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पंजाब में ‘मौत का खेल’ बना कबड्डी, गैंगवार में आए दिन मारे जा रहे खिलाड़ी: कब तक हाथ पर हाथ धरे बैठी रहेगी AAP सरकार

जब खेल के मैदान में गोलियाँ चलें, जब खिलाड़ी सुरक्षा मांगें और जब सरकार चुप रहे तो यह सिर्फ कानून‑व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि राज्य की असुरक्षा का संकेत हैं। पंजाब अभी भी संभल सकता है, लेकिन इसके लिए सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति, पुलिस सुधार और सामाजिक जागरूकता की जरूरत है।

पंजाब में कबड्डी सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान है। गाँवों की चौपालों से लेकर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों तक, यह खेल पंजाब की मिट्टी की ताकत और परंपरा का प्रतीक रहा है। लेकिन पिछले कुछ महीनों में कबड्डी के खिलाड़ियों के लिए पंजाब की धरती एक डरावने सपने की तरह सामने आ रहा है।

हालाँकि कबड्डी खिलाड़ी अब लगातार गैंगस्टरों के निशाने पर आ रहे हैं। बीते 3 महीनों में कई खिलाड़ियों की गैंगवार के तहत हत्या कर दी गई। सोमवार (15 दिसंबर 2025) को मोहाली के सोहाना इलाके में एक प्राइवेट कबड्डी टूर्नामेंट चल रहा था, तभी मोटरसाइकिल पर आए 2-3 हमलावरों ने खिलाड़ी राणा बलाचौरिया पर गोलियाँ चला दीं।

इससे पहले 4 नवंबर 2025 को समराला ब्लॉक में 23 वर्षीय कबड्डी के नेशनल प्लेयर गुरविंदर सिंह पर रात करीब 9 बजे चार नकाबपोश हमलावरों ने गोलियाँ चलाईं। उन्हें इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जिम्मेदारी ली।

31 अक्टूबर 2025 को लुधियाना के जगराओं में SSP ऑफिस के पास 25 वर्षीय कबड्डी खिलाड़ी तेजपाल सिंह को पहले पीटा गया, फिर गोली मारी गई। पुलिस ने इसे पुरानी रंजिश से जुड़ा मामला बताया।

इसके अलावा 14 मार्च 2022 को जालंधर में कबड्डी के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी संदीप नंगल अंबियाँ को ओपन टूर्नामेंट के दौरान कई हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। पूरी घटना कैमरे में भी कैद हुई।

विपक्ष ने भी आप सरकार को लिया आड़े हाथ

राणा बलाचौरिया की हत्या की घटना से जुड़ा वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में गोलीबारी की आवाजें सुनी जा सकती हैं। यह स्थिति पंजाब सरकार की कानून‑व्यवस्था को तार-तार करने के साथ पंजाब के सामाजिक ढाँचे में गहराई तक घुस चुके अपराध का ताना‑बाना भी दिखाता है।

इस मामले पर नेताओं ने भी AAP सरकार को आड़े हाथों लिया है। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और कॉन्ग्रेस नेता परगत सिंह ने भी मामले को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा कर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।

राणा बलाचौरिया की हत्या कर अपराधियों ने ये भी कहा कि ये उनका बदला है। इसमें पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला का नाम भी सामने आया। बंबीहा गैंग ने सोशल मीडिया पर हत्या की जिम्मेदारी ली।

मामले में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इस हत्या के लिए सीधे तौर पर ‘आप’ सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि यह पंजाब में कानून और व्यवस्था के पूरी तरह फेल होने का सबूत है। 

पंजाब और गैंगस्टर्स का ‘कनेक्शन’

पंजाब में म्यूजिक इंडस्ट्री और गैंगस्टर नेटवर्क का गहरा कनेक्शन है। ये पंजाब सरकार के लिए न केवल एक चुनौती बल्कि इसके लिए अब तक सरकार की ओर से कोई कदम न उठा पाना एक करारा तमाचा भी है।

पंजाबी गायकों के बड़े शो, इवेंट्स और विदेशों में होने वाले कॉन्सर्ट्स में गैंगों की दखल लंबे समय से रही है। कई गायकों ने धमकियों और वसूली की शिकायतें की हैं। हालाँकि कुछ गानों में गैंगस्टरों के नाम और हिंसा का महिमामंडन भी होता है, जिससे अपराधियों को पॉप‑कल्चर में वैधता मिलती है। इसके कारण खिलाड़ियों और गायकों के लिए जोखिम भी बढ़ता है क्योंकि वे विरोधी गैंगों के लिए ‘हाई‑विजिबिलिटी टारगेट’ बन जाते हैं।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पंजाब सरकार और प्रशासन इस पूरे संकट पर लगभग खामोश दिखाई देते हैं। दिनदहाड़े हत्याएँ, वायरल वीडियो, सोशल मीडिया पर गैंगों की धमकियों के बावजूद सरकार की ओर से कोई बड़ा बयान या ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।

जाँच में पुलिस इंटेलिजेंस की नाकामी साफ दिखती है क्योंकि गैंगस्टर खुलेआम जिम्मेदारी ले रहे हैं और फिर भी गिरफ्तारी या रोकथाम की कोशिशें नाकाफी साबित होती है। इसके अलावा पंजाब में गैंगस्टर नेटवर्क अब लोकल के बजाय अंतररराष्ट्रीय भी अधिक हो गया है। कई गैंग विदेशों से ऑपरेट करते हैं। इसके चलते पुलिस के लिए चुनौती और बढ़ जाती है।

अपराध का ताना‑बाना अब आम लोगों के बीच भी बुना जा रहा है। सोशल मीडिया गैंगों का नया हथियार बन चुका है- धमकी, प्रचार, भर्ती, सब कुछ ऑनलाइन होता है। पंजाब में बेरोजगारी और नशे की समस्या ने युवाओं को और कमजोर बनाया है और गैंगस्टर इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाते हैं।

पंजाब सरकार को रणनीतिक कदम उठाने की जरूरत

जब खेल के मैदान में गोलियाँ चलें, जब खिलाड़ी सुरक्षा मांगें और जब सरकार चुप रहे तो यह सिर्फ कानून‑व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि राज्य की असुरक्षा का संकेत हैं। पंजाब अभी भी संभल सकता है, लेकिन इसके लिए सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति, पुलिस सुधार और सामाजिक जागरूकता की जरूरत है।

कबड्डी और संगीत दोनों में पैसा और पब्लिक इन्फ्लुएंस बहुत है, इसलिए गैंगों की दिलचस्पी भी बढ़ती जा रही है। इस स्थिति से निकलने के लिए पंजाब को एक मजबूत, बहुस्तरीय रणनीति की जरूरत है। स्पेशल एंटी‑गैंगस्टर टास्क फोर्स, इंटरनेशनल कोऑपरेशन, कबड्डी टूर्नामेंटों की सुरक्षा, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और खिलाड़ियों‑गायकों के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल जैसे कदम तुरंत उठाए जाने चाहिए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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