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मंदिर की जमीन पर अतिक्रमणकारियों को बनाओ किराएदार: मद्रास हाई कोर्ट का निर्देश, सुनामी के बाद विस्थापित लोगों ने किया था कब्जा

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश डी कृष्णकुमार और न्यायमूर्ति पीबी बालाजी की पहली पीठ ने कहा, "या तो निवासियों को स्थानांतरित करने के लिए पास के इलाके में एक भूमि की पहचान करें या मंदिर की जमीन को अतिक्रमणकारियों को पट्टे पर देने पर विचार करें।"

मद्रास हाईकोर्ट की प्रथम पीठ ने सोमवार को (5 अगस्त 2024 ) हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि मंदिर की जमीन पर कब्जा करके बैठे अतिक्रमणकारियों को मंदिर की जमीन लीज पर देने के लिए सोचा जा सकता है।

हाई कोर्ट ने कहा कि साल 2004 में आई सुनामी के कारण जो लोग विस्थापित होने के बाद ईस्ट कोड रोड पर स्थित मंदिर की भूमि पर कब्जा करके रहने लगे थे उन्हें अब किराएदार बनाने पर विचार किया जाए।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश डी कृष्णकुमार और न्यायमूर्ति पीबी बालाजी की पहली पीठ ने कहा, “या तो निवासियों को स्थानांतरित करने के लिए पास के इलाके में एक भूमि की पहचान करें या मंदिर की जमीन को अतिक्रमणकारियों को पट्टे पर देने पर विचार करें।”

बता दें कि साल 2004 में जब सुनामी आई थी तब लोगों ने अलवंतर ट्रस्ट की भूमि (ये ट्रस्ट तीन गाँव में फैले एक मंदिर को दी गई भूमि का प्रबंधन करता है) पर अतिक्रमण कर लिया था। वह वहाँ से विस्थापित होकर ईस्ट कोड रोड पर स्थित मंदिर की भूमि पर रहने लगे थे।

साल 2022 में हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग ने इस जमीन को खाली कराने के लिए निर्देश जारी किए। हालाँकि जमीन पर कब्जा करके रह रहे लोगों ने जगह से न हटने के लिए एचआर एंड सीई आयुक्त से गुहार लगाई। जब उन्होंने इस पर सुनवाई नहीं की तो याचिका मद्रास हाईकोर्ट पहुँची।

कोर्ट ने संदीरन और 36 अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुएकहा कि अगर याचिकाकर्ता मंदिर की जमीन खाली करने के लिए तैयार हैं तो वह समय दे देगी या फिर एचआर एंड सीई इस पर विचार कर सकती है कि क्या वे उन्हें किरायेदार के रूप में परिवर्तित करने के लिए आवेदन जमा करा लें, बशर्ते वे जमीन पर रहने के लिए किराया चुकाएं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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