Monday, April 6, 2020
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अयोध्या फैसले के बाद ‘ज्ञानवापी आंदोलन’ की घोषणा, ‘हर-हर महादेव’ के साथ बनारस ने किया समर्थन

महाशिवरात्रि के दिन ही ज्ञानवापी मुक्ति आंदोलन को काशी वासियों ने छतों से खड़े होकर हर-हर महादेव के नारे और घंटे-घड़ियाल, शंख की ध्वनि के साथ भारी संख्या में अपना समर्थन दिया था। ज्ञानवापी पर सिविल जज (सीनियर डिवीजन-फास्ट ट्रैक) आशुतोष तिवारी की अदालत में चल रही है। अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

अयोध्या में राममंदिर के पक्ष में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उत्साहित हुए कुछ लोगों ने वाराणसी में शिवरात्रि को ज्ञानवापी मुक्ति आंदोलन की घोषणा कर दी। आंदोलन के अगले क्रम में संकट मोचन मंदिर से ज्ञानवापी तक दंडवत यात्रा निकालने की घोषणा की गई थी। ऐसा करने वालों में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के नेता सुधीर सिंह प्रमुख हैं जिन्हें पुलिस ने रविवार को उनके घर से गिरफ्तार कर धारा 151 में जेल भेज दिया है।

सपा के आपसी टकराव के बाद शिवपाल सिंह यादव के साथ उनकी पार्टी में शामिल हुए सुधीर सिंह ने चार दिन पहले काशी विश्‍वनाथ ज्ञानवापी मुक्ति आंदोलन शुरू करने की घोषणा की थी। महाशिवरात्रि को अस्‍सी घाट पर उन्होंने द्वादस ज्योतिर्लिंग में शामिल बाबा विश्‍वनाथ ज्‍योतिर्लिंग तथा श्रृंगार गौरी को मुक्‍त कराने की शपथ ली।

महाशिवरात्रि के दिन ही ज्ञानवापी मुक्ति आंदोलन को काशी वासियों ने छतों से खड़े होकर हर-हर महादेव के नारे और घंटे-घड़ियाल, शंख की ध्वनि के साथ भारी संख्या में अपना समर्थन दिया था।

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रिपोर्ट्स के अनुसार इसी क्रम में रविवार को सुधीर सिंह और आंदोलन से जुड़े अन्य लोग मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्‍दुल बातिन के साथ ही कई मुस्लिम नेताओं से मिलकर ज्ञानवापी परिक्षेत्र से मस्जिद अन्‍य शिफ्ट करने का अनुरोध करने वाले थे। इसके बाद उनकी योजना सोमवार को संकटमोचन मंदिर से काशी विश्‍वनाथ मंदिर तक दंडवत यात्रा निकालने की तैयारी थी। पर उससे पहले उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तारी के ठीक पहले सुधीर सिंह ने फेसबुक पर लिखी अपनी पोस्ट में कहा-


इस आंदोलन की घोषणा से पहले मंगलवार को सुधीर सिंह वाराणसी में सिविल जज की कोर्ट में ज्ञानवापी परिसर को हिंदुओं को सौंप देने की माँग करने को लेकर एक याचिका भी दाखिल कर चुके हैं। जिसमें कहा गया है, “ज्ञानवापी मस्जिद पहले भगवान शिव का मंदिर था जिसे मुगल आक्रमणकारियों ने ध्वस्त कर मस्जिद बना दिया था, इसलिए हम हिंदुओं को उनके धार्मिक आस्था एवं राग भोग, पूजा-पाठ, दर्शन, परिक्रमा, इतिहास, अधिकारों को संरक्षित करने हेतु अनुमति दी जाए।” इस वाद पर सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

ध्यातव्य है कि अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में आए फैसले के बाद अब द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक को लेकर खुदाई की माँग भी दुबारा उठने लगी है। इसी कड़ी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की अपील प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वरनाथ की ओर से सिविल जज (सीनियर डिवीजन-फास्ट ट्रैक कोर्ट) की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर की गई थी।

यह सुनवाई सिविल जज (सीनियर डिवीजन-फास्ट ट्रैक) आशुतोष तिवारी की अदालत में चल रही है। जिस पर अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी।

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