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QS रैंकिंग में 10 साल में दस गुना बढ़ी भारत की भागीदारी, संस्थान के VP ने कहा- साफ दिख रहा है NEP 2020 का असर: जानें मोदी सरकार ने कैसे बदले उच्च शिक्षा के हालात?

सरकार ने 'विद्या लक्ष्मी योजना' (2024) शुरू की, जिसके तहत 860 बड़े कॉलेजों के गरीब छात्रों को बिना कुछ गिरवी रखे ₹2,358 करोड़ का लोन दिया गया है, ताकि वे आसानी से पढ़ सकें। इसके अलावा, हमारी IITs अब विदेश में भी खुल रही हैं।

हाल ही में, क्यूएस (QS) नाम की संस्था ने एशिया के सबसे अच्छे विश्वविद्यालयों की लिस्ट जारी की है, जिसका नाम है क्यूएस एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026। इस लिस्ट में भारत ने कमाल कर दिया है। एशिया के टॉप 100 सबसे बेहतरीन कॉलेजों में भारत के कुल 7 बड़े शिक्षण संस्थान शामिल हुए हैं। इनमें पाँच बड़े आईआईटी, IIT दिल्ली, IIT मद्रास, IIT बॉम्बे, IIT कानपुर, और IIT खड़गपुर शामिल हैं। अन्य दो में भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु और दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU)।

IIT दिल्ली को इस साल 59वीं रैंक मिली है और यह लगातार पाँचवीं बार भारत का नंबर-1 संस्थान बना है। सिर्फ टॉप 100 ही नहीं, बल्कि टॉप 200 में भारत के 20 कॉलेज और टॉप 500 में 66 कॉलेज शामिल हैं। क्यूएस के मुताबिक, भारत में PhD किए हुए टीचरों की संख्या पूरे एशिया में सबसे अच्छी है। इसका मतलब है कि हमारे कॉलेज गुणवत्ता के मामले में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। पिछली बार की तुलना में, भारत के 36 कॉलेजों ने अपनी रैंक सुधारी है, जबकि 105 कॉलेज नीचे चले गए हैं। क्यूएस ने बताया कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इस बार रैंकिंग में बहुत सारे नए कॉलेजों को शामिल किया गया था, जिससे रिजल्ट में थोड़ा बदलाव आया है।

आईआईटी, आईआईएससी की बढ़ती धाक और नई शिक्षा नीति का कमाल

हमारे देश के बड़े-बड़े शिक्षण संस्थान, जैसे कि आईआईटी (IITs) और आईआईएससी (IISc), अब सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया में खूब चमक रहे हैं। क्यूएस एशिया रैंकिंग 2026 के जो नंबर आए हैं, वे बताते हैं कि पिछले दस सालों में भारत ने एशिया की टॉप यूनिवर्सिटी की लिस्ट में अपनी जगह दस गुना ज्यादा पक्की कर ली है। इसका मतलब है कि हमारे कॉलेज अब टेक्नोलॉजी, रिसर्च और अच्छी पढ़ाई के मामले में दुनिया में अपनी पहचान बना रहे हैं। यह दिखाता है कि भारत अब शिक्षा की दुनिया में एक बड़ा नाम बन रहा है।

इस बड़ी कामयाबी के पीछे एक बड़ी वजह है राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020। इस नई शिक्षा नीति ने पढ़ाई के तरीकों को काफी बदल दिया है। अब पढ़ाई में अलग-अलग विषयों को जोड़कर पढ़ाया जा रहा है, रिसर्च यानी खोजबीन पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है और विदेशी यूनिवर्सिटी से दोस्ती (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) बढ़ाई जा रही है। क्यूएस ने खुद कहा है कि पूरे एशिया के कॉलेजों का नाम दुनिया में बढ़ रहा है और भारत इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है। यह नीति हमारे छात्रों और रिसर्च करने वालों को नए मौके दे रही है और कॉलेजों को और ताकतवर बना रही है।

क्यूएस (QS) के वाइस प्रेसिडेंट की प्रतिक्रिया

क्यूएस संस्था के वाइस प्रेसिडेंट, मैटेओ क्वाककेरेली ने भारत की इस कामयाबी पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पिछले दस सालों में भारत ने शिक्षा में बहुत बड़ा बदलाव किया है, जैसे रिसर्च (खोजबीन) को बढ़ाना और नए-नए तरीके अपनाना। उनकी बात से पता चलता है कि रैंकिंग में भारत के कॉलेज दस गुना बढ़ गए हैं, जो एशिया की शिक्षा में भारत के बढ़ते योगदान को दिखाता है।

क्यूएस संस्था के वाइस प्रेसिडेंट मैटेओ क्वाककेरेली ने भारत की तारीफ की

उन्होंने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के कारण यह असर दिख रहा है, क्योंकि यह नीति कॉलेजों को मजबूत बना रही है और सहयोग के नए रास्ते खोल रही है। उन्होंने माना कि एशिया के कॉलेज दुनिया में अपनी पहचान बना रहे हैं, और क्यूएस इस बदलाव में सबको मदद करता रहेगा।

पीएम मोदी ने की सराहना

भारत के नेताओं ने इस उपलब्धि पर बहुत खुशी जताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि क्यूएस रैंकिंग में भारतीय कॉलेजों की संख्या में हुई इतनी बड़ी बढ़ोतरी देखकर उन्हें बहुत खुशी हुई है। उन्होंने साफ किया कि सरकार चाहती है कि हमारे युवाओं को सबसे अच्छी पढ़ाई मिले, इसलिए उनका ध्यान रिसर्च और इनोवेशन (नई खोजों) पर है।

पीएम मोदी ने कहा कि सरकार देश भर में नए शिक्षण संस्थान खोलकर उनकी ताकत बढ़ा रही है। वहीं, (भारतीय) उपराष्ट्रपति ने भी भारतीय कॉलेजों की इस प्रगति की तारीफ करते हुए इसे शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी जीत बताया। इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि भारत अब शिक्षा और रिसर्च में पूरे एशिया में सबसे आगे निकलने की राह पर है।

भारत की शिक्षा में बड़ा बदलाव: NEP 2020 का असर

पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने ‘विद्या लक्ष्मी योजना’ (2024) शुरू की, जिसके तहत 860 बड़े कॉलेजों के गरीब छात्रों को बिना कुछ गिरवी रखे ₹2,358 करोड़ का लोन दिया गया है, ताकि वे आसानी से पढ़ सकें। इसके अलावा, हमारी IITs अब विदेश में भी खुल रही हैं, जैसे जंजीबार, अबू धाबी और दुबई। साथ ही, ऑस्ट्रेलिया के डेकिन और वोलोंगोंग जैसे बड़े विदेशी कॉलेज भी अब भारत आकर कैंपस खोल रहे हैं। यह सब दिखाता है कि भारतीय शिक्षा अब ग्लोबल हो रही है।

ऑनलाइन पढ़ाई और संस्थानों को मजबूती

ऑनलाइन पढ़ाई के लिए भी बहुत काम हुआ है। ‘स्वयं’ पोर्टल पर 5 करोड़ से ज़्यादा लोगों ने नाम दर्ज कराया है, जिसमें वे ऑनलाइन पढ़कर अपनी डिग्री का क्रेडिट (अंक) कॉलेज में जोड़ सकते हैं। ‘वर्चुअल लैब्स’ ने 900 से ज़्यादा ऑनलाइन प्रयोगशालाएँ बनाई हैं, और ‘डिजिटल लाइब्रेरी’ में 8 करोड़ से ज़्यादा किताबें मौजूद हैं। इसके अलावा, ‘पीएम-ऊषा’ स्कीम के तहत 35 विश्वविद्यालयों को ₹100-100 करोड़ दिए गए हैं, ताकि वे अपनी पढ़ाई की गुणवत्ता सुधार सकें और खुद को आधुनिक बना सकें। ये सारे कदम नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के लक्ष्यों को पूरा कर रहे हैं।

लक्ष्य और कॉलेज का नया ढाँचा

नई शिक्षा नीति (NEP 2020) का सबसे बड़ा लक्ष्य 2035 तक ज्यादा से ज्यादा छात्रों को कॉलेज तक पहुँचाना है (50% GER)। इसके लिए, सरकार चाहती है कि 2040 तक सभी कॉलेज ऐसे बनें जहाँ कई विषय एक साथ पढ़े जा सकें (जैसे साइंस के साथ आर्ट्स)। 2030 तक हर जिले में कम से कम एक बड़ा कॉलेज (HEI) खोलने का भी प्लान है। इसके साथ ही, ‘राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन’ बनाया जा रहा है ताकि रिसर्च (खोजबीन) को बढ़ावा मिले। कॉलेजों को उनके काम के हिसाब से रिसर्च या सिर्फ पढ़ाने वाले कॉलेज में बाँटा जाएगा, ताकि उनकी जिम्मेदारी और अच्छी पढ़ाई की गारंटी बढ़ सके।

छात्रों को आजादी और ऑनलाइन पढ़ाई

इस नीति से छात्रों को पढ़ाई में पूरी आजादी मिल रही है। छात्र अब अपनी जरूरत के हिसाब से बीच में पढ़ाई छोड़ सकते हैं और बाद में फिर से शुरू कर सकते हैं (मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट)। साथ ही, ‘अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ शुरू हुआ है, जिससे छात्र कहीं भी पढ़ें, उनके अंक (क्रेडिट) सुरक्षित रहेंगे। ऑनलाइन पढ़ाई को भी खूब बढ़ावा मिला है, अब छात्र ऑनलाइन कोर्स (जैसे स्वयं MOOCs) से अपनी डिग्री के 40% तक अंक कॉलेज में जोड़ सकते हैं। इससे देश भर के करीब 19 लाख से ज्यादा छात्र ऑनलाइन कोर्स और दूरस्थ शिक्षा (Distance Learning) का फायदा उठा रहे हैं।

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