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दर्जनों हिंदू लड़कियों पर नजर, छाँगुर से लेकर जाकिर नाइक तक जुड़े तार और दिल्ली ब्लास्ट से भी कनेक्शन: जानें- KGMU के लव जिहादी रमीज के बारे में अब तक क्या-क्या पता चला?

KGMU की पीड़िता डॉक्टर ने कहा कि डॉ. रमीज मलिक ने उसका गर्भपात कराया। उसके अश्लील वीडियो बनाए और फिर ब्लैकमेल किया। उसपर निकाह के लिए धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। ये उस गैंग का हिस्सा था, जो हिन्दू लड़कियों को टारगेट कर उसका धर्मांतरण कराते थे और उसके बदले में 15 लाख लेते थे। एसपी-बीएसपी के शासनकाल में यहाँ हिन्दू लड़कियों के धर्मांतरण का काफी मामला सामने आया था।

लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी इन दिनों सुर्खियों में है। यहाँ ऐसे डॉक्टरों की गैंग का खुलासा हुआ, जो हिन्दू लड़कियों को प्रेम जाल में फँसा कर उन्हें निकाह करने और इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाते थे। लड़कियों के अश्लील फोटो और वीडियो के सहारे ब्लैकमेल करना, फर्जी निकाहनामा बनाकर निकाह करना जिहादी गैंग का मकसद था। KGMU में जिहादी डॉक्टरों को मौलाना 2 हिन्दू महिला डॉक्टर को टारगेट करने के लिए कहता था। हर हिन्दू महिला के धर्मांतरण का ‘रेट’ अलग-अलग था। ऐसे कई खुलासे अब तक जाँच में सामने आए हैं।

17 दिसंबर 2025 को इस मामले का पता तब चला जब एक हिन्दू महिला डॉक्टर ने जहर खाकर खुदकुशी करने की कोशिश की। महिला डॉक्टर ने पैथोलॉजी विभाग के अपने सीनियर डॉ. रमीज मलिक पर उससे निकाह करने और धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया। उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया गया।

पीड़िता ने परेशान होकर जहर खाकर खुदकुशी करने का प्रयास किया। पीड़िता के पिता ने मुख्यमंत्री और राज्य महिला आयोग से शिकायत की। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान और उपाध्यक्ष अपर्णा यादव एक्टिव हुईँ। इनलोगों ने कुलपति से मुलाकात कर जानकारी ली और कहा कि धर्मांतरण को लेकर एक व्यक्ति नहीं बल्कि गैंग काम कर रहा है, जिसे बेनकाब किया जाएगा।

अश्लील वीडियो बना कर किया ब्लैकमेल और रेप

पीड़िता डॉक्टर ने अपनी आपबीती बताई। उसने कहा कि डॉ. रमीजुद्दीन मलिक उर्फ रमीज मलिक ने गर्भपात भी कराया। आरोपित ने पीड़िता डॉक्टर के अश्लील वीडियो भी बनाए और फिर ब्लैकमेल किया। पीड़िता ने फिर दोहराया कि डॉ. रमीजुद्दीन उर्फ रमीज मलिक ने उस पर निकाह के लिए धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया था।

पीड़िता ने कहा कि शादी का झाँसा देकर पहले डॉ. रमीजुद्दीन ने उसके साथ बार-बार शीरारिक संबंध बनाए। पीड़िता प्रेग्नेंट हो गई, तो दवा खिलाकर बच्चा भी गिरवा दिया। इसके बाद अक्टूबर 2025 में पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया, तो धर्मांतरण करने के लिए कहने लगा।

पीड़िता ने आरोपित से दूरी बनानी शुरू कर दी। इसके बावजूद आरोपित डॉक्टर उसकी पीछे पड़ा रहा। पीड़िता की अश्लील वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल करता रहा और कहता था- “इसे वायरल कर दूँगा, कहीं शादी करने लायक नहीं रहोगी। मान जाओ और धर्म परिवर्तन कर लो।” इसके बाद पीड़िता ने आरोपित डॉक्टर की पहली बीवी मानसी सक्सेना के बारे में भी बताया। पीड़िता ने कहा कि वह सितंबर 2026 में ही मानसी सक्सेना से मिली थी। उसे भी इस्लाम कबूल करवाया गया और फिर निकाह किया।

सीएम योगी से पीड़िता को दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा

पीड़िता डॉक्टर ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और उन्हें घटना की पूरी जानकारी दी। सीएम ने उन्हें दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। सीएम ने कहा कि जाँच में जो भी व्यक्ति संलिप्त पाया जाएगा, उस पर समान रूप से कार्रवाई होगी। महिला आयोग ने भी इस मुद्दे पर सीएम से मुलाकात कर घटना के बारे में बताया।

मामले की जाँच के बाद डॉक्टर रमीज मलिक को केजीएमयू से सस्पेंड कर दिया गया। कॉलेज प्रशासन की जाँच में वह शामिल होकर खुद को निर्दोष बताता रहा। लेकिन जब पुलिस का शिकंजा कसा तो वह फरार हो गया। पुलिस ने उस पर पहले ₹25 हजार और बाद में ₹50 हजार का इनाम घोषित कर दिया।

रमीजुद्दीन ने खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया। जगह-जगह छापेमारी की गई। 7 जनवरी 2026 को उसके पीलीभींत स्थित पैतृक घर पर कुर्की का नोटिस चस्पाया गया। 9 जनवरी को पुलिस ने आरोपित डॉक्टर रमीज मलिक को दबोच लिया। वह कोर्ट में सरेंडर करने की फिराक में था।

डॉ. रमीज का अब्बा सलीमुद्दीन भी जिहादी निकला

पीड़िता की शिकायत पर डॉक्टर रमीजुद्दीन मलिक के अब्बा सलीमुद्दीन और अम्मी खतीजा को 5 जनवरी 2026 को लखनऊ पुलिस ने ठाकुरगंज क्षेत्र से गिरफ्तार किया। इस बीच सलीमुद्दीन को लेकर भी चौकाने वाले खुलासे हुए। उसने खुद भी अलग-अलग राज्यों की 4 हिंदू महिलाओं से निकाह किया था और उनका धर्म परिवर्तन करवाया था। उसकी बीवियाँ जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की हैं।

सलीमुद्दीन के साथ उसकी जिस बीवी खतीजा को गिरफ्तार किया गया, वह भी पहले हिन्दू थी। आरोपित डॉक्टर रमीज मलिक सलीमुद्दीन की पहली बीवी का बेटा था, जो पंजाबी थी। सलीमुद्दीन उत्तराखंड के खटीमा में होम्योपैथिक क्लिनिक चलाता था। वह इलाज के बहाने महिलाओं से नजदीकियाँ बढ़ाने की कोशिश करता था।

सलीमुद्दीन असल में पीलीभीत के एक काजी के संपर्क में था और देवबंद में आता-जाता रहा था। परिवार के भीतर मजहबी कट्टरता बढ़ती चली गई और वही हिंदू घृणा उनके बेटे रमीजुद्दीन तक पहुँची। रमीजुद्दीन पढ़ाई में तेज था। उसका चयन 2012 में आगरा मेडिकल कॉलेज में हो गया। वह अपने अब्बू और काजी के जबरदस्त प्रभाव में था।

आगरा मेडिकल कॉलेज में ‘इस्लामिक मेडिकोज मीट’

2012 में रमीज मलिक का आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में MBBS में दाखिला हुआ। तब तक प्रदेश में सपा की सरकार आ चुकी थी और कट्टरपंथी सोच रखने वाले लोगों का हौसला बढ़ गया था। आगरा मेडिकल कॉलेज में ‘इस्लामिक मेडिकोज मीट’ नाम से बैठके होने लगीं और इन बैठकों में मौलाना और सीनियर छात्र जूनियर्स को यह सिखाने लगे कि हिंदू लड़कियों से कैसे नजदीकी बढ़ाई जाए। इस्लामिक मेडिकोज नाम का एक वॉट्सऐप ग्रुप भी था जिसमें ये कट्टरपंथी जुड़े हुए थे।

उस कॉलेज में कई मुस्लिम डॉक्टरों ने हिंदू लड़कियों को प्रेम-जाल में फँसाया और बाद में उनका धर्म परिवर्तन कराया। रमीज के भी चार–पाँच करीबी मुस्लिम दोस्त थे, जो इसी सोच के साथ काम कर रहे थे। KGMU में उसका एक दोस्त पिछले एक साल से इसी तरह की गतिविधियों में लगा हुआ है।

KGMU और आगरा के ये समूह आपस में जुड़े थे या अलग-अलग काम कर रहे थे। इतना जरूर है कि मेडिकल कॉलेजों में मौलानाओं का आना-जाना धीरे-धीरे सामान्य होता गया। बस्ती मेडिकल कॉलेज में पिछले एक साल से मौलाना आने लगे। बुलंदशहर मेडिकल कॉलेज में तो एक फर्स्ट-ईयर के HOD पर मेडिकल साइंस पढ़ाते समय हदीस के उदाहरण देने का आरोप लगा, जिसे बाद में साथी फैकल्टी ने समझाकर रोका।

डॉक्टर भूपेंद्र ने कहा, “सपा-बसपा के समय इन लोगों का हौसला बढ़ा। तीन-चार साल में यही छात्र सीनियर बने और खुद तकरीर करने लगे। यह गैंग 2011-12 तक सक्रिय रहा।” उसी समय आगरा में भी ‘इस्लामिक मेडिकोज मीट’ के नाम पर मुस्लिम मेडिकल छात्रों को इकट्ठा कर उनका ब्रेनवॉश किया जाने लगा। आगरा मेडिकल कॉलेज में मुस्लिम डॉक्टरों और हिंदू लड़कियों के निकाह का पैटर्न काफी ज्यादा दिखने लगा।

15 लड़कियों पर धर्मांतरण का दबाव, 50 से अधिक लड़कियों के फोटो

पुलिस ने रमीजुद्दीन के मोबाइल की जाँच की। इसमें सामने आया कि वह 15 हिंदू लड़कियों के संपर्क में था, जिन्हें फँसाकर धर्मांतरण का दबाव बना रहा था। उसके निशाने पर केवल छात्राएँ ही नहीं बल्कि प्रोफेसर भी थीं। इनमें आगरा, नोएडा और अन्य कई जिलों की महिलाएँ शामिल थीं। उसका नेटवर्क लखनऊ के अलावा अन्य शहरों में भी था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रमीज मलिक ने KGMU की एक महिला प्रोफेसर को भी जाल में फँसा रखा था। नोएडा में काम करने वाली लड़की ने पुलिस को बताया कि साल 2012 में रमीजुद्दीन ने उसे नशीली दवा पिलाकर दुष्कर्म किया और वीडियो भी बनाया। इसके बाद से वह लड़की को ब्लैकमेल कर शोषण कर रहा था।

पुलिस जाँच के मुताबिक, रमीज मलिक पर आगरा की एक हिंदू महिला डॉक्टर का जबरन धर्मांतरण कराने और धोखे से निकाह करने का आरोप लगाया। पीड़ित महिला का आरोप है कि डॉक्टर रमीज ने फर्जी निकाहनामा तैयार करवाकर लंबे समय तक उसका यौन शोषण किया।

पीलीभीत के काजी जाहिद हसन राना ने यह निकाह पढ़ाया था और शारिक नाम का युवक इसमें गवाह बना था। फर्जी निकाहनामा ये इसलिए है, क्योंकि निकाह के वक्त न तो रमीज और न ही हिंदू महिला डॉक्टर पीलीभीत आए थे। घर बैठे ही केवल कागजों पर निकाहनामा तैयार कर लिया गया था।

रमीज मलिक के मोबाइल ने खोले कई राज

जाँच के दौरान आरोपित डॉक्टर रमीज का मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किया गया। उसने अपने मोबाइल से कई चैट और संपर्क नंबर डिलीट कर दिए थे, जिन्हें फोरेंसिक टीम की मदद से रिकवर करने की कोशिश चल रही है।

रमीज मलिक को रिमांड पर लेकर पुलिस ने कड़ी पूछताछ की। जानकारी के मुताबिक, उसने कई सवाल पर चुप्पी साध ली। आगरा में डॉक्टर परवेज से संबंधों पर भी उसने साफ कुछ नहीं कहा।

उसके फोन और लैपटॉप से पुलिस को अहम सुराग मिले हैं। जाँच एजेंसियों के अनुसार, रमीज ने अपने डिजिटल डिवाइस में ‘जन्नत’ नाम से एक फोल्डर बनाकर हिंदू लड़कियों का डेटा, आपत्तिजनक वीडियो और नंबर सहेज कर रखे थे। शुरुआती जाँच में सामने आया कि उसने पिछले 13 वर्षों से अपनी गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड सँभालकर रख रहा था।

जैसे ही हिंदू लड़की से होता था संपर्क, रख लेता था सारी जानकारी

पूछताछ में सामने आया कि रमीज मलिक का प्रभाव KGMU के मेडिकोज ग्रुप और मेडिकल छात्रों तक था, जिसका इस्तेमाल नेटवर्क फैलाने में किया जाता था। लैपटॉप से 50 से अधिक युवतियों के वीडियो, अश्लील सामग्री और संदिग्ध संपर्कों की जानकारी मिली है। आरोपित ने कुछ मददगारों के नाम बताए हैं, जिनकी भूमिका की जाँच की जा रही है।

लैपटाप के एक अलग फोल्डर में रमीज ने कथित तौर पर कॉल गर्ल्स का भी डेटा जमा कर रखा था। इसमें नाम, नंबर और अन्य जानकारियाँ शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इन कॉल गर्ल्स का इस्तेमाल वो अपने धर्मांतरण रैकेट में मुस्लिम युवाओं को फँसाने के लिए करता था। जाँच में सामने आया कि जिस भी हिंदू लड़की से उसका संपर्क होता था, वह उसकी फोटो और डिटेल तैयार कर अपने पास सेव कर लेता था।

15 लाख का ‘लालच’ और धर्मांतरण नेटवर्क

धर्मांतरण की जाँच के दौरान कई चौकाने वाले खुलासे हुए। इस दौरान पता चला कि रमीज एक बड़े धर्मांतरण नेटवर्क का हिस्सा था, जहाँ मेडिकोज (डॉक्टरों) के धर्मांतरण पर 15 लाख और अन्य लोगों के लिए 5 लाख रुपए का ‘रेट’ तय था।

जाँच में सामने आया है कि आरोपित डॉ रमीज ने फरवरी में एक हिंदू डॉक्टर से शादी की थी, जिसके बदले उसे 15 लाख रुपए मिले थे। कॉल डिटेल्स से पता चला है कि वह 15 अन्य महिला रेजिडेंट डॉक्टरों के भी संपर्क में था और उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित कर धर्मांतरण का दबाव बना रहा था। KGMU में चर्चा है कि यह पूरा खेल एक संगठित नेटवर्क के जरिए चल रहा था, जो धर्मांतरण कराने पर मोटी रकम मुहैया कराता था।

जाँच में पता चला है कि डॉक्टर रमीज और धर्मांतरण गिरोह से जुड़े कुछ मेडिकल स्टाफ की क्लास अलग-अलग मौलाना लेते थे और डॉक्टरों को खास संदेश देते थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, मौलाना डॉक्टरों को दो हिंदू महिलाओं से निकाह करने का संदेश देते थे और इसे शवाब का काम बताकर प्रेरित करते थे। ग्रुप से जुड़े हर डॉक्टर इसी तरह टारगेट दिए जाते थे।

KGMU प्रशासन की मिलीभगत उजागर

धर्मांतरण की इस साजिश में रमीज मलिक की मदद करने के आरोप में दो प्रोफेसरों के नाम भी सामने आए। कॉल रिकॉर्ड्स के अनुसार, रमीज की इन प्रोफेसरों से घंटों बातचीत होती थी। आरोप है कि इन्होंने न सिर्फ रमीज को छिपने में मदद की, बल्कि पीड़िता पर मामला दबाने का दबाव भी बनाया। KGMU की जाँच समितियाँ अब इन प्रोफेसरों से पूछताछ कर रही हैं कि छात्रा के आत्महत्या की कोशिश के बावजूद उन्होंने प्रशासन को सूचना क्यों नहीं दी।

धर्मांतरण का दबाव बनाने के मामले में गिरफ्तार डॉक्टर रमीज और KGMU प्रशासन की मिलीभगत का पता चला। 17 दिसंबर 2025 को KGMU के पैथोलॉजी विभाग के HoD वाहिद अली को घटना की जानकारी दे दी गई थी, लेकिन कई दिनों तक यह बात दबाकर रखी गई।

बताते हैं कि कई बार पहले भी रमीज के खिलाफ शिकायतें मिली थीं, लेकिन KGMU प्रशासन के जिन अफसरों को इस विषय पर कार्रवाई करनी थी उनका आरोपित रमीज को संरक्षण मिला हुआ था। जब तक इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज नहीं कर ली, तब तक KGMU प्रशासन इस मामले में चुप्पी साधे बैठा रहा।

कई दिनों बाद जब पुलिस ने कार्रवाई शुरू की, तब जाकर KGMU प्रशासन की नींद टूटी और उसे सस्पेंड किया गया। घटना के सामने आने पर पैथोलॉजी विभाग के हेड (HoD) वाहिद अली को पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह डॉ रश्मि कुशवाहा को इंचार्ज बनाया गया।

KGMU का एक और डॉक्टर गिरफ्तार

लखनऊ पुलिस ने KGMU के इंटर्न डॉक्टर मोहम्मद आदिल को गिरफ्तार किया। आरोपित ने छात्रा को निकाह का झाँसा देकर लंबे वक्त तक उसका शारीरिक शोषण किया और उसकी अश्लील फोटो व वीडियो वायरल करने की धमकी दी। आदिल ने पहले छात्रा से दोस्ती की थी और निकाह का भरोसा देकर छात्रा को अपने फ्लैट पर बुलाने लगा।

वहीं, उसने कई बार छात्रा के साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद जब छात्रा ने निकाह की बात कही तो हर बार टालमटोल करता और धमकी देता। कहता कि अगर दोबारा इस बारे में बात की तो अश्लील फोटो-वीडियो वायरल कर देगा।

पीड़िता ने आदिल से तंग आकर 29 दिसंबर 2025 को कैसरबाग थाने में यौन शोषण और धमकाने की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद वह फरार हो गया और कई दिनों तक लोकेशन बदल-बदलकर छिपा रहा। 14 जनवरी 2026 को लखनऊ पुलिस ने आदिल को गिरफ्तार कर लिया।

दिल्ली ब्लास्ट मामला और जाकिर नाइक से रमीज मलिक का कनेक्शन

जाँच में रमीज का दिल्ली ब्लास्ट केस में गिरफ्तार की गई शाहीन से भी कनेक्शन सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, छानबीन में यह खुलासा हुआ है कि दिल्ली ब्लास्ट की आरोपी डॉ. शाहीन से रमीज की मुलाकात एक मेडिकल कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई थी। उसी मुलाकात के बाद से रमीज पर शाहीन की विचारधारा का गहरा प्रभाव पड़ गया था। पूछताछ में उसने खुद भी शाहीन से कनेक्शन की बात स्वीकार की है।

आरोपित डॉक्टर रमीज के मोबाइल से धर्मांतरण से जुड़ी संदिग्ध चैट्स और विवादित इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाईक के कई वीडियो मिले हैं। पुलिस को शक है कि रमीज इन वीडियो के जरिए धर्मांतरण का जाल बुन रहा था। डॉक्टर भूपेंद्र बताते हैं कि 2004 के आसपास KGMU में कुछ मेडिकल छात्र भगौड़े इस्लामी कट्टरपंथी डॉ. जाकिर नाइक के संपर्क में आ गए।

धीरे-धीरे कैंपस के कुछ हिस्सों में बकरदाढ़ी रखना और हिजाब पहनना आम होने लगा। इसी दौर में जाकिर नाइक की विचारधारा से जुड़े कट्टरपंथी हिंदू लड़कियों को फँसाने लगे थे। बताया जाता है कि इसमें BDS के छात्र ज्यादा सक्रिय थे। धीरे-धीरे ये धँधा एक पैटर्न बन गया।

पुलिस की मानें तो रमीज के फोन में सिर्फ पीड़िता ही नहीं, बल्कि कई अन्य हिंदू लड़कियों और महिला डॉक्टरों के साथ की गई बातचीत भी मिली। डेटा रिकवरी के दौरान मोबाइल से कुछ न्यूड तस्वीरें भी बरामद हुई। इन चैट्स से साफ संकेत मिल रहे हैं कि आरोपित एक साथ कई महिलाओं के संपर्क में था और उन्हें अपने जाल में फँसा रहा था।

इस मामले की जाँच पुलिस के साथ अब एसटीएफ कर रही है। जाँच का बढ़ता दायरा देख कर उसके करीबियों ने मोबाइल डेटा वॉट्सएप चैट डिलीट कर दिए। कई लोग अंडरग्राउंड हो गए।

परिसर में अवैध मजारें काफी खतरनाक

केजीएमयू परिसर में आधा दर्जन से अधिक अवैध मजारें बनी हुई हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरा हैं। VHP के अनुसार, अप्रैल 2025 में नेत्र रोग विभाग के पीछे बनी मजार के पास अतिक्रमण हटाने गई टीम पर हमला हुआ था, जिसमें कई चिकित्सक घायल हुए थे।

बाद में पुलिस प्रशासन की मदद से वहाँ बनी दुकानों को हटाया गया लेकिन मजार अब भी मौजूद है। संगठन ने ट्रॉमा सेंटर, क्वीनमेरी परिसर, नई OPD और डेंटल बिल्डिंग, डालीगंज स्थित RLC बिल्डिंग और पल्मोनरी विभाग के पास भी मजारें स्थित हैं।

समाजवादी पार्टी और बीएसपी के दौर में करीब 10-15 साल पहले भी KGMU धर्मांतरण का बड़ा अड्डा बना हुआ था। उस समय आसपास की मस्जिदों से मौलाना अक्सर कैंपस में आते-जाते थे। बाद में योगी सरकार आने के बाद काफी समय तक हालात शांत रहे। पिछले कुछ सालों से यह गतिविधियाँ फिर से शुरू हो गई हैं।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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