Homeदेश-समाजकोरोना के भय से माओवादियों ने सीजफायर कर सरकार से लगाई मदद की गुहार

कोरोना के भय से माओवादियों ने सीजफायर कर सरकार से लगाई मदद की गुहार

कोरोना से आम जन-जीवन तो भयभीत है ही, लेकिन इसके संक्रमण के भय का अंदाजा अब शायद माओवादी भी लगा चुके हैं। यही कारण है कि उन्होंने सरकार के सामने सीजफायर की घोषणा की है।

कोरोना से आम जन-जीवन तो भयभीत है ही, लेकिन इसके संक्रमण के भय का अंदाजा अब शायद माओवादी भी लगा चुके हैं। यही कारण है कि उन्होंने सरकार के सामने सीजफायर की घोषणा की है।

ओडिशा में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। वहाँ अब तक कोरोना वायरस के कुल 39 मामले सामने आए हैं। इनमें से 37 सक्रिय मामले हैं। 2 लोग ठीक हो गए हैं लेकिन राहत की बात ये है कि किसी की भी मौत नहीं हुई है।

ओडिशा में माओवादियों ने सीजफायर घोषित किया है औऱ सरकार से अपील की है कि जंगली और रिमोट एरिया में रहने वाले लोगों की मदद करें।

हाल ही में कुछ दिनों पहले सीआरपीएफ के 17 जवानों को मार डाला था। ओडिशा में माओवादियों का कहर पहले भी बरपता रहा है। कुछ दिनों पहले माओवादियों के हमले में तीन बीएसएफ जवानों की मौत हो गई थी। मिली जानकारी के अनुसार माओवादियों ने राज्य के मलकानगिरी के चित्रकोंडा इलाके में घात लगाकर बारूदी सुरंग विस्फोट किया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -