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‘इस्लामी कट्टरपंथी बच्चों पर शरिया थोप रहे हैं’: झारखंड में स्कूलों का इस्लामीकरण रोकने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

याचिकाकर्ता पंकज यादव ने कहा, "अगर यह जनसंख्या के आधार पर तय किया जाना है कि कोई स्कूल हिंदी या उर्दू माध्यम होगा तो राज्य में कोई भी स्कूल उर्दू नहीं रहेगा, क्योंकि पूरे राज्य में हिन्दू 70-75 प्रतिशत से अधिक हैं।"

झारखंड (Jharkhand) में इस्लामीकरण (Islamization) एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। स्थिति यह है कि इस्लामीकरण के इस खेल में स्कूल भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। स्कूलों में उर्दू और जबरन इस्लामिक शिक्षा का विवाद अब हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुँच गया है।

इस मामले में वकील राजीव कुमार के जरिए सामाजिक कार्यकर्ता पंकज यादव ने झारखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है। अपनी याचिका में उन्होंने स्कूलों के ‘इस्लामीकरण’ पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश देने की माँग की है।

याचिकाकर्ता ने अपनी जनहित याचिका में उल्लेख किया है कि झारखंड के मुस्लिम बहुल इलाकों जामताड़़ा, पाकुड और गढ़वा सहित कम-से-कम छह जिलों में स्कूलों का ‘इस्लामीकरण’ हो चुका है। यहाँ स्कूलों में जबरदस्ती उर्दू को जोड़ा जा रहा है। यहीं नहीं, स्कूल बोर्ड और रविवार के बजाय शुक्रवार (जुम्मा) को छुट्टी दे रहा है।

पंकज यादव ने अपनी याचिका में कहा है, “इस्लामी कट्टरपंथी नाबालिग स्कूली बच्चों पर शरीयत और इस्लामी प्रथाओं को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। स्कूली प्रार्थना को जबरदस्ती बदल दिया गया है और बच्चों को प्रार्थना के दौरान हाथ नहीं जोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”

कोर्ट में दायर याचिका में पंकज यादव ने दावा किया है कि अब तक दस जिलों से स्कूलों को शुक्रवार को बंद रखने की जानकारी मिली है और अगर सही तरीके से जाँच की जाए तो जिलों की संख्या बढ़ सकती है।

याचिका में कहा गया है कि हिंदू छात्रों का गढ़़वा के एक स्कूल में सिर्फ इसलिए दाखिला नहीं दिया गया, क्योंकि उस स्कूल में मुस्लिम छात्रों की संख्या ज्यादा थी। पंकज यादव का कहना है कि शिक्षा मंत्री के आदेश के बाद जामताड़ा के स्कूल शुक्रवार को खोले जा रहे हैं, लेकिन छात्रों और शिक्षकों को स्कूल में घुसने नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में एक बड़ी साजिश के तहत इस तरह की ‘असंवैधानिक और अनैतिक हरकतें’ की जा रही हैं। इससे समाज का सौहार्द्र बिगड़ रहा है। इसके साथ ही जनहित याचिका में उन्होंने ऐसा करने वाले स्कूलों पर एक्शन लेने की माँग की है।

यादव ने कहा है, “अगर यह जनसंख्या के आधार पर तय किया जाना है कि कोई स्कूल हिंदी या उर्दू माध्यम होगा तो राज्य में कोई भी स्कूल उर्दू नहीं रहेगा, क्योंकि पूरे राज्य में हिन्दू 70-75 प्रतिशत से अधिक हैं।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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