Monday, August 2, 2021
Homeदेश-समाज'भाईजान' की लाश को 24 घंटे घर में रखा, मुआवजे की घोषणा होते ही...

‘भाईजान’ की लाश को 24 घंटे घर में रखा, मुआवजे की घोषणा होते ही कराया पोस्टमॉर्टम: ग्राउंड रिपोर्ट

"अजान होते ही विधायक तो अपनी गाड़ी लेकर मस्जिद से निकल जाते हैं। इसके बाद मस्जिद से निकलते ही हजारों की भीड़ पहले तो तेजाब की फैक्ट्री और शराब के ठेके को लूटती है और फ़िर हाथों में लाठी-डंडे, ईंट-पत्थर, सरिया, रॉड, तमंचे आदि हथियार लेकर..."

सीएए विरोध के नाम पर समुदाय विशेष की महिलाओं को धरने पर बिठाया जाता है। ताकी अपने समुदाय को शांति प्रिय समुदाय के तौर पर प्रदर्शित किया जा सके। लेकिन सिर्फ मुखौटा था। इस शांति पूर्वक धरने की आड़ में हिंदुओं के ख़िलाफ एक ऐसी रणनीति तैयार की जाती है, जिसकी भनक कानों-कान क्षेत्र में रहने वाले लोग और 24 घंटे पहरा देने का दावा करने वाली दिल्ली पुलिस तो क्या किसी खुफिया विभाग को भी नहीं लग सकी। इसी का परिणाम रहा कि गहरी नींद में सोते हुए और कट्टरपंथियों की साजिश से कई अनजान हिंदू मौत के मुँह में चले गए। आप दंगे की शुरुआत देखिए… दोपहर की अजान में क्षेत्रीय विधायक शामिल होते हैं और इसके बाद मस्जिद में हजारों की संख्या में मौजूद इस्लामी भीड़ हाथों में हथियार लिए सीधे हिंदुओं पर धावा बोल देती है।

‘हिंदू इलाके में शांति मार्च… फिर मस्जिद में मीटिंग और 400 लीटर पेट्रोल से हमला’ – बुरे फँसे AAP विधायक हाजी युनूस

आश्चर्य इस बात का कि जिन लोगों ने महीनों तक हिंदुओं पर हमला करने की साजिश रची, आज वही खुद को पीड़ित साबित करने में लगे हुए हैं। जब बात पीड़ित बनने की आई तो दंगाइयों ने तनिक भी देर नहीं की और अपने ही घर में 24 घंटे से रखी लाश को निकालकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया। क्यों? क्योंकि खुद को पीड़ित साबित करते हुए केजरीवाल सरकार से 10 लाख रुपए का मुआवजा जो लेना था। एक नहीं, ऐसी अनेक कहानियाँ हैं उस दंगा प्रभावित क्षेत्र से, जिन्हें दंगाइयों ने खुद ही बुना और खुद ही रच डाला।

एक ऐसी ही कहानी है दिल्ली के दंगा प्रभावित क्षेत्र जाफराबाद की। बीते सोमवार को सीएए विरोध के नाम पर चाँद बाग से शुरू हुई हिंसा के सातवें दिन हम दंगा पीड़ितों से बात करते हुए मृतक राहुल ठाकुर के घर पहुँचे। हम घटना के बारे में जानकारी ले ही रहे थे कि तभी मृत राहुल ठाकुर के परिजनों को सांत्वना देने आए पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति ने दावा करते हुए बताया, “सोमवार को सुबह से ही चाँद बाग और करावल नगर क्षेत्र में हिंसा भड़क चुकी थी। इसके बाद दोपहर को मुस्तफाबाद इलाके में मौजूद मस्जिद में हजारों की संख्या में मुस्लिम अजान के नाम पर इकट्ठा होते हैं, जिसमें क्षेत्रीय विधायक हाजी यूनुस भी भाग लेते हैं। अजान होते ही विधायक तो अपनी गाड़ी लेकर मस्जिद से निकल जाते हैं। इसके बाद मस्जिद से निकलते ही हजारों की भीड़ पहले तो तेजाब की फैक्ट्री और शराब के ठेके को लूटती है और फ़िर हाथों में लाठी-डंडे, ईंट-पत्थर, सरिया, रॉड, तमंचे आदि हथियार लिए हिंदुओं को निशाना बनाते हुए उस हमला बोल देती है।”

चश्मदीद आगे बताते हुए कहते हैं, “हज़ारों दंगाइयों की भीड़ की चपेट में आकर एक मजहबी दंगाई की भी मौत हो जाती है। लेकिन आश्चर्य देखिए! दंगाई उसे उठाकर अस्पताल नहीं ले जाते बल्कि उसे अपने घर पर ले जाते हैं। 24 घंटे तक घर में दंगाई युवक का शव रखा रहता है। जैसे ही केजरीवाल सरकार ने दंगों में मारे गए लोगों को मुआवजा देने की घोषणा की, वैसे ही एंबुलेंस को बुलाकर घर में रखी लाश को अस्पताल भिजवा दिया। इसके बाद पोस्टमॉर्टम कराकर शव को दफन कर दिया जाता है।”

अब ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि जब महीनों से हिंदुओं के ख़िलाफ साजिश रची जा रही थी, उसे अंजाम देने के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी भी की गई तो आख़िर वही समुदाय दंगे का पीड़ित कैसे हो सकता है। इसके उलट दूसरी ओर हिंदू बाहुल्य इलाके बृजपुरी में स्थित एक मस्जिद को कोई खरोंच तक नहीं आई और वहीं उसी इलाके में मौजूद शिव मंदिर को दंगाइयों ने अपना निशाना ही नहीं बनाया बल्कि शिव मंदिर पर पथराव करते हुए उसमें तोड़फोड़ भी की। घटना के बाद हर रोज दंगाइयों की खुलती पोल से एक बात तो साफ़ हो गई है कि दंगाई इलाके से हिंदुओं को जड़ से खत्म करना चाहते थे। मतलब साफ है कि यह ‘जंग’ सीएए के खिलाफ कभी थी ही नहीं, बल्कि हिंदुओं के ख़िलाफ थी।

15 साल का नितिन जो चाउमिन लाने गया था… न खा सका, न खिला सका: दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे की क्रूरता

मेरे भाई को जिहाद ने मारा है, एक-एक मस्जिदों व मदरसों की तलाशी ली जाए: दलित दिनेश के भाई

‘1 लाख 10 हजार रुपए लेकर दिल्ली दंगों को सांप्रदायिक रंग दो’ – सीनियर जर्नलिस्ट ने किया खुलासा

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Searched termsदिल्ली हिंदू विरोधी दंगा, नालों से मिले शव, दिल्ली नाला शव, दिल्ली मदरसा गुलेल, मदरसा गुलेल विडियो, शिव विहार, मुस्तफाबाद, अमर विहार, दिल्ली दंगे चश्मदीद, दिल्ली हिंसा चश्मदीद, दिल्ली हिंसा महिला, दिल्ली दंगों में कितने मरे, दिल्ली में कितने हिंदू मरे, मोहम्मद शाहरुख, जाफराबाद शाहरुख, शाहरुख फरार, ताहिर हुसैन आप, ताहिर हुसैन एफआईआर, ताहिर हुसैन अमानतुल्लाह, चांदबाग शिव मंदिर पर हमला, दिल्ली दंगा मंदिरों पर हमला, दिल्ली मंदिरों पर हमले, मंदिरों पर हमले, चांदबाग पुलिया, अरोड़ा फर्नीचर, ताहिर हुसैन के घर का तहखाना, अंकित शर्मा केजरीवाल, अंकित शर्मा ताहिर हुसैन, अंकित शर्मा का परिवार, दिल्ली शाहदरा, शाहदरा दिलबर सिंह, उत्तराखंड दिलवर सिंह, दिल्ली हिंसा में दिलवर सिंह की हत्या, रवीश कुमार मोहम्मद शाहरुख, रवीश कुमार अनुराग मिश्रा, रतनलाल, साइलेंट मार्च, यूथ अगेंस्ट जिहादी हिंसा, दिल्ली हिंसा एनडीटीवी, एनडीटीवी श्रीनिवासन जैन, एनडीटीवी रवीश कुमार, रवीश कुमार दिल्ली हिंसा, दिल्ली हिंसा में कितने मरे, दिल्ली दंगों में मरे, दिल्ली कितने हिंदू मरे, दिल्ली दंगों में आप की भूमिका, आप पार्षद ताहिर हुसैन, आप नेता ताहिर हुसैन, ताहिर हुसैन वीडियो, कपिल मिश्रा ताहिर हुसैन, आईबी कॉन्स्टेबल की हत्या, अंकित शर्मा की हत्या, चांदबाग अंकित शर्मा की हत्या, दिल्ली हिंसा विवेक, विवेक ड्रिल मशीन से छेद, विवेक जीटीबी अस्पताल, विवेक एक्सरे, दिल्ली हिंदू युवक की हत्या, दिल्ली विनोद की हत्या, दिल्ली ब्रहम्पुरी विनोद की हत्या, दिल्ली हिंसा अमित शाह, दिल्ली हिंसा केजरीवाल, दिल्ली पुलिस, दिल्ली पुलिस रतनलाल, हेड कांस्टेबल रतनलाल, रतनलाल का परिवार, छत्तीसिंह पुरा नरसंहार, दिल्ली हिंसा, नॉर्थ ईस्ट दिल्ली हिंसा, करावल नगर, जाफराबाद, मौजपुर, गोकलपुरी, शाहरुख, कांस्टेबल रतनलाल की मौत, दिल्ली में पथराव, दिल्ली में आगजनी, दिल्ली में फायरिंग, भजनपुरा, दिल्ली सीएए हिंसा

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

चौटाला से मिल नीतीश पहुँचे पटना, कुशवाहा ने बता दिया ‘पीएम मैटेरियल’, बीजेपी बोली- अगले 10 साल तक वैकेंसी नहीं

कुशवाहा के बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने कहा कि अगले दस साल तक प्रधानमंत्री पद के लिए कोई वैकेंसी नहीं हैं

वीर सावरकर के नाम पर फिर बिलबिलाए कॉन्ग्रेसी; कभी इसी कारण से पं हृदयनाथ को करवाया था AIR से बाहर

पंडित हृदयनाथ अपनी बहनों के संग, वीर सावरकर द्वारा लिखित कविता को संगीतबद्ध कर रहे थे, लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी को ये अच्छा नहीं लगा और उन्हें AIR से निकलवा दिया गया।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
112,635FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe