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झारखंड सरकार के फैसले के खिलाफ जैन मुनि ने किया प्राण-त्याग, 10 दिनों से अनशन पर बैठे थे: सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाने के खिलाफ है समाज

झारखंड के गिरिडीह जिले में पारसनाथ पहाड़ी पर स्थित सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल घोषित किए जाने के खिलाफ देश भर में विरोध प्रदर्शन जारी है। पारसनाथ पहाड़ी दुनिया भर के जैन धर्मावलंबियों के बीच सर्वोच्च तीर्थ सम्मेद शिखर के रूप में प्रसिद्ध है।

झारखंड में स्थित जैन तीर्थ सम्मेद शिखर को बचाने के लिए आमरण अनशन पर बैठे मुनि सुज्ञेयसागर महाराज का निधन हो गया है। वह राज्य सरकार के जैन तीर्थ सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाए जाने के फैसले के खिलाफ 25 दिसंबर, 2022 से जयपुर के सांगानेर स्थित जैन समाज के मंदिर में आमरण अनशन कर रहे थे। दसवें दिन यानी मंगलवार (3 जनवरी, 2022) को उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज सुबह उनकी ‘डोल यात्रा’ सांगानेर संघीजी मंदिर से निकाली गई। इस दौरान आचार्य सुनील सागर सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद रहे। कहा जा रहा है कि जैन मुनि काे जयपुर के सांगानेर में समाधि दी गई। ‘अखिल भारतीय जैन बैंकर्स फोरम’ के अध्यक्ष भागचन्द्र जैन ने बताया कि सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल घोषित किए जाने के बाद से मुनि ने आमरण अनशन शुरू कर दिया था। उन्होंने सम्मेद शिखर को बचाने के लिए बलिदान दिया है। मुनीश्री सम्मेद शिखर से भी जुड़े हुए थे। इन्हें सांगानेर में श्रमण संस्कृति संस्थान में समाधि दी जाएगी।

सोशल मीडिया पर भी लोग मुनि सुज्ञेयसागर महाराज के इस तरह से जाने से दुःखी नजर आए। हर्ष लिखते हैं, “मुनीश्री सुज्ञेयसागर जी महाराज ने सम्मेद शिखर को बचाने के लिए जो बलिदान दिया है, उसे सम्पूर्ण समाज जगत कभी नहीं भूलेगा। मुनीश्री सुज्ञेयसागर महाराज के बलिदान पर कोटि-कोटि नमन। इन्हें जयपुर के सांगानेर में श्रमण संस्कृति संस्थान में समाधि दी जाएगी।”

झारखंड के गिरिडीह जिले में पारसनाथ पहाड़ी पर स्थित सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल घोषित किए जाने के खिलाफ देश भर में विरोध प्रदर्शन जारी है। पारसनाथ पहाड़ी दुनिया भर के जैन धर्मावलंबियों के बीच सर्वोच्च तीर्थ सम्मेद शिखर के रूप में प्रसिद्ध है।

गौरतलब है कि जैन समाज के लोग झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित जैन तीर्थ स्थल सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल में बदलने का फैसला वापस लेने की माँग कर रहे हैं। इसको लेकर उन्होंने हाल ही में दिल्ली के प्रगति मैदान में इकट्ठे होकर इंडिया गेट की ओर मार्च किया। उनका कहना है कि वे झारखंड सरकार के फैसले के खिलाफ राष्ट्रपति भवन में ज्ञापन देंगे। इसके अलावा जैन समाज के लोगों ने मुंबई में भी सड़कों पर उतरकर मार्च निकाला।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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