्म होने में अभी 30 करोड़ (300 मिलियन) साल और बाकी हैं।

न्यू कर्टिन यूनिवर्सिटी (New Curtin University) की अगुआई में किए गए शोध में यह भी सामने आया है कि यह सुपरकॉन्टिनेंट प्रशांत महासागर के सिमट कर बंद हो जाने से बनेगा। इस दौरान अमेरिकी और एशिया महाद्वीप एक हो जाएँगे। यही कारण है कि वैज्ञानिकों ने इसे एमेशिया (Amasia Supercontinent) नाम दिया है।

नेशनल साइंस रिव्यू में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने एक सुपरकम्प्यूटर की मदद ली है। इस सुपरकम्प्यूटर में वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि सुपरकॉन्टिनेंट कैसे बनते हैं। उन्होंने इसका सिम्यूलेशन तैयार किया और पाया कि पृथ्वी अरबों सालों से ठंडी हो रही है। महासागरों के नीचे की प्लेटों की मोटाई और सतह समय के साथ कम होती जा रही है, जिससे अगले सुपरमहाद्वीप को पास आकर जुड़ने में दिक्कतें हो रही हैं।

कर्टिन यूनिवर्सिटी के अर्थ डायनामिक रिसर्च ग्रुप और स्कूल ऑफ अर्थ एंड प्लैनेटरी साइंसेस के वैज्ञानिक और अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ चुआन हुआंग का कहना है कि इस अध्ययन से पृथ्वी पर अगले 20 करोड़ सालों में क्या होगा, इसकी जानकारी मिल सकेगी। हुआंग ने कहा:

“पिछले दो अरब वर्षों में, पृथ्वी के महाद्वीप हर 30 करोड़ (600 मिलियन) वर्षों में एक सुपरकॉन्टिनेंट बनाने के लिए एक साथ टकराए हैं, जिसे सुपरकॉन्टिनेंट साइकिल के रूप में जाना जाता है।”

बता दें कि महाद्वीपों को आपस में जुड़ने में अटलांटिक और हिंद जैसे युवा महासागरों को खत्म करने में इसी वजह से दिक्कत आ रही है। इसलिए यह कार्य प्रशांत महासागर के जरिए होगा। प्रशांत महासागर दोनों महासागरों की तुलना में कहीं ज्यादा पुराना है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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