Homeदेश-समाजपंजाब में पुजारी पर ताबड़तोड़ फायरिंग, बचाने दौड़ी नाबालिग लड़की की हालत भी गंभीर

पंजाब में पुजारी पर ताबड़तोड़ फायरिंग, बचाने दौड़ी नाबालिग लड़की की हालत भी गंभीर

अचानक से आए अज्ञात बदमाशोंं ने गाँव के मंदिर के पुजारी संत ज्ञान पर गोलियों की बौछार कर दी। पुजारी को बचाने की कोशिश में 16 साल की लड़की सिमरन भी गोलियों की चपेट में आ गई।

पंजाब के जालंधर जिले के फल्लौर गाँव में एक पुजारी पर अंधाधुंध फायरिंग की घटना सामने आई है। मिली जानकारी मुताबिक पुजारी संत ज्ञान को तीन गोलियाँ लगी हैं। एक नाबालिग लड़की भी इस हमले का शिकार हुई है। दोनों को गंभीर हालत में लुधियाना के डीएमसी में दाखिल करवाया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना आज (31 जनवरी, 2021) सुबह की है। अचानक से आए अज्ञात बदमाशोंं ने गाँव के मंदिर के पुजारी संत ज्ञान पर गोलियों की बौछार कर दी। इस दौरान पुजारी को बचने का कोई भी मौका नहीं मिला। पुजारी को बचाने की कोशिश में 16 साल की लड़की सिमरन भी गोलियों की चपेट में आ गई। उसे हमलावरों की दो गोलियाँ लगी है।

वारदात के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश में जुट गई है।

कुछ साल पहले ही पुजारी ने मंदिर की स्थापना की थी। बताया जा रहा है कि इस मंदिर के स्थापना वाले दिन भी कुछ लोगों ने विरोध किया था। पुलिस मामले की अलग-अलग एंगल से जाँच कर रही है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। घटना के बाद से ही इलाके में हड़कंप मचा हुआ है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -