Friday, August 19, 2022
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‘शिक्षकों का काम पढ़ाने का, चुनाव ड्यूटी करने का नहीं’ – इलाहाबाद HC में यह तर्क खारिज, बताया यह गैरकानूनी नहीं

"शिक्षकों का काम पढ़ाने का है, चुनाव ड्यूटी करने का नहीं। शिक्षकों को शिक्षण के अलावा चुनाव में लगाए जाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।"

इलाहाबाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए प्राइमरी शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी लगाने को सही ठहराया है। सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ दो जजों की खंडपीठ में विशेष अपील दाखिल कर चुनौती दी गई थी। सिंगल बेंच ने चुनाव ड्यूटी में प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों को लगाने के बेसिक शिक्षा अधिकारी कौशांबी के आदेश को सही ठहराया था। डिवीजन बेंच में दाखिल विशेष अपील में इसी फैसले को चुनौती दी गई थी।

यह आदेश जस्टिस एमएन भंडारी व जस्टिस पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने कौशांबी के बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित प्राइमरी स्कूल के टीचर शिव सिंह, दरियाव का पुरा, नेवादा जिला कौशांबी की विशेष अपील को निस्तारित करते हुए दिया है।

दरअसल, याची प्राइमरी स्कूल में शिक्षक हैं। उनका कहना था कि उन्हें और उनके साथी शिक्षकों को बीएलओ के रूप में चुनाव ड्यूटी पर लगाया गया, जो कि गलत है। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया था कि शिक्षकों का काम पढ़ाने का है, चुनाव ड्यूटी करने का नहीं। याची ने यह भी तर्क दिया था कि शिक्षकों को शिक्षण के अलावा चुनाव में लगाए जाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।

बता दें कि हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने अपने आदेश में कहा था, ”शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी पर लगाया जाना गैरकानूनी नहीं है। उत्तर प्रदेश निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियमावली-2011 की धारा 27 शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी पर लगाने की अनुमति देता है।”

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साथ ही यह भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इलेक्शन कमिशन ऑफ इंडिया बनाम सेंट मेरी स्कूल केस में यह फैसला दे रखा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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