Sunday, July 14, 2024
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‘ऑक्सीजन संकट के लिए मोदी सरकार नहीं, राज्य सरकारों को ठहराया जाना चाहिए जिम्मेदार’: BMC चीफ

भारत सरकार को इन सबके लिए दोष नहीं दिया जाना चाहिए। अगर किसी को दोषी ठहराया जाना चाहिए, तो वह हैं राज्य।

भारत कोरोनो वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा है। कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में ऑक्सीजन की सप्लाई बेहद जरूरी हो गई है। दिल्ली, महाराष्ट्र समेत कई राज्य सरकारें ऑक्सीजन की कमी के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही हैं, लेकिन मुंबई बीएमसी चीफ इकबाल सिंह चहल ने कहा है कि ऑक्सीजन संकट के लिए केंद्र नहीं राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं।

इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में चहल ने कहा कि केंद्र सरकार को देश में ऑक्सीजन संकट के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्यों को ऑक्सीजन के अपर्याप्त आवंटन के लिए दोषी ठहराया जाना चाहिए।

चहल ने कहा, “भारत सरकार को इन सबके लिए दोष नहीं दिया जाना चाहिए। अगर किसी को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, तो वह राज्य हैं।” चहल ने कहा कि देश के कई राज्य यह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे कि उनके यहाँ कोरोना के कुल कितने मामले हैं। ऐसे में केंद्र उन्हें कैसे ऑक्सीजन आवंटित करता?”

‘सटीक ऑक्सीजन आवंटन के लिए केसों की सही संख्या बताएँ राज्य’

चहल ने तर्क देते हुए कहा कि केंद्र कोविड-19 मामलों की संख्या में भारी अंतर होने के कारण राज्यों को समान मात्रा में ऑक्सीजन कैसे आवंटित कर सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र 6,000 मामले वाले राज्य और महाराष्ट्र को समान रूप से ऑक्सीजन का आवंटन नहीं कर सकता है, जहाँ रोज 60,000 नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अगर राज्य ठीक से जाँच करें, तो कोविड-19 मामलों की संख्या बहुत अधिक होगी। इसके अनुसार ही केंद्र सरकार उन्हें ऑक्सीजन आवंटित कर सकता है। लेकिन अगर वे ठीक से कोरोना के मामलों की रिपोर्ट नहीं करेंगे और कम मामले दिखाएँगे तो उनका ऑक्सीजन आवंटन उन मामलों की संख्या के अनुसार ही होगा, जिसे वे केंद्र को रिपोर्ट कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में हम केंद्र को इसका दोष नहीं दे सकते हैं।

‘अस्पतालों पर बेड बढ़ाने का दबाव बड़े शहरों में ऑक्सीजन संकट का जिम्मेदार’

यह पूछे जाने पर कि दिल्ली में निरंतर ऑक्सीजन संकट के पीछे क्या कारण हो सकता है। इस पर चहल ने बताया कि मुंबई और दिल्ली सहित कई बड़े शहरों में जब कोरोना के केस बढ़ते हैं, तब अस्पतालों पर बेड बढ़ाने के लिए दबाव डाला जाता है। हालाँकि, इस बात पर ध्यान नहीं दिया जाता है कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति सीमित है। चहल ने जोर देकर कहा कि जब कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हों ऐसी स्थिति में जंबो कोविड केंद्रों पर बेड बढ़ाए जाने चाहिए, जहाँ ऑक्सीजन की आपूर्ति का विस्तार किया जा सकता है।

बीएमसी कमिश्नर ने बताया कि 16-17 अप्रैल की रात को उनके पास खबर आई कि मुंबई में 6 अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं है। उन्होंने बताया कि इन अस्पतालों में 168 मरीज थे। इन्हें शिफ्ट कराने के लिए बीएमसी की ओर से रात को 1 बजे 5 बजे के बीच 150 एंबुलेंस लगाई गईं। सभी मरीजों को कोविड सेंटर लाया गया, जहाँ 3,600 बेड खाली थे। इनमें से 850 बेड ऑक्सीजन युक्त थे। बीएमसी सभी मरीजों की जान बचाने में सफल रही।

बीएमसी प्रमुख ने किया पूर्ण लॉकडाउन न लगाने के केंद्र के फैसले का समर्थन

चहल देश में पूर्ण लॉकडाउन लागू नहीं करने के केंद्र सरकार के फैसले से भी सहमत दिखे। उन्होंने तर्क दिया कि जिन राज्यों में कोरोना के कम मामले हैं, वे देशव्यापी लॉकडाउन का खामियाजा क्यों भुगतें। उन्होंने कोरोनो वायरस की दूसरी लहर से निपटने के लिए केंद्र के फैसले की सराहना की और राज्य सरकारों को आईना दिखाया।

बता दें कि ऑक्सीजन संकट के लिए जिम्मेदार राज्यों में एक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चहल का यह करारा जबाब है। दरअसल, महाराष्ट्र में कोरोना संकट के लिए ठाकरे सरकार शुरू से ही केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है। हालाँकि चहल ने अपने इंटरव्यू में उनके झूठ को बेनकाब कर दिया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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