अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव के चलते मिडिल ईस्ट में संकट बना हुआ है और अब इसका असर दुनिया भर में दिख रहा है। इसी बीच ईंधन संकट से निपटने और अर्थव्यवस्था में मजबूती बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से पेट्रोल-डीजल और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है। उन्होंने खुद इसकी पहल भी की है और अपने काफिले को 50% तक छोटा करने का निर्देश दिया है। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इस पर अमल किया है।
संकट के बीच सतर्कता बरतना किसी भी देश के लिए, लोगों के लिए सबसे जरूरी है लेकिन ये भी विपक्ष को नहीं पच रहा है। विपक्ष के नेता राहुल गाँधी से लेकर अन्य विपक्षी दलों के नेता पीएम मोदी की अपील के बाद यह माहौल बनाने में लगे हैं कि देश में सामान का संकट हो गया है। हालाँकि, यही वह झूठ है जिसे परोसने की कोशिश की जा रही है क्योंकि प्रधानमंत्री ने जो कहा-किया है वो सतर्कता बरतने की कोशिश है, ना कि भारत किसी संकट से घिर गया है।
आर्थिक इमरजेंसी की आहट?: भ्रम फैला रहा विपक्ष
विपक्ष ने PM मोदी की अपील के बाद ही इसे लेकर भ्रम फैलाना शुरू कर दिया है। राहुल गाँधी ने X पर लिखा, “मोदी जी ने कल जनता से त्याग माँगे – सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं – ये नाकामी के सबूत हैं।”
राहुल गाँधी ने लिखा, “12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है – क्या खरीदे, क्या न खरीदे, कहाँ जाए, कहाँ न जाए। हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि खुद जवाबदेही से बच निकलें।”
मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे – सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 11, 2026
ये उपदेश नहीं – ये नाकामी के सबूत हैं।
12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है – क्या ख़रीदे, क्या न…
अरविंद केजरीवाल ने भी ऐसा ही भ्रम फैलाने की कोशिश की है। केजरीवाल ने X पर लिखा, “पीएम ने देश के सभी नागरिकों को खाने-पीने में कटौती करने की सलाह दी है, घूमने-फिरने और विदेश यात्राओं में कटौती करने की सलाह दी है, तथा सोना और अन्य कीमती चीजें खरीदने में भी कटौती करने की सलाह दी है।”
उन्होंने आगे लिखा, “क्या यह आर्थिक इमरजेंसी की आहट है? क्या देश भारी आर्थिक संकट में फँस गया है? ऐसा तो देश में पहले कभी नहीं हुआ। प्रधानमंत्री जी को देश के सामने सच्चाई रखनी चाहिए। आखिर देश की असली आर्थिक हालत क्या है?”
पीएम ने देश के सभी नागरिकों को खाने-पीने में कटौती करने की सलाह दी है, घूमने-फिरने और विदेश यात्राओं में कटौती करने की सलाह दी है, तथा सोना और अन्य कीमती चीज़ें खरीदने में भी कटौती करने की सलाह दी है।
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) May 11, 2026
क्या यह आर्थिक इमरजेंसी की आहट है? क्या देश भारी आर्थिक संकट में फँस गया है?… https://t.co/WDM25AfzR3
राहुल गाँधी के करीबी और कॉन्ग्रेस के बड़े नेता केसी वेणुगोपाल ने भी यही किया। उन्होंने X पर लिखा, “ईरान-अमेरिका युद्ध को शुरू हुए 3 महीने हो चुके हैं और PM मोदी अब तक भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह असमर्थ दिखाई दे रहे हैं।”
उन्होंने लिखा, “यह बेहद शर्मनाक, लापरवाही भरा और पूरी तरह से गलत है कि प्रधानमंत्री आम नागरिकों को परेशानियों की ओर धकेल रहे हैं, बजाय इसके कि वे वैश्विक संकट से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए पहले से योजना बनाएँ। जब चुनाव और छोटे राजनीतिक हित ही प्रधानमंत्री की प्राथमिकता बन जाते हैं, तो उसका परिणाम एक संभावित आर्थिक संकट के रूप में सामने आता है।”
3 months into the Iran-US war and PM Modi is still clueless about ensuring India’s energy security.
— K C Venugopal (@kcvenugopalmp) May 10, 2026
It is shameless, reckless and downright immoral that the PM is pushing the common citizen into inconvenience, instead of building contingencies to ensure our economy is unaffected… https://t.co/LoTPH0huE0
भारत में नहीं है कोई कमी: पेट्रोलियम मंत्री ने दिखाया आईना
भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि राहुल गाँधी और विपक्ष के अन्य नेता जो भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं वो पूरी तरह झूठ है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि देश में किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कमी नहीं है। उन्होंने X पर एक पोस्ट में लिखा, “भारत के पास 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की LNG और 45 दिनों का LPG भंडार उपलब्ध है।”
पुरी ने आगे लिखा, “पश्चिम एशिया में तनाव के बीच निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत ने अपने दैनिक LPG उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि (35,000 टन से बढ़ाकर 54,000 टन) की है। इस दौरान कई सारे देशों में तेल के दाम व उपलब्धता को लेकर उतार-चढ़ाव आए लेकिन भारत में कोई असर नहीं पड़ा।”
पुरी ने चेताया, “कुछ लोगों ने कालाबाजारी की, अफवाह फैलाने की पूरी कोशिश की लेकिन PM मोदी के मार्गदर्शन में हमारे प्रयासों से देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कहीं कोई कमी नई आई।” एक अन्य पोस्ट में पुरी ने बताया, “पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान देश ने अपनी दैनिक एलपीजी उत्पादन में लगभग 55% की वृद्धि की है।”
देश में किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कमी नहीं…
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) May 12, 2026
भारत के पास 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की LNG और 45 दिनों का एलपीजी भंडार उपलब्ध है।
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत ने अपने दैनिक एलपीजी उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि (35,000 टन से… pic.twitter.com/RxRFQNd8Ca
हालाँकि, भारत में हालात सही दिख रहे हैं लेकिन दुनिया में संकट का असर दिख रहा है। भारत के पड़ोसी देशों में भी यह संकट नजर आने लगा है।
दुनिया भर में संकट से बिगड़ते हालात
मिडिल ईस्ट विवाद के केंद्र में रहे होर्मुज जलडमरूमध्य में रूकावट ने अप्रैल के अंत और मई की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतों को कई वर्षों के उच्च स्तर तक पहुँचा दिया था और यह 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर चला गया। इस जगह से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 25% हिस्सा गुजरता है। इससे दुनिया भर में महँगाई बढ़ी और ऊर्जा की लागत में भारी उछाल आया।
द इंडियन मैट्रिक्स ने दावा किया है कि फरवरी 2026 से 11 मई 2026 के बीच US में तेल की कीमतें 59% बढ़ी हैं। वहीं, कनाडा में ये 43%, साउथ अफ्रीका में 31%, अर्जेंटीना में 30% कीमतें बढ़ी है। इसमें बताया गया है कि UK से लेकर चीन और रूस तक दुनियाभर में तेल की कीमतें बढ़ी हैं लेकिन भारत में ये स्थिर बनी हुई हैं।
Petrol Prices in G20 Countries as of 11 May, 2026. pic.twitter.com/TGU6iuMyhs
— The Indian Matrix (@indianmatrix) May 11, 2026
इस तनाव के चलते भारत के पड़ोसी देशों में भी हालात बिगड़ रहे हैं। तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ीं और कई देशों में ईंधन की कमी और आर्थिक दबाव पैदा हुआ। इसका असर खासकर उन देशों पर पड़ा जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं।
मालदीव और श्रीलंका जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पहले से ही पर्यटन और ऊर्जा आयात पर निर्भर थी लेकिन पर्यटन में गिरावट और बढ़ती ईंधन कीमतों ने उनकी स्थिति और खराब कर दी। मालदीव में पर्यटन लगभग 20% तक गिर गया और कर्ज चुकाने का दबाव बढ़ गया जिसके चलते उसने भारत से पेट्रोलियम आपूर्ति की माँग की है।
पाकिस्तान में ईंधन की भारी कमी और बढ़ती कीमतों के कारण सरकार को कई सख्त कदम उठाने पड़े। स्कूलों की छुट्टियाँ बढ़ाई गईं, सरकारी दफ्तरों में काम के घंटे कम किए गए, कई जगह बाजार जल्दी बंद करने के आदेश दिए गए और सार्वजनिक सेवाओं में भी कटौती करनी पड़ी।
बांग्लादेश ने भी ऊर्जा बचाने के लिए सख्त नियम लागू किए जैसे कार्यालय समय कम करना, बिजली की खपत घटाना, अनावश्यक यात्रा पर रोक लगाना और कई सार्वजनिक गतिविधियों को सीमित करना। उसने भी ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भारत से मदद की माँग की।
श्रीलंका और नेपाल में भी इसी तरह की स्थिति बनी रही। श्रीलंका ने ऊर्जा बचाने के लिए कामकाजी दिनों में कटौती, बिजली और ईंधन पर प्रतिबंध लगाए और भारत से ईंधन सहायता ली है। नेपाल ने भी कामकाजी सप्ताहों को घटाया, ईंधन कोटा कम किया और भारत से LPG और अन्य ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने का अनुरोध किया है। यानि दुनियाभर में इस संकट का असर काफी समय से दिखाई दे रहा है। लेकिन भारत में स्थितियाँ फिलहाल बेहतर हैं।
भारत को सुरक्षित कर रहा दूरदर्शी नेतृत्व
भारत की स्थिति आज इसलिए मजबूत दिखाई दे रही है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में देश ने केवल तत्काल समस्याओं पर नहीं बल्कि भविष्य के खतरों को ध्यान में रखकर भी तैयारी की है। जब दुनिया के कई देश अचानक बढ़े ऊर्जा संकट से घबराकर सख्त प्रतिबंध लगाने लगे, तब भारत में न तो पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें दिखीं और न ही आम लोगों के बीच किसी बड़े डर का माहौल बना। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि भारत ने समय रहते ऊर्जा सुरक्षा, वैकल्पिक आपूर्ति और रणनीतिक भंडारण पर लगातार काम किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने केवल एक देश पर निर्भर रहने की नीति से बाहर निकलकर कई देशों के साथ ऊर्जा संबंध मजबूत किए। यही कारण है कि वैश्विक तनाव बढ़ने के बावजूद भारत अपनी जरूरतों के हिसाब से तेल और गैस की आपूर्ति को संतुलित रखने में सफल रहा। सरकार ने संकट को हल्के में लेने के बजाय लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की ताकि भविष्य में किसी भी बड़ी चुनौती का सामना बिना घबराहट के किया जा सके। यह अपील किसी डर या कमी का संकेत नहीं बल्कि जिम्मेदार नेतृत्व का उदाहरण मानी जा रही है।
दुनिया के कई देशों में सरकारों को अचानक स्कूल बंद करने पड़े, बाजारों के समय घटाने पड़े और ईंधन पर प्रतिबंध लगाने पड़े। लेकिन भारत में हालात नियंत्रण में बने रहे। इसका कारण केवल भंडार या आपूर्ति नहीं बल्कि वह भरोसा भी है जो सरकार ने लगातार व्यवस्था बनाए रखकर पैदा किया है। संकट के समय सबसे बड़ी चुनौती केवल संसाधनों की नहीं होती बल्कि लोगों के मन में भरोसा बनाए रखने की होती है। भारत इस मोर्चे पर मजबूत दिखाई दिया है।
आज जब विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है तब यह भी देखना जरूरी है कि दुनिया के दूसरे देशों में हालात कितने गंभीर हो चुके हैं। भारत में लोगों से संयम और सावधानी की अपील की गई है लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी सामान्य तरीके से चल रही है। यही अंतर बताता है कि दूरदर्शी तैयारी और समय पर लिए गए फैसले किसी भी संकट को कितना नियंत्रित कर सकते हैं। पीएम मोदी की अपील भी इन्हें दूरदर्शी फैसलों की कड़ी का एक हिस्सा है ताकि संकट के समय में भारत मजबूत बना रहे।


