Thursday, July 25, 2024
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मदर मतलब ‘अम्मी’, फादर मतलब ‘अब्बू’: राजस्थान के इंग्लिश मीडियम स्कूल की ‘पढ़ाई’ से अभिभावक नाराज, बोले- घर में भी बच्चे माँगने लगे हैं बिरयानी

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब झारखंड के कई इलाकों में सरकारी स्कूलों के नाम में उर्दू जोड़ दिया गया है और रविवार की जगह उनमें शुक्रवार (जुम्मे) की छुट्टी घोषित कर दी गई है। ऐसा स्थानीय लोगों ने खुद ही दवाब बनाकर कर दिया है। उनका कहना है कि उन इलाकों में 70 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है, इसलिए उनके अनुसार नियम-कायदे होने चाहिए।

दंगों और कन्हैया लाल की इस्लामिक आतंकियों द्वारा हत्या के बाद राजस्थान (Rajasthan) एक बार फिर चर्चा में है। राज्य के कोटा जिले के प्राइवेट स्कूल के कक्षा-2 में ऐसे पाठ्य-पुस्तकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें उर्दू नामों और शब्दों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसको लेकर बवाल हो गया है। अभिभावकों का आरोप है कि छोटे-छोटे बच्चों के मन में उर्दू शब्द भरे जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि इस स्कूल में बड़ी संख्या में गैर-मुस्लिम छात्र पढ़ते हैं। इनके अभिभावकों ने इस तरह के स्कूली पुस्तकों के इस्तेमाल पर रोष जताया है। कहा जा रहा है कि किताब में माँ-पिताजी के बदले बच्चों को अम्मी-अब्बू बोलना और बिरयानी बनाना सिखाया जा रहा है।

इसको लेकर न्यूज24 ने कुछ बच्चों के अभिभावकों का एक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में अभिभावक पाठ्य-पुस्तकों का विरोध कर रहे हैं। वीडियो में एक महिला कहती है, “बच्चों को ऐसी शिक्षा कैसे दे रहे हैं ये लोग? हम हिंदू लोग हैं। हम बिरयानी बनाना नहीं जानते। आप हर एक दिन के बाद बच्चों से कहते हो बिरयानी बनाकर लाओ, बिरयानी बनाकर खाओ। बच्चा बोलता है मम्मी, वहाँ सिखाया जाता है अम्मी बोलो… अब्बू बोलो। ये भाषा हमारे बच्चों को क्यों समझाते हैं आप?”

वीडियो में एक अन्य महिला एक किताब दिखाते हुए कहती है, “ये देखो, इसमें अम्मी-अब्बू कहना सीखा रहे हैं। ये अपनी संस्कृति की भाषा है क्या? इसमें देखो, बिरयानी बनाना सिखा रहे हैं। कहते हैं सप्ताह में एक बार बनाकर लाओ।”

इसमें माँ के लिए अम्मी और पिताजी के लिए अब्बू जैसे संदर्भों के अलावा पुस्तक में कहानी के पात्रों के लिए शानू, सानिया, शिरीन, आमिर, नसीम जैसे मुस्लिम नामों का इस्तेमाल किया गया है। अभिभावकों का कहना है कि एक निजी अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ने वाले उनके बच्चे अब्बू और अम्मी जैसे शब्दों का इस्तेमाल घर पर भी करने लगे हैं और खाने के लिए बिरयानी की माँग भी करने लगे हैं।

वीडियो में कक्षा-2 की जिस पुस्तक को अभिभावक दिखा रहे हैं, उसका नाम ‘गुलमोहर’ है। गुलमोहर पुस्तक का प्रकाशन हैदराबाद के एक प्रकाशक द्वारा किया गया है। इस पुस्तक में 113 पृष्ठ हैं और इसकी कीमत 352 रुपए है। यह किताब CBSE से संबद्ध इंग्लिश मीडियम स्कूल की कक्षा 2 की बताई जा रही है।

इस किताब किताब के पहले चैप्टर ‘टू बिग! टू स्मॉल’ में बच्चे को नए शब्द के रूप में मदर को अम्मी और फादर को अब्बू बताया गया है। दूसरा चैप्टर ‘ग्रैंडपा फारूक’स गार्डन (दादाजी फारूक का बगीचा)’ शीर्षक से है। इसमें मुस्लिम बच्चा आमिर और उसके दादा फारूक को दर्शाया गया है। वहीं, छठे चैप्टर में पेज नंबर 20 पर बताया गया है कि पेरेंट्स किचन में हैं और वे बिरयानी बना रहे हैं।

स्कूली बच्चों के माता-पिता ने किताब के बारे में बजरंग दल के स्थानीय प्रतिनिधियों से शिकायत की। इसके बाद संगठन ने राज्य के शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई है। इस किताब को स्कूली शिक्षा के इस्लामीकरण के प्रयास बताया जा रहा है।

बता दें कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब झारखंड के कई इलाकों में सरकारी स्कूलों के नाम में उर्दू जोड़ दिया गया है और रविवार की जगह उनमें शुक्रवार (जुम्मे) की छुट्टी घोषित कर दी गई है। ऐसा स्थानीय लोगों ने खुद ही दवाब बनाकर कर दिया है। उनका कहना है कि उन इलाकों में 70 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है, इसलिए उनके अनुसार नियम-कायदे होने चाहिए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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