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Exclusive: देशद्रोह केस में जेल जाने वाला JNU का स्कॉलर चिंगीज खान अब जामिया में दे रहा ‘शिक्षा’, जानिए कैसे ‘इस्लाम’ के नाम पर ‘पढ़ाई वाला गैंग’ करता है काम

चिंगीज खान पर अप्रैल 2020 में मणिपुर में देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था। उसने एक लेख में मणिपुर के पाँगल मुसलमानों के संगठित उत्पीड़न का दावा किया था, जिसे राज्य सरकार ने भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण बताया था। इस लेख के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया एक बार फिर विवादों में आ गया है। इस बार विश्वविद्यालय में चिंगीज खान नाम के एक विवादित व्यक्ति की फैकल्टी के रूप में नियुक्ति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

दरअसल, चिंगीज खान को जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सेंटर फॉर कम्पेरेटिव रिलिजन्स एंड सिविलाइजेशंस (CCRC) में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त किया गया है। चिंगीज खान वही पूर्व जेएनयू ‘स्कॉलर’ हैं, जिस पर अप्रैल 2020 में देशद्रोह का मामला दर्ज हुआ था।

देशद्रोह के आरोप झेल चुके व्यक्ति को जामिया जैसे सार्वजनिक शोध विश्वविद्यालय में नियुक्त किए जाने को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं और यह मामला एक बार फिर विश्वविद्यालय को विवादों के घेरे में ले आया है।

चिंगिज खान की गूगल स्कॉलर प्रोफाइल

नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं। इसी बीच एक दिलचस्प तथ्य यह भी सामने आया है कि चिंगीज खान ने जुलाई 2025 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के वाइस चांसलर मजहर आसिफ के साथ मिलकर एक शोध-पत्र सह-लेखन यानि (co-author) किया था।

संयोग से उस शोध-पत्र का शीर्षक था ‘पूर्वोत्तर भारत में मुसलमानों के बसने और पलायन की ऐतिहासिक जड़ों का पता लगाना: असम और मणिपुर का एक केस स्टडी’

अब चिंगीज खान की जामिया मिल्लिया इस्लामिया में सेंटर फॉर कम्पेरेटिव रिलिजन्स एंड सिविलाइजेशंस (CCRC) में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति के बाद, उनके और वाइस चांसलर के बीच पहले से रहे इस अकादमिक सहयोग को लेकर भी चर्चाएँ तेज हो गई हैं।

रिसर्च पेपर का स्क्रीनशॉट

राजद्रोह के लिए गिरफ्तारी

अप्रैल 2020 में विवादित जेएनयू ‘स्कॉलर’ चिंगिज खान को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उनके खिलाफ समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने, पब्लिक मिसचीफ और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों में भी मामला दर्ज किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चिंगीज खान ने एक लेख लिखा था जिसमें उन्होंने मणिपुर में पांगल मुसलमानों के ‘सिस्टमेटिक पर्सिक्यूशन’ (संगठित उत्पीड़न) का दावा किया था, जिसे भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण बताया गया। हालाँकि, इन आरोपों के बावजूद उन्हें 7 दिनों के भीतर जमानत मिल गई थी। उस न्यूजक्लिक, मकतूब मीडिया आउटलुक और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने भी उनके समर्थन में खुलकर मोर्चा संभाला था।

उनकी गिरफ्तारी के बाद समर्थकों ने इसे ‘सांप्रदायिक विच-हंट’ करार दिया था। इस दौरान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) के पूर्व अध्यक्ष ने भी चिंगिज खान के समर्थन में ट्वीट किया था।

वही विवादित व्यक्ति चिंगिज खान अब जामिया मिलिया इस्लामिया के सेंटर फॉर कम्पेरेटिव रिलिजन्स एंड सिविलाइजेशंस (CCRC) में पढ़ा रहे हैं, जहाँ उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर नियुक्त किया गया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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