महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के बांद्रा ईस्ट स्थित गरीब नगर में बुधवार (20 मई 2026) को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हिंसक झड़पें देखने को मिलीं। यह घनी आबादी वाला और मुस्लिम बहुल इलाका है। यह कार्रवाई बॉम्बे हाई कोर्ट के 29 अप्रैल के आदेश के बाद की जा रही है। निर्मल नगर पुलिस स्टेशन क्षेत्र में पश्चिम रेलवे की एंटी-एन्क्रोचमेंट टीम पर ने पथराव भी किया गया।
स्थानीय लोगों ने पुलिस, रेलवे कर्मचारियों और अन्य अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। उन पर बर्तन, पानी से भरी बाल्टियां, बोतलें और अन्य सामान भी फेंके गए। हालात बिगड़ने पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कई लोगों को हिरासत में लिया गया जिनमें महिलाएँ भी शामिल थीं। इस हमले में 7 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं जबकि 10 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। मामले में FIR दर्ज कर ली गई है और आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
अब तक अतिक्रमण हटाने का करीब 60% काम पूरा हो चुका है। लगभग 300 घरों और अन्य अवैध निर्माणों को हटाया गया है जिनमें बांद्रा ईस्ट स्टेशन के पास स्थित एक अवैध मस्जिद भी शामिल है। तय समय में कार्रवाई पूरी करने के लिए मशीनों की संख्या भी बढ़ा दी गई है। इस अभियान के लिए करीब 1,200 सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों को तैनात किया गया है।
एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, मस्जिद का एक हिस्सा हटाए जाने के बाद स्थिति बिगड़ी। करीब 50-60 लोग विरोध जताने के लिए जमा हुए लेकिन बार-बार समझाने के बावजूद वे शांत नहीं हुए और पथराव शुरू कर दिया जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। इलाके में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
500 अवैध ढांचों को हटाने और करीब 5,300 वर्ग मीटर कब्जाई गई रेलवे जमीन को खाली कराने के लिए 19 मई से 5 दिन का अभियान शुरू किया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांद्रा ईस्ट की ओर जाने वाले ओवरब्रिज के पास रेलवे लाइन के किनारे 700 से ज्यादा अवैध झुग्गियाँ बनी हुई हैं। इनमें कुछ 5 से 6 मंजिला ऊँची इमारतें भी शामिल हैं।
प्रशासन की ओर से लोगों को पहले ही घर खाली करने की सूचना दे दी गई थी, ताकि कार्रवाई के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) विनीत अभिषेक ने कहा कि प्रभावित लोगों को जरूरी सुविधाएँ देने की कोशिश की जा रही है। जरूरत पड़ने पर पीने का पानी और खाने के पैकेट भी बाँटे जा रहे हैं।
इस मामले पर भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा, “मुस्लिम भूमि माफियाओं ने अवैध झुग्गियों पर कब्जा किया था। अब कोर्ट और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद कार्रवाई शुरू हुई है। मुंबई में ‘लैंड जिहाद’ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
यह कार्रवाई क्यों है रेलवे के लिए जरूरी
इस कार्रवाई के पीछे सिर्फ अवैध निर्माण हटाना ही उद्देश्य नहीं है बल्कि पश्चिम रेलवे के बड़े विस्तार प्रोजेक्ट को भी आगे बढ़ाना है। इस इलाके में रेलवे की क्षमता बढ़ाने, नए स्टेबलिंग लाइन (ट्रेनों को खड़ा करने की जगह), एकीकृत रेलवे कॉम्प्लेक्स और दूसरे इन्फ्रा प्रोजेक्ट शुरू किए जाने हैं। रेलवे की योजना के तहत सांताक्रूज-मुंबई सेंट्रल कॉरिडोर पर 5वीं और 6वीं रेलवे लाइन का विस्तार इसी खाली कराई गई जमीन के जरिए किया जाएगा। करीब 500 मीटर लंबी यह जमीन रेलवे ट्रैक के किनारे स्थित है और रेल भूमि विकास प्राधिकरण (RLDA) की व्यावसायिक योजनाओं के लिए भी बेहद अहम मानी जा रही है।
इस परियोजना के पूरा होने से मुंबई से चलने वाली करीब 50 नई ट्रेनों का संचालन आसान होगा। साथ ही उपनगरीय ट्रेनों में भारी भीड़ कम करने, बांद्रा सबअर्बन स्टेशन और बांद्रा टर्मिनस के बीच बेहतर कनेक्टिविटी बनाने और लोकल व लंबी दूरी की ट्रेनों को अलग-अलग ट्रैक पर चलाने में मदद मिलेगी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इससे आसपास की रेलवे जमीन का व्यावसायिक विकास भी तेजी से हो सकेगा।
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) विनीत अभिषेक ने कहा, “जिस जमीन को खाली कराया गया है, वह बांद्रा इंटीग्रेटेड रेलवे कॉम्प्लेक्स का हिस्सा बनेगी। इस नई खाली हुई जमीन से बांद्रा रेलवे स्टेशन का विस्तार किया जाएगा, जिससे नए ट्रैक पर 12 अतिरिक्त ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। इतने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण शहर को बंधक बनाकर नहीं रख सकता।”
अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई रेलवे ट्रैक की सुरक्षा के लिहाज से भी जरूरी है। रेलवे लाइन के आसपास अतिक्रमण और कूड़ा फेंकने की वजह से ट्रेन सेवाओं पर खतरा बना रहता है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी अपने आदेश में इन चिंताओं को ध्यान में रखा था।
गरीब नगर और कॉन्ग्रेस नेता सुनील दत्त का पुराना कनेक्शन
दिलचस्प बात यह है कि गरीब नगर के कई अवैध निवासियों ने इस कार्रवाई के दौरान दिवंगत अभिनेता और कॉन्ग्रेस सांसद रहे सुनील दत्त को याद किया। उनका कहना था कि पहले भी ऐसी कार्रवाई हुई थी लेकिन सुनील दत्त ने उसे रुकवा दिया था। एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, “अगर आज सुनील दत्त होते तो कोई हमें यहाँ से हटा नहीं पाता।”
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि इलाके के लोग लंबे समय तक कुछ राजनीतिक दलों के भरोसे और संरक्षण में रहे। एक शख्स ने कहा, “हम सुरक्षित थे क्योंकि हम सुनील दत्त को वोट देते थे।” वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने आरोप लगाया, “चुनाव के समय हम जैसे ‘अनधिकृत’ लोग नेताओं के लिए ‘अधिकृत’ बन जाते हैं। सांसद, विधायक सब वोट माँगने आते थे लेकिन अब जब घर टूट रहे हैं तो कोई मदद के लिए नहीं है।”
एक स्थानीय निवासी ने दावा किया कि चुनाव के दौरान बांद्रा विधायक वरुण सरदेसाई ने भरोसा दिया था कि गरीब नगर के लोगों को कोई दिक्कत हो तो वे उनसे संपर्क करें। स्थानीयों का कहना है कि उनके पास आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी हैं लेकिन बिना किसी सर्वे के तोड़फोड़ कर दी गई।
सुनील दत्त पर लगे थे क्या आरोप
1984 में कॉन्ग्रेस में शामिल हुए सुनील दत्त को अवैध झुग्गियों को संरक्षण देने के आरोपों को लेकर पहले भी आलोचना झेलनी पड़ी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने मुंबई नॉर्थ-वेस्ट सीट 5वीं बार जीती थी लेकिन बांद्रा-खार-जुहू क्षेत्र में उनके कई समर्थक उनसे नाराज हो गए थे। आरोप था कि उन्होंने सार्वजनिक जगहों पर बढ़ती अवैध झुग्गियों को रोकने के लिए प्रयास नहीं किए। इसका असर चुनाव नतीजों में भी दिखा और उनकी जीत का अंतर 1999 के करीब 85,500 वोटों से घटकर 2004 में लगभग 47,000 रह गया।
सिटीस्पेस समिति की सदस्य विद्या वैद्य ने आरोप लगाया था कि सुनील दत्त ने टैक्स देने वाले नागरिकों की चिंताओं को नजरअंदाज किया। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता एडविन ब्रिटो ने शिकायत की थी कि बांद्रा और खार में बढ़ते अवैध निर्माणों को रोकने में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी रही। उन्होंने कहा था कि लिंकिंग रोड जैसे इलाकों में पैदल चलने तक की जगह नहीं बची।
वकील आर. हरिदास के अनुसार, इस इलाके की कुछ जमीनें जो पहले पार्क और खेल मैदानों के लिए तय थीं, बाद में स्लम रिहैबिलिटेशन के लिए चिन्हित कर दी गईं।
स्लम राजनीति और वोट बैंक का खेल
2021 में कॉन्ग्रेस नेताओं ने स्लम निवासियों के समर्थन में बांद्रा कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया था। माँग की गई थी कि केंद्र सरकार की जमीन, खासकर एयरपोर्ट अथॉरिटी की जमीन पर बसे झुग्गीवासियों को भी 1995 से पहले की स्लम सुरक्षा नीति का लाभ मिले। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने सुरक्षा कारणों से इन झुग्गियों को हटाने की बात कही थी लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई टालने की माँग उठी।
इससे पहले 1980 के दशक में महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई की झुग्गियों को हटाने की कोशिश की थी, जिसका विरोध कई सामाजिक संगठनों और एक्टिविस्ट्स ने किया। अभिनेत्री शबाना आजमी से जुड़े संगठन भी उस समय कट-ऑफ डेट बढ़ाने की माँग कर रहे थे। बाद में सुनील दत्त को कॉन्ग्रेस के लिए ऐसे नेता के रूप में देखा गया जो नाराज वोटरों को वापस ला सकते थे। बताया जाता है कि सुनील दत्त ने सोनिया गाँधी से हस्तक्षेप करवाकर तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासरवा देशमुख से मुंबई की झुग्गियों पर बुलडोजर कार्रवाई रुकवाने की भी कोशिश की थी।
बांद्रा के पास स्थित नर्गिस दत्त नगर स्लम को लेकर भी समय-समय पर विवाद उठे। कुछ स्थानीय संगठनों ने आरोप लगाया कि यह इलाका राजनीतिक वोट बैंक बनाने का माध्यम बन गया। स्थानीय निवासी संगठनों का दावा था कि नेताओं की चुप्पी के कारण अवैध बस्तियां लगातार बढ़ती गईं। 2015 में राज ठाकरे ने भी मुंबई की झुग्गी समस्या के लिए सुनील दत्त, शबाना आजमी और दिवंगत एनसीपी नेता बाबा जियाउद्दीन सिद्दीकी को जिम्मेदार ठहराया था।
धारावी में भी दिखी ऐसी ही कहानी
गरीब नगर की मौजूदा घटना कई मायनों में मुंबई की धारावी बस्ती से मिलती-जुलती नजर आती है, जहाँ पिछले कई वर्षों से रीडेवलपमेंट को लेकर लगातार विवाद और विरोध देखने को मिलता रहा है। एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती मानी जाने वाली धारावी के पुनर्विकास का काम अडानी ग्रुप और महाराष्ट्र सरकार की संयुक्त कंपनी नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (पहले धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड) के जरिए किया जा रहा है।
करीब 2.4 वर्ग किलोमीटर में फैले इस इलाके को आधुनिक टाउनशिप में बदलने की योजना है। इस परियोजना को लेकर लगातार विरोध भी हुआ। 2024 में शिव सेना (UBT) और कॉन्ग्रेस ने धारावी में ‘धारावी न्याय यात्रा’ निकाली और परियोजना का विरोध किया।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता और कॉन्ग्रेस सांसद भी धारावी पहुँचे थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह पुनर्विकास परियोजना एक दिखावा है और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ एक कारोबारी को फायदा पहुँचाने के लिए सौंपा है। वहीं, कॉन्ग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड ने भी जमीन कब्जाने के आरोप लगाए थे।
निष्कर्ष
परियोजनाओं की जगह भले अलग-अलग हो लेकिन कॉन्ग्रेस की राजनीति को लेकर उठने वाले सवाल अक्सर एक जैसे दिखाई देते हैं। आलोचकों का कहना है कि पार्टी कई मुद्दों को राष्ट्रीय हित के बजाय राजनीतिक फायदे और वोट बैंक के नजरिए से देखती है। इसी वजह से झुग्गी पुनर्विकास और अतिक्रमण हटाने जैसी परियोजनाओं का विरोध सामने आता रहा है। मुंबई जैसे बड़े शहरों में बढ़ती अवैध बस्तियाँ न सिर्फ बुनियादी ढाँचे और विकास के सामने चुनौती बन गई हैं बल्कि कई जगह सार्वजनिक जमीन पर कब्जे और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का कारण भी बनी हैं।
ऐसे में सरकार और प्रशासन का कहना है कि पहले की सरकारों और राजनीतिक संरक्षण के दौरान विकसित हुई अवैध बस्तियों पर कार्रवाई जरूरी है ताकि शहरों का विकास, सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हो सके। कोर्ट के आदेश के अनुसार चल रही ऐसी कार्रवाई बिना किसी हिंसा, राजनीतिक हस्तक्षेप या भ्रामक दावों के पूरी होनी चाहिए ताकि विकास परियोजनाएँ समय पर पूरी हो सकें और प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा सके।
(यह खबर मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है जिसे इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।)


